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Lal Bahadur Shastri Biography Wikipedia Jivan Parichay Jivan Kahani लाल बहादुर शास्त्री का जीवन परिचय

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Lal Bahadur Shastri was an independent fighter as well as the second Prime Minister of India. In his tenure, he suffered a crushing defeat to Pakistan in the India-Pakistan war. He made a big contribution to the independence of the country, he also raised a lot of slogans to create a people’s organization. Jai Jawan Jai Kisan [ जय जवान जय किसान ], do not die [ मरो नही मारो ] etc.

Lal Bahadur Shastri Jayanti is celebrated on 02 October to remember the contribution of independent fighter Lal Bahadur Shastri to the independence of the country. And on this day Mahatma Gandhi Jayanti is also celebrated. Today we will tell our countrymen here the biography of Lal Bahadur Shastri. You can read the description of his contribution from birth to death. You can read Lal Bahadur Shastri Life Story Jivan Kahani biography wikipedia in hindi & english from here.

Lal Bahadur Shastri Ki Jivan Kahani लाल बहादुर शास्त्री का जीवन परिचय प्रेरक प्रसंग

लाल बहादुर शास्त्री जीवनी : लाल बहादुर शास्त्री जी भारत के दुसरे प्रधानमंत्री थे | परन्तु इनका शासन अद्वितीय रहा | जवाहर लाल जेहरू जी मृत्यु होने के कारण 09 जून 1964 को लाल बहादुर शास्त्री को प्रधानमंत्री पद पर मनोनीत किया गया | लाल बहादुर शास्त्री को उनके सादगीपूर्ण, शांत स्वभाव व स्वतंत्र सेनानी को 1966 में देश के सबसे बड़े सम्मान “भारत रत्न” से नवाजा गया |

शास्त्री जी हमेशा से ही महात्मा गाँधी व जवाहर लाल नेहरू के पथ पर चलते थे | उनके कार्यकाल 1965 में भारत – पाकिस्तान का युद्ध हुआ था जिसमे पाकिस्तान को करारी हार का सामना करना पड़ा | जिसकी कल्पना पाकिस्तान ने सपने में भी नही की होगी | लाल बहादुर शास्त्री जी की जीवनी संक्षेप में पढने के लिए पेज को अंत तक पढ़े |

Lal Bahadur Shastri Ka Jivan Parichay Jivan Kahani

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Lal Bahadur Shastri Biography Biography Jivan Parichay

नाम लाल बहादुर शास्त्री
जन्म दिनांक 02 अक्टूबर 1904
जन्म स्थान मुग़लसराय उत्तर प्रदेश
पिता का नाम मुंशी शारदा प्रसाद श्रीवास्तव
माता का नाम राम दुलारी
पत्नी का नाम ललिता देवी
सदस्यों की संख्या 04 लडके, 02 लड़किया
मृत्यु 11 जनवरी 1966
राजनैतिक पार्टी भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस
लाल बहादुर शास्त्री का आरम्भिक जीवन { लाल बहादुर शास्त्री की बचपन की कहानी }

लाल बहादुर शास्त्री का जन्म [ Lal Bahadur Shastri Birth Date ] 02 अक्टुम्बर 1904 को उत्तरप्रदेश वाराणासी जिले के मुगलसराय नामक कस्बे [ लाल बहादुर शास्त्री का जन्म कहां हुआ था ] में हुआ था | इनके पिताजी का नाम मुंशी शारदा प्रसाद श्रीवास्तव था | वे प्राथमिक विधालय की शिक्षक थे व बाद में उन्होंने भारत सरकार के राजस्व विभाग में लिपिक ( क्लर्क ) के पद पर कार्य किया |और इन्हें सभी मुंशीजी के नाम से संबोधित किया जाने लगा | लाल बहादुर शास्त्री जी की माताजी का नाम राम दुलारी था और वे गृहणी थी |

लाल बहादुर शास्त्री को बचपन से ही सब प्यार से ” नन्हे ” कहकर पुकारते थे | जब लाल बहादुर शास्त्री 18 माह के थे तब उनके पिताजी का स्वर्गवास हो गया था | बचपन में ही उनके पिताजी का साया उनपर से उठ गया था | लाल बहादुर शास्त्री की माताजी ने इनका पालन – पोषण करने के लिए अपने पिताजी हजारी लाल के घर मिर्जापुर आ गई | कुछ दिनों पश्चात् लाल बहादुर शास्त्री जी के नानाजी हजारी लाला का भी स्वर्गवास हो गया |

Lal Bahadur Shastri Education लाल बहादुर शास्त्री की शिक्षा

लाल बहादुर शास्त्री की शिक्षा मिर्जापुर के प्राथमिक विधालय में शुरू हुई व आगे की पढाई हरिश्चंद्र हाई स्कूल व काशी विद्यापीठ में हुई | लाल बहादुर शास्त्री ने संस्कृत भाषा से स्नातक किया और काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि प्राप्त की | शास्त्री शब्द की उपाधि मिले के बाद इन्होने अपना जातीसूचक शब्द हटाकर शास्त्री शब्द अपने नाम के साथ जोड़ लिया | और तभी से उन्हें लोग लाल बहादुर शास्त्री के नाम से जानने लगे |

Lal Bahadur Shastri Marriage Date Wife Name Son & Daughters Name लाल बहादुर शास्त्री की पत्नी व बच्चो के नाम

लाल बहादुर शास्त्री का 24 वर्ष की उम्र में विवाह कर दिया गया था | 1928 में लाल बहादुर शास्त्र का विवाह ललिता शास्त्री के साथ हुआ | इनके छ: संताने ( 2 लडके 4 लड़किया ) हुई | लाल बहादुर शास्त्री का एक अनिल भारतीय कांग्रेस पार्टी का सदस्य बना तो दूसरा पुत्र सुनील भारतीय जनता पार्टी में चले गए |

Lal Bahadur Shastri Political Career लाल बहादुर शास्त्री का राजनैतिक जीवन

लाल बहादुर शास्त्री जब भारत सेवक संघ में जुड़े तब से उनका राजनैतिक जीवन आरम्भ हो चूका था | लाल बहादुर शास्त्री सन 1920 में आजादी की लड़ाई में शामिल हुए | वे एक गाँधीवादी नेता थे | उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन देश और गरीबो के सेवा में लगा दिया | जब लाल बहादुर शास्त्री ने महात्मा गाँधी के असहयोग आन्दोलन में हिस्सा लिया था तब उन्हें थोड़े समय के लिए जेल जाना पड़ा |

जेल से बहार आते ही उन्होंने काशी विद्यापीठ से संस्कृत भाषा से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और तब से वे लाल बहादुर शास्त्री के नाम से प्रसिद्ध हुए | व सन 1920 में भारत सेवक संघ में शामिल होकर अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत की | लाल बहादुर शास्त्री ने 1921 में असहयोग आन्दोलन, 1930 में दाड़ी मार्च / यात्रा, 1942 में भारत छोड़ो आन्दोलन समेत बहुत से आंदोलनों में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई |

स्वतंत्रता में लाल बहादुर शास्त्री का योगदान

द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटिशो को बख्लाते देख सुभाष चन्द्र बोस ने “आजाद हिन्द फौज ” की स्थापना कर “दिल्ली चलो” का नारा दिया | तभी महात्मा गाँधी ने 09 अगस्त 1942 को मुंबई से अंग्रजो को “भारत छोड़ो” व देश की जनता को “करो या मरो” का आदेश दिया | 9 अगस्त 1942 को लाल बहादुर शास्त्री इलाहाबाद पहुँचकर इस आन्दोलन के गान्धीवादी नारे को चतुराई पूर्वक “मरो नहीं, मारो!” में बदल दिया | 11 दिनों तक लाल बहादुर शास्त्री भूमिगत (भूमि के अन्दर) रहकर आन्दोलन चलाया और 19 अगस्त 1942 को शास्त्रीजी गिरफ्तार हो गए |

शास्त्रीजी के राजनीतिक दिग्दर्शकों में पुरुषोत्तमदास टंडन, पण्डित गोविंद बल्लभ पंत और जवाहरलाल नेहरू शामिल थे | लाल बहादुर शास्त्री को भारत सेवक संघ इलाहाबाद इकाई का सचिव बनाया गया | इलाहाबाद रहते हुए भी शास्त्रीजी की जवाहर लाल नेहरू के साथ निकटता बढ़ी | राजनैतिक क्षेत्र में शास्त्रीजी का कद निरंतर बढ़ता जा रहा था | एक के बाद एक सफलता की सीढियाँ चढते हुए उन्होंने नेहरूजी के मंत्रिमण्डल में गृहमन्त्री का प्रमुख पद हासिल किया | उनकी इस कामयाबी, ईमानदारी व देशभक्ति को देखकर नेहरूजी के निधन के पश्चात लाल बहादुर शास्त्री भारत के प्रधानमन्त्री बने |

Lal Bahadur Shastri History Biography स्वतंत्र भारत के वरिष्ट नेता लाल बहादुर शास्त्री

स्वतंत्र भारत में लाल बहादुर शास्त्री को उत्तर प्रदेश सांसद का सचिव नियुक्त किया गया | गोविन्द वल्लभ पन्त के मंत्रिमंडल में लाल बहादुर शास्त्री को पुलिस एव परिवहन का कार्यभार दिया गया | तब शास्त्रीजी ने पहली महिला कंडेक्टर नियुक्त किया और पुलिस विभाग में लाठी की बजाए पानी की बौछार कर भीड़ पर नियंत्रण पाने का नियम बनाया | लाल बहादुर शास्त्री को 1951 में अखिल भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस का महा-सचिव बनाया गया और उन्होंने 1952, 1957, 1962 में चुनावों के दौरान दिन-रात मेहनत कर, प्रचार-प्रसार कर पार्टी को भारी बहुमत से विजयी बनाया |

जवाहर लाल नेहरू की आकस्मिक मृत्यु के बाद लाल बहादुर शास्त्री को उनकी सादगी, देशभक्ति, ईमानदारी और साफ सुथरी छवि के कारण 1964 में प्रधानमन्त्री बनाया गया | देखा जाए तो शास्त्रीजी का कार्यकाल बेहद कठिन रहा | पूँजीपति देश और शत्रु देश इनका शासन काल चुनोतीपूर्ण बना दिया था | 1965 में पाकिस्तान ने भारत पर अचानक सायं 7.30 बजे हवाई हमला किया | तब राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने तीनो रक्षक विभाग एव मन्त्रिमण्डल के सदस्यों की आपातकालीन बैठक बुलाई |

तीनों प्रमुखों ने उनसे सारी वस्तुस्थिति समझाते हुए पूछा: “सर! हमे क्या करना है क्या हुक्म है ? तब शास्त्रीजी ने तत्काल उत्तर दिया: “आप देश की रक्षा कीजिये और मुझे बताइये कि हमें क्या करना है?” शास्त्री जी ने इस युद्ध में राष्ट्र का नेहरू जी की भांति उत्तम नेतृत्व किया | देश की जनता का मनोबल बढ़ाने के लिए जय जवान जय किसान का नारा दिया और सारा देश एकजुट हो गया | इस अप्रत्याशित आक्रमण से घबराकर अमेरिका ने अपने नागरिकों को लाहौर से निकालने के लिये कुछ समय के लिए युद्धविराम की अपील की |

Lal Bahadur Shastri Death Date & Reason लाल बहादुर शास्त्री की मौत का राज

भारत और पाकिस्तान अप्रत्याशित आक्रमण से घबराकर अमेरिका ने अपने नागरिकों को लाहौर से निकालने के लिये कुछ समय के लिए युद्धविराम की अपील की | व रूस और अमरिका की मिलीभगत से शास्त्रीजी को शांति-समझोते पर हस्ताक्षर करने के लिए रूस की राजधानी ताशकन्द बुलाया वह पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति आयूब खान पहले से मौजूद थे | जब समझौता वार्ता चली और दबाव बनाया गया तो शास्त्रीजी की एक ही जिद थी कि उन्हें बाकी सब शर्तें मंजूर हैं परन्तु जीती हुई जमीन पाकिस्तान को लौटाना हरगिज़ मंजूर नहीं |

आख़िरकार शास्त्रीजी पर अन्तर्राष्ट्रीय दबाव बनाकर ताशकन्द समझौते के दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करा लिए गए | समझोते की रात 11 जनवरी 1966 को रहस्यपूर्ण तरीके से लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु हो गई | यह आज तक रहस्य बना हुआ है कि क्या वाकई शास्त्रीजी की मौत हृदयाघात (दिल का दौरा) के कारण हुई थी? लाल बहादुर शास्त्री का पोस्टमार्टम नही किया गया तभी आज भी लोग उनकी मौत की वजह जहर को ही मानते हैं |

इस तरह लाल बहादुर शास्त्री ने 18 महीनो ही भारत की कमान संभाली | लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद गुलजारी लाल नन्दा को कार्यकालिन प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया | लाल बहादुर शास्त्री की अंत्येष्टि यमुना नदी के किनारे की गई व उस स्थान को “विजय-घाट” का नाम दिया गया |

शास्त्रीजी को उनकी सादगी, देशभक्ति और ईमानदारी के लिये आज भी पूरा भारत श्रद्धापूर्वक याद करता है | उन्हें मरणोपरान्त वर्ष 1966 में “भारत रत्न” से सम्मानित किया गया |

Lal Bahadur Shastri Slogan लाल बहादुर शास्त्री के नारे

लाल बहादुर शास्त्री गांधीवादी नेता थे उन्होंने भारत की आजादी के लिए जनता को एक जुट करने के लिए नारे दिए | जिनसे वे प्रेरित होकर लाल बहादुर शास्त्री के साथ आजादी की लड़ाई में शामिल हुए | लाल बहादुर शास्त्री के लोकप्रिय नारे !

  • मरो नही मारो
  • जय जवान जय किसान
लाल बहादुर शास्त्री के प्रेरक प्रसंग

सन 1978 में लाल बहादुर शास्त्री की पत्नी ललिता शास्त्री ने “ललिता के आंसू” नामक पुस्तक लिखी | जिसमे लाल बहादुर शास्त्री जी की मृत्यु के राज का वर्णन किया गया | कुछ समय पूर्व एक अंग्रेजी पुस्तक के लेखक पत्रकार कुलदीप नैयर जो लाल बहादुर शास्त्री के साथ ताशकंद गए थे उन्होंने भी शास्त्रीजी की मृत्यु सम्बंधित कई तथ्य उजागर किए परन्तु कुछ उचित परिणाम नही निकले | वर्ष 2012 में लाल बहादुर शास्त्री जी के बेटे सुनील शास्त्री ने भारत सरकार को उनके पिता की रहस्यमय मृत्यु पर पर्दा हटाने की मांग की लेकिन न्यायपालिका ने बिना सबूत और गवाहों के संतोषजनक न्याय नही किया |

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लाल बहादुर शास्त्री के अनमोल विचार

Lal Bahadur Shastri Shayari Quotes Status with Photo

लाल बहादुर शास्त्री पर कविता [Poem]

दोस्तों, लाल बहादुर शास्त्री जी की जीवनी / जीवन की कहानी पढ़कर हमे भी देश के हित के लिए कुछ करने की प्रेरणा लेनी चाहिए | जिस प्रकार लाल बहादुर शास्त्री ने निस्वार्थ अपना पूरा जीवन गरीबो की सेवा करने व एक नए भारत का निर्माण करने में अपना योगदान दिया हमे भी राष्ट्र हित के लिए एक लक्ष्य बनाना चाहिए | आप अपने दोस्तों, रिश्तेदारों व प्रियजनों को लाल बहादुर शास्त्री की जीवन कहानी शेयर कर देश हित के लिए प्रेरित कर सकते है |

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