Maharishi Valmiki Wikipedia in Hindi महर्षि वाल्मीकि जी की जीवनी जन्म से मृत्यु तक की पूरी जीवन कहानी यहाँ पढ़े

Maharishi Valmiki Wikipedia in Hindi Maharishi Valmiki Ka Jivan Parichay Jivani Jivan Kahani महर्षि वाल्मीकि जी की जीवनी जन्म से मृत्यु तक की पूरी जीवन कहानी Maharishi Valmiki History Life Story रामायण रचयिता महर्षि वाल्मीकि की प्रेरणादायक जीवनी व रोचक तथ्य : भारत ऋषि-मुनियों, संतो और महँ पुरुषो वाला देश है इसलिए भारत को सोने की चिड़िया एव विश्व गुरु के नाम से जाना जाता है | यहाँ आज आपको महर्षि वाल्मीकि जी के जीवन परिचय व रोचक तथ्य बताएँगे | महर्षि वाल्मीकि जयंती आश्विन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है और अंग्रेजी कलेंडर में यहाँ तिथि अक्टूम्बर महीने में आती है | इस वर्ष, महर्षि वाल्मीकि जयंती 2022 अक्टूम्बर 9 को मनाई जाएगी |

महर्षि वाल्मीकि ने संस्कृत के प्रथम महाकाव्य की रचना की थी जो रामायण के नाम से प्रसिद्ध है | महाकाव्य रामायण के रचियता महर्षि वाल्मीकि के जन्मोत्सव को पुरे भारत में वाल्मीकि जयंती के रूप में मनाया जाता है | इस आर्टिकल में आप महर्षि वाल्मीकि का सम्पूर्ण जीवन परिचय Maharishi Valmiki Ka Jivan Parichay Jivani Jivan Kahani Maharishi Valmiki Wikipedia Biography  Life Story जैसे महर्षि वाल्मीकि के जीवन से जुडी प्रेरणादायक घटना, महर्षि वाल्मीकि कौन थे उन्हें रामायण लिखने की प्रेरणा कैसे मिली, वाल्मीकि ने सबसे पहले श्लोक की रचना कैसे की, वाल्मीकि जयंती का महत्व व महर्षि वाल्मीकि जयंती कब व कैसे मनाई जाती है, सम्बंधित जानकारी इस पेज के अंत तक पढ़ सकते है |

महर्षि वाल्मीकि जी के जीवन से हमें बहुत कुछ सिखने को मिलता है | उन्होंने अपने जीवन की एक घटना से प्रेरित होकर अपना जीवन पथ बदलकर महाग्रंथ / महाकाव्य रामायण की रचना की जिसमे मर्यादा, सत्य, प्रेम, भातृत्व, मित्रत्व व सेवक के धर्म की परिभाषा दर्शाई गई | पूजनीय महाकवि महर्षि वाल्मीकि के जीवन से हमे प्रेरित होकर महान व देशहित के लिए कार्य करना चाहिए |

Maharshi Valmiki Ka Jivan Parichay Short History in English

Maharshi Valmiki Wikipedia in English : Valmiki Jayanti is celebrated as the birthday of a great writer and sage of Maharishi Valmiki. Valmiki Jayanti is celebrated on the full moon of Ashwin month ( आश्विन पूर्णिमा ) according to the traditional Hindu calendar. While in the Gregorian calendar Valmiki Jayanti falls in October month. Maharishi Valmiki is the author of the great Hindu epic Ramayan. And he is revered in Hinduism for being the ‘Adi Kavi’ or the first poet of Sanskrit literature.

The depiction of the life story of Lord Shri Ram in the epic Ramayana by Maharishi Valmiki was written in Sanskrit language for the first time. And this epic has a total of 24,000 verses ( श्लोक ) divided into 7 as kandas ” कांडों ” (cantonments / छावनियों). Valmiki Jayanti is celebrated in honor of this great sage. Valmiki Jayanti is celebrated mainly in the northern region of India with great pomp and show.

महर्षि वाल्मीकि जीवन परिचय ( Maharshi Valmiki Jeevan Parichay Short Biography)

नाम महर्षि वाल्मीकि
वास्तविक नाम रत्नाकर
पिता का नाम प्रचेता
माता का नाम चर्षणी
जन्म दिवस आश्विन पूर्णिमा
पेशा डाकू, महाकवि
रचना रामायण, योगविशिष्ठ, अक्षर-लक्ष्य

महर्षि वाल्मीकि का इतिहास और बाल्यकाल Valmiki Ji Ki History

History of Maharshi Valmiki : महर्षि वाल्मीकि का जीवन परिचय बड़ा ही रोचक और प्रेरणादायक है | ऐसा माना जाता है की महर्षि वाल्मीकि, महर्षि कश्यप और अदिति के नौवे पुत्र प्रचेता की संतान है | महर्षि वाल्मीकि की माता का नाम चर्षणी व भाई का नाम भृगु था | महर्षि वाल्मीकि को बाल्यावस्था में ही वक नि:संतान भीलनी ने चुरा लिया और उनका पालन-पोषण अपनी प्रजाति के अनुसार किया | और वे एक खुकार डाकू रत्नाकर बन गए |

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Maharishi Valmiki Ka Jivan Parichay Wikipedia History महर्षि वाल्मीकि जी की जीवन कहानी / जीवनी

महर्षि वाल्मीकि जीवन कहानी Maharshi Valmiki Life History Jivan Kahani

Valmiki Wikipedia In Hindi : महर्षि वाल्मीकि वैदिक काल के महान ऋषि माने जाते है | पुराणों के अनुसार महर्षि वाल्मीकि का जन्म ब्राह्मण समाज में हुआ था | महर्षि वाल्मीकि के जीवन का रोचक तथ्य यह है की बाल्यावस्था में ही उनको एक निःसंतान भीलनी ने चुरा लिया था और उनका बड़े ही प्रेम से लालन-पालन किया | जब वाल्मीकि तरूण युवा हो गए तब उनका विवाह उसी समुदाय की एक भीलनी से कर दिया गया | विवाह के बाद उन्होंने अपने परिवार के भरण-पोषण व आजीविका के लिए भीलो की परम्परा को अपनाकर डाकू बन गए | इसीलिए कहा जाता है की महर्षि वाल्मीकि ऋषि मुनि बनने से पूर्व एक डाकू थे जिन्हें रत्नाकर नाम से जाना जाता था | अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए राहगीरों को लूटते थे और जरुरत पड़ने पर मार भी देते थे | इस तरह वे घौर पाप करके अपने पापो का घड़ा भर रहे थे |

एक दिन नारद मुनि व ऋषियों की टोली जंगल से जा रहे थे | ऋषि-मुनियों की मंडली को देख कर रत्नाकर ( महर्षि वाल्मीकि ) ने उनका रास्ता रोक उन्हें बंधी बना लिया | जब नारद मुनि ने उनसे सवाल किया की तुम ऐसे पाप क्यों कर रहे हो ? तब रत्नाकर भावुक होकर जवाब दिया की अपने और अपने जीवनव्यापन के लिए यही हमारा धर्म है और यही हमारी परम्परा है | तब नारद मुनि ने पूछा की तुम जो ये पाप कर रहे हो, क्या तुम्हारा परिवार इस पाप का दंड वहन करेगा ? नारद मुनि की यह बात सुनकर रत्नाकर जोश में आकर जवाब दिया की बिल्कुल वहन करेगा, मेरा परिवार सदैव मेरे साथ खड़ा रहेगा | रत्नाकर का यह जवाब सुन नारद जी मुस्कुराते हुए बोले की तुम एक बार अपने परिवार अपने मित्रो को पूछ कर आओ अगर वो इस पाप के भागीदार बनेंगे तो हम तुम्हे अपना सारा धन दे देंगे | रत्नाकर ने अपने परिवार व मित्रो से पूछा तो सभी ने इस पाप कर्म में भागीदार नहीं बनने को कहा | तब वाल्मीकि को अपने द्वार किए गए पाप कर्म पर बहुत पछतावा व गहरा आधात पहुँचा | रत्नाकर ने साधु मंडली से क्षमा मांग कर मुक्त कर दिया और पाप कर्म का रास्ता छोड़ने का निश्चय किया | तब नारद मुनि ने तमसा नदी के तट पर ‘राम-राम’ नाम जप ही अपने पाप कर्म से मुक्ति का यही मार्ग बताया | रत्नाकर की कई वर्षो के ध्यान व घौर तपस्या से उन्हें महर्षि वाल्मीकि के नाम से प्रसिद्ध हुए और संस्कृत में रामायण महा ग्रन्थ की रचना की |

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महर्षि वाल्मीकि को रामायण लिखने की प्रेरणा कैसे मिली ?

जब रत्नाकर डाकू को अपने पापो का आभास हुआ तब उन्होंने अपने इस पाप कर्म जीवन को त्याग नया पथ अपनाने का निश्चय किया | लेकिन नए पथ के बारे में उन्हें कोई ज्ञान नही था तब उन्होंने नारद जी से पूछा तो नारद जी ने कहा की राम नाम का जप करो सभी पापो से मुक्ति मिल जाएगी | तब वाल्मीकि जी तमसा नदी के तट पर राम नाम का जप करने लगे लेकिन भूलवश वाल्मीकि राम-राम की जगह ‘मरा-मरा’ का जप करने में लीन हो गए | कई वर्षो तक तपस्या के कारण उनका शारीर बेहद दुर्बल हो गया व उनके शारीर पर चीटियाँ लग गई | शायद यही उनके पापो का भोग था | रत्नाकर ने अपनी कठोर तपस्या से ब्रह्मा देव को प्रसन्न किया | फलस्वरूप ब्रह्मा देव ने उन्हें ज्ञान व रामायण लिखने का सामर्थ्य दिया | इसलिए उन्हें आदिकवि के नाम से जाना जाता है और ‘वाल्मीकि रामायण’ के नाम से अमर हो गए |

वाल्मीकि ने प्रथम श्लोक की रचना कैसे व कहा की ?

एक बार वाल्मीकि एक क्रौंच पक्षी के जोड़े को निहार रहे थे | वह जोड़ा प्रेमालाप में लीन था, तभी उन्होंने देखा कि बहेलिये ने प्रेम-मग्न क्रौंच (सारस) पक्षी के जोड़े में से नर पक्षी हत्या कर दी और मादा पक्षी विलाप करने लगी | मादक विलाप सुन कर वाल्मीकि के मन में करुणा जाग उठी और वे अत्यंत दुखी हो उठे | इस पूरी घटना को देख वाल्मीकि जी के मुख से स्वत: ही श्लोक फूट पड़ा |

मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः।
यत्क्रौंचमिथुनादेकम् अवधीः काममोहितम्॥’

हे दुष्ट, तुमने काम मोहित होकर प्रेम मे मग्न क्रौंच पक्षी को मारा है | जा तुझे कभी भी प्रतिष्ठा की प्राप्ति नहीं हो पायेगी और तुझे भी वियोग झेलना पड़ेगा |

यह महर्षि वाल्मीकि जी का प्रथम श्लोक था | उसके बाद महर्षि वाल्मीकि ने योग-साधना और तपोबल से रामायण की रचना की | और उन्होंने रामायण की रचना में सूर्य, चंद्र तथा अन्य नक्षत्र की स्थितियों का वर्णन किया है | इससे ज्ञात होता है कि वे ज्योतिष विद्या एवं खगोल विद्या के भी प्रकाण्ड ज्ञानी थे |

महर्षि वाल्मीकि रामायण का संक्षिप्त वर्णन Short History of Valmiki Ramayan

महर्षि वाल्मीकि ने ब्रह्मा जी की प्रेरणा से महाकाव्य रामायण की रचना की | इस महाकाव्य में भगवान विष्णु के अवतार रामचंद्र जी के सम्पूर्ण चरित्र का विवरण किया गया | वाल्मीकि रामायण में भगवान श्रीराम, सीता माता व अन्य पत्रों के सम्पूर्ण जीवन को 24 हजार श्लोको में वर्णित किया गया | जब सीता मैया को राजमहल से निकल दिया गया तब महर्षि वाल्मीकि ने उन्हें अपने आश्रम में सहारा दिया उसकी रक्षा की और राम एव सीता के पुत्र लव कुश को ज्ञान दिया |

महर्षि वाल्मीकि जयंती कब मनाई जाती है Valmiki Jayanti Date

रामायण रचियता महर्षि वाल्मीकि का जन्म हुआ था | और पुरे भारत में हर वर्ष वाल्मीकि जयंती आश्विनी मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है | अंग्रेजी कलेंडर के अनुसार इस वर्ष Maharshi Valamiki Jayanti 2021 October 20 को मनाई जावेगी |

वाल्मीकि जयंती का महत्व

महर्षि वाल्मीकि आदि कवी थे और इन्हें श्लोको का जन्मदाता माना जाता है | क्योकि महर्षि वाल्मीकि जी ने ही प्रथम संस्कृत श्लोक व महाकाव्य की रचना की थी | इसलिए महर्षि वाल्मीकि जी के जन्मोत्सव को वाल्मीकि जयंती के रूप में मनाया जाता है | महर्षि वाल्मीकि जयंती को अन्य शब्दों में प्रकट दिवस के रूप में भी जाना जाता है |

Celebration of Maharshi Valmiki Jayanti

पुरे भारत वर्ष में महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाई जाती है | मुख्यत: भारत के उत्तर क्षेत्र में शोभा यात्रा निकालकर धूम-धाम से मनाई जाती है |

  • महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर धर्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते है |
  • उत्तरी भारत में वाल्मीकि जयंती अवसर पर शोभा यात्रा सजाई जाती है |
  • स्कूलो, कॉलेजो व मंदिरों में वाल्मीकि जयंती पर मिठाई,फल व पकवान वितरित किए जाते है |
  • बहुत से क्षेत्रो में वाल्मीकि जयंती के उपलक्ष में भंडारे किए जाते है |
  • कार्यक्रम व सभाए आयोजित कर वाल्मीकि जी का जीवन परिचय बताकर, बुरे कर्म छोड़कर सत्कर्म अपनाने के लिए प्रेरणा ली जाती है |

महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण एक ऐसा महाकाव्य है जो हमें भगवान श्रीराम के जीवन का परिचय करवाता है | जो उनके सत्यनिष्ठ, पिता प्रेम और उनका कर्तव्य पालन और अपने माता तथा भाई-बंधुओं के प्रति प्रेम-वात्सल्य से रूबरू करवा कर सत्य और न्याय धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है | ऐसे महान संत और आदिकवि का जन्म दिवस आश्विन मास की शरद पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है |

” आप सभी को Rkalert.in टीम की ओर से महर्षि वाल्मीकि जयंती / प्रकट दिवस की हार्दिक शुभकामानाऍ “

सभी देवी-देवताओ पर शायरी फोटो डाउनलोड करने, पशु-पक्षियों जिव-जंतुओ व प्रकृति से मिलने वाले शुभ-अशुभ संकेतो और राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय स्तर पर मनाए जाने वाले Events & Festival से सम्बंधित बधाई/शुभकामना सन्देश, शायरी FB Whatsapp Status Instagram Caption, Full HD Wallpaper Photo images DP Profile Pics इत्यादि डाउनलोड करने के लिए विजिट करे www.Rkalert.in पर | और सबसे पहले Shayari, Photo, Status डाउनलोड करने के लिए निचे दी गई Rkalert.in के सोशल मीडिया पेज को Follow व ग्रुप Join करे |

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