जन्माष्टमी पर कविता 2020 डाउनलोड श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर बेस्ट 5 कविता हिंदी में

जन्माष्टमी पर कविता 2020 डाउनलोड श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर बेस्ट 5 कविता हिंदी में Krishna Janmashtami Poem in Hindi, Download 5 Best Shree Krishna Janmashtami poem in Hindi ,Poems on Krishna and Yashoda in Hindi ,Famous Poems on Krishna in Hindi and Janmashtami 2020 Poem in Marathi  : नमस्कार दोस्तों सबसे पहले Krishna Janmashtami 2020 के उपलक्ष में आप सभी को Rkalert टीम की तरफ से हार्दिक शुभकामना | जैसे का आप जानते है भगवान श्री कृष्ण हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक है | जिन्होंने इस धरा पर मनुष्य के रूप में जन्म लिया था | दोस्तों जन्माष्टमी पर्व का हिन्दू धर्म में बहुत महत्व माना गया है | इस पर्व को भगवान श्री कृष्ण के जन्म दिवस के रूप में मनाया जता है | जन्माष्टमी को अलग-अलग नाम से जाना जाता है जैसे बहुत नाम है जैसे कृष्णाष्टमी, गोकुलाष्टमी, अष्टमी रोहिणी, श्री कृष्ण जयंती, श्री कृष्णा जयंती आदि | वर्ष 2020 में जन्माष्टमी 12 अगस्त 2020 को मनाई जाएगी | जबकि भगवान् श्री कृष्ण अनेको नाम थे जिनक वर्णन हम निचे कर रहे है |

Janmashtami 2020 Poem in Marathi

Krishna Janmashtami Poem in Hindi

Krishna Janmashtami Poem in Hindi : दोस्तों आज हम इस पेज पर आप के लिए लेकर आये जन्माष्टमी पर कविता 2020 ,श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर बेस्ट 5 कविता ,भगवान कृष्ण पर कविताएं,राधा कृष्ण कविता इन हिंदी,कृष्ण कन्हैया पर कविता,कान्हा पर कविता,राधे कृष्ण पर कविता,कृष्ण जन्म पर कविता ,(Best 5 Poem on janmashtami in hindi, poem on bal krishna in hindi,krishna ki bal leela poem in hindi,krishna janmashtami 2020 poem in Hindi ,poem on natkhat krishna in hindi,krishna ki bal leela poem in hindi के अलावा हमने इस पेज पर कुछ भगवान कृष्ण पर छंद और कृष्ण पर श्लोक भी प्रदान किये है जो निचे इस आर्टिकल में उपलब्ध है | दोस्त आप ये जन्माष्टमी पर कविता 2020 हिंदी,मराठी ,तेलगु ,गुजराती ,बंगाली ,आदि में भी डाउनलोड कर सकते है |

कृष्ण जन्माष्टमी पर कविता = मेरे घर भी आना कान्हा

तरसी यशोदा, सुन सुन कान्हा
अबके मेरे घर भी आना
अंगना सूना आंखें सूनी
इनमें ख्वाब कोई भर जाना
कितना ढूंढू कित कित ढूंढू
कि‍धर छुपे हो मुझे बताना
ममता माखन लिए खड़ी है
आकर इसको अधर लगाना
मेरे कान हैं तरसे लल्ला
तू मुझको अम्मा कह जाना

Poem on Natkhat Krishna in Hindi : कान्हा कन्हैया नटखट चितचोर

जन्माष्टमी पर एक लघु प्रयास
कान्हा कन्हैया नटखट चितचोर
मैया के आँगन की शोभा बढ़ावे ।
शीश पे मोर पंखी का सुंदर ताज धर
सबके नैनो को बहुत सुख पहुँचावे ।
नन्हे नन्हे पाँवो से कर अठखेलियाँ
मुख पे माखन लगा श्याम इतरावे।
गली गली घूमत कान्हा मटकी फोड़त
गोपियो संग खूब रास लीला रचावे।
मैया यशोदा लेवे कान्हा की बलइयाँ
ग्वालो के संग ब्रज में करतब दिखावे ।
यमुना तट पे बंशी की मीठी तान बजा
मनमोहक आकर्षक रूप में खूब लुभावे।
गिरधारी तो है वृंदावन के रास रचैया
प्रिय राधा संग प्रेम की लीला रचावे।
अधर्म बुराई शत्रुओ का संहार कर
मुरारी पूरे जग के पालनहार कहलावे।

कृष्ण की बाल लीला पर कविता | Janmashtami Poem in Hindi

देवकी ने जन्म दिया
यशोदा मैया ने पाला ,रे गोपाला …
कारागृह में जन्म हुआ
वसुदेव का वो लाला ,रे गोपाला….

लीला करता नित्य नई वो
यशोदा मैया का लाला ,रे गोपाला…
माटी खाये ब्राम्हांड दिखाये
नटखट बड़ा है नंदलाला ,रे गोपाला…

माखन चुराता ग्वाल बाल संग
वंशी बजाने वाला, रे गोपाला…
धैनु चराता वन वन जाता
मुरली बजाने वाला ,ये गोपाला….

कृष्ण कन्हैया रास रचैया,
गोपियों के मन को हरने बाला,रे गोपाला…
गोपियो के वस्त्र चुराता सबक सिखाता,
ऐसा है वो ब्रजवाला,रे गोपाला……

जन्माष्टमी विशेष कविता : बांसुरी | Janmashtami Special Poem in Hindi : Bansuri

बांसुरी वादन से, खिल जाते थे कमल
वृक्षों से आंसू बहने लगते,
स्वर में स्वर मिलाकर, नाचने लगते थे मोर ।
गायें खड़े कर लेतीं थी कान,
पक्षी हो जाते थे मुग्ध,
ऐसी होती थी बांसुरी तान… ।
नदियां कल-कल स्वरों को,
बांसुरी के स्वरों में मिलाने को थी उत्सुक
साथ में बहाकर ले जाती थी, उपहार कमल के पुष्पों के,
ताकि उनके चरणों में, रख सके कुछ पूजा के फूल ।

ऐसा लगने लगता कि, बांसुरी और नदी मिलकर, करती थी कभी पूजा
जब बजती थी बांसुरी, घनश्याम पर बरसाने लगते, जल अमृत की फुहारें
अब समझ में आया, जादुई आकर्षण का राज
जो आज भी जीवित है, बांसुरी की मधुर तान में
माना हमने भी, बांसुरी बजाना पर्यावरण की पूजा करने के समान है,
जो कि‍ हर जीव में प्राण फूंकने की क्षमता रखती,
और सुनाई देती है कर्ण प्रिय बांसुरी ।

राधा कृष्ण कविता इन हिंदी | poems on krishna and yashoda in hindi

राधा कृष्ण कविता इन हिंदी | poems on krishna and yashoda in hindi: Janmashtami 2020 Poem in Hindi कृष्णा जन्मणाष्टमी हिन्दुओं धार्मिक पर्व है जो की हर वर्ष भादो माह की कृष्‍ण पक्ष की अष्‍टमी तिथि के दीन आता है | इस वर्ष जन्मणाष्टमी का पर्व 12 अगस्त 2020 को मनाया जायेगा | इस जन्मणाष्टमी के पावन पर्व पर हमने कुछ चुनिन्दा Janmashtami 2020 Poem in Hindi,जन्माष्टमी कविता अबके मेरे घर भी आना , बांसुरी वादन से, खिल जाते थे कमल , कान्हा, गोपाल की, जय कन्हैया लाल की, कान्हा के जन्म के वर्णन पर कविता का संग्रह लेकर आये है | जिन्हें आप आपने मोबाईल में डाउनलोड कर सेव कर सकते है और आपनी class में सुना सकते है | इसके अलावा आप श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर कविता को अपने दोस्तों ,रिश्तेदारों को whatsapp, facebook ,instagram ,Tweter के माध्यम से सेंड कर सकते है |

जन्माष्टमी पर हिन्दी कविता : एक तुम्हीं तो हो कृष्ण

चल पड़े थे कई विचारों के मंथन संग,
बह गए थे अनजान एक बहाव से हम।
न आसमां दिख रहा, न जमीं दिख रही थी,
न ही एहसास कोई, न ही मन में कमी थी।
एक सूनापन छा गया सब ओर था,
तब यारों थे किंकर्तव्यविमूढ़ से हम।
क्या होता होगा सबके संग ऐसा कभी,
सोच-सोच अब भी घबरा-से गए हम।
फिर भी कैसी थी शक्ति व कैसी पिपासा,
ज्ञान के चक्षुओं में आस की एक लौ थी।
वो सपने सुनहरे भविष्य के हमने,
किस आस पर किस सहारे पे देखे।
वो शक्ति वो प्रेरणा आपकी थी,
एक हारे हुए मन का बल आपसे था।
ओ कान्हा! जब-जब मानव मन हारा,
तब-तब तुमने भरा जोश व दिया सहारा।
इन चक्षुओं की प्यास बन तुम आ गए,
गम के मारों के गम सभी पिघला गए।
टूटा था मन मेरा जोड़ दिया कान्हा,
आशा की इक ज्योत जला दी न।
किया मानव मन को कभी निराश,
तुमने काटा जीवन से नैराश्य वैराग्य।
रक्षण करते भक्तों का बंशी बजैया,
सकल विश्व में पूर्ण पुरुषोत्तम,
इक तुम ही तो हो मेरे कृष्ण-कन्हैया!

Janmashtami 2020 Poem in Marathi: कृष्णकळी राधा

अनुपम जगी
प्रीतीचा उगम
राधा आणि श्याम
जन्मोजन्मी…१

राधा कृष्णप्रिया
शाम मनोहारी
प्रीत संज्ञा न्यारी
जगामाजी…२

गंधी मोहरली
मृदू कृष्णकळी
कृष्णाची पाकळी
प्रेमोद्यानी…३

यमुनेच्या तीरी
मुरली मधूर
राधिका अधीर
भेटीसाठी… ४

प्रीती आणि भक्ती
अनोखा मिलाप
झडताती ताप
घेता नाम…५

सर्व पाश मुक्त
बंधन पवित्र
संसारास सूत्र
शिकविते…६

जगाच्या वेगळे
राधाकृष्ण बंध
हरीनामी धुंद
राधा नित्य…७

देही वेगळाले
एक चित्ती होती
समसामावती
एकमेका..८

जप “राधे राधे”
जाई कृष्णाठायी
सुख तुझे पायी
अविरत…९

एक श्वास ध्यास
राधेश्याम गाऊ
चला लीन होऊ
त्यांचे पायी…१०

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.