प्राकृतिक आपदा पर महत्वपूर्ण लेख हिंदी मैं Natural Disaster Article in Hindi

Natural Disaster Article in Hindi भारत मैं आई प्राकृतिक आपदाएं : भोगोलिक द्रष्टि से देखा जाये तो भारत एक विशाल धरातल वाला देश हैं | भारत के 2/3 हिस्से में पानी हैं और 1/3 हिस्से मैं धरती हैं जिसके उपर मानव जाती का निवास हैं | हमारे देश मैं प्रतिदिन प्राक्रतिक घटनाएँ होने का एक ही कारण हैं पर्यावरण की क्षति जिसकी वजह से गुस्साई प्रक्रति विनाश के उपर उतर आती हैं | जिसकी चपेट मैं मानव और जानवर प्रजाति आती हैं और उसका विनाश होता जाता हैं | आये दिन कभी चक्रवात तूफान ,कभी बारिश का कहर ,तो कभी बाढ़ की आफत ,भूकम्प ,सर्दी,आदि प्राक्रतिक आपदाएं मानव जाती को उथल पुथल करती आई हैं | लैकिन प्राकृतिक आपदाओं को होने से हम रोक नहीं सकते | क्योंकि वे उसी प्राकृतिक वातावरण का हिस्सा है जिसमें हम रहते हैं, लेकिन जहां तक संभव हो सके हम लोगों एवं उनकी संपत्तियों पर पड़ने वाले इन प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए समाज के विभिन्न स्तरों पर एहतियाती कदम उठा सकते हैं। प्राकृतिक पुरे विश्व की समस्या हैं लेकिन इस का स्थाई इलाज नही हैं | ये प्राकृतिक आपदा भी प्रकति का की हिस्सा हैं | मनुष्य जब तक प्रकति के साथ छेड़ छाड़ बंद नही करेगा तब तक ये आपदा ऐसे ही आती रहेंगी | क्यों की प्राकृतिक  आपदा मानव दवारा ही उत्पन की जाती हैं | जैसे जनसंख्या विस्पोट वन की कटाई अति अधिक मशीनीकरण ये गठना प्राकृतिक आपदा को निमत्रण देते हैं | और फिर जहाँ प्राकृतिक  आपदा आते हैं वहा पर अन्न धन जन की हानि निचियत हैं | हमारे दवारा प्राकृतिक आपदा पर 300 वाक्यों  500 वाक्यों वह 1000 वाक्यों पर लेख लिखा जा रहा जो अपनी सुविधा अनुसार देख सकते हैं

प्राकृतिक आपदा पर लेख 300 शब्दों का Natural Disaster Article in Hindi

सदियों से प्राकृतिक आपदायें मनुष्य के अस्तित्व के लिए चुनौती रही है। जंगलो में आग, बाढ़, हिमस्खलन, भूस्खलन, भूकम्प, ज्वालामुखी, सुनामी, चक्रवाती तूफ़ान, बादल फटने जैसी प्राकृतिक आपदायें बार बार मनुष्य को चेतावनी देती है। वर्तमान में हम प्राकृतिक संसाधनो का अंधाधुंध इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे संतुलन बिगड़ रहा है। ये हमारी मनमानी का ही नतीजा है। इन आपदाओं को “ईश्वर का प्रकोप या गुस्सा” भी कहा जाता है। आज मनुष्य अपने निजी स्वार्थ के लिए वनों, जंगलो, मैदानों, पहाड़ो, खनिज पदार्थो का अंधाधुंध दोहन कर रहा है। उसी के परिणाम स्वरुप प्राकृतिक आपदायें आने लगी है। पर्यावरण को लगातार क्षति पहुंचने की वजह से पूरी दुनिया प्राकृतिक आपदाओं से त्रस्त है और इसलिए हमें तत्काल इनसे बचाव के तरीकों पर अपना ध्यान केन्द्रित करना होगा। भारत और अन्य देश पूरी दुनिया में हो रहे पर्यावरण असंतुलन का मूल्य चुकाने को मजबूर हैं और इन देशों में प्राकृतिक आपदाओं की वजह से जीवन और संपत्ति की व्यापक हानि हो रही है। प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिए हमे पर्यावरण के प्रति जागरूक होना बहुत जरूरी हैं | हमे पर्यावरण की सुरक्षा का जिम्मा लेना होगा,हमे पेड़ लगाने का संकल्प लेना होगा तब जाकर हम प्राक्रतिक आपदाओं की क्षति से बच सकते हैं |

प्राकृतिक आपदा पर लेख 500 शब्दों का Natural Disaster Article in Hindi

प्राकृतिक आपदा आना ये एक ऐसी घटना हैं जो मानव दवारा निर्मित होती हैं क्यों की मानव दवारा ही प्रकति के साथ छेड़खानी करते हैं और फिर नतीजा प्राकृतिक आपदा होता हैं | जब से मानव जाति ने मशीनीकरण शुरू किया तब से ये प्राकृतिक आपदा शुरू हैं | हमे सावधानीपूर्वक प्राकृतिक संसाधनो का इस्तेमाल करना चाहिये। ऐसी आपदाओं के कारण भारी मात्रा में जाल-माल की हानि होती है। 1999 में ओड़िसा में महाचक्रवात आया जिसमे 10 हजार से अधिक लोग मारे गये। 2001 का गुजरात भूकंप कोई नही भूल सकता है। इसमें 20 हजार से अधिक लोग मारे गये। यह भूकम्प 26 जनवरी 2001 में आया था। इसमें अहमदाबाद, राजकोट, सूरत, गांधीनगर, कच्छ, जामनगर जैसे जिले पूरी तरह नष्ट हो गये। 2004 में हिन्द महासागर में सुनामी आ गयी। अंडमान निकोबार द्वीप समूह, श्रीलंका, इंडोनेशिया, दक्षिण भारत इससे प्रभावित हुआ। इसमें 2 लाख से अधिक लोगो की जान चली गयी। 2014 में जम्मू कश्मीर में भीषण बाढ़ आई जिसमे 500 से अधिक लोग मारे गये। इस तरह की आपदायें कुछ समय के लिए आती है पर बड़ी मात्रा में नुकसान करती है। सभी मकानों, परिसरों, शहरो को नष्ट कर देती है और बड़ी मात्रा में जान-माल का नुकसान होता है। हर कोई इनके सामने बौना साबित होता है।

प्राकृतिक आपदा पर लेख 1000 शब्दों का Natural Disaster Article in Hindi

पिछले कई दशकों से जिस प्रकार मानव उन्नति के पथ पर अग्रसर हो रहा है तथा अपनी इच्छाओं और अभिलाषाओं की पूर्ति के लिए जिस प्रकार प्रकृति के संसाधनों प्राकृतिक तरीकों से दोहन कर रहा है, जंगलों को काटा जा रहा है, नदी नालों को रोका जा रहा है, जमीन के अंदर सुरंगों का जाल बिछाया जा रहा है, जिस कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है और नित आए दिनों प्राकृतिक आपदा की घटनाओं को देखा जा सकता है। आज पूरा वातावरण प्रदूषित हो चुका है जिसके जिम्मेबार हम स्वयं ही हैं। प्राकृतिक आपदा की घटनाएं बढ़ती ही जा रहे हैं। कहीं अचानक अत्यधिक वर्षा के कारण बाढ़ आ जाती है तो कहीं सूखा पड़ जाता है वहां अकाल की स्थिति बन जाती है। कहीं तूफान आ जाता है तो कहीं सुनामी जैसी घटनाएं देखने को मिलती हैं। कहीं पूरे के पूरे पहाड़ दरखते हैं। प्राकृतिक आपदा के आगे मनुष्य तिनका मात्र है, जब बाढ़ आती है तो बड़ी-बड़ी गगनचुंबी इमारतें जमींदोज हो जाती हैं। हमारे आकाश में उड़ने वाले बड़े बड़े हवाई जहाज तूफान के आगे मक्खी मच्छरों की तरह इधर-उधर हो जाते हैं। अभी हाल ही में उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा को कौन भूल सकता है जहां पूरे के पूरे पहाड़ दरकने लगे, नदी नाले बिहार भयानक स्थिति में पहुंच चुके थे। सैकड़ों गाड़ियां नदी नालों में बह चुकी थी हजारों के हिसाब से लोग मर गए थे, सारी सड़कें पूरी तरह से बंद थी। वह बहुत ही भयानक त्रासदी थी लेकिन एक सवाल हमेशा ही मन में उठता है कि आखिर इसका जिम्मेबार कौन है? क्यों इस तरह की प्राकृतिक आपदाएं आती हैं? शायद इसका जवाब हम सभी के पास हैं और हम सभी जानते हैं। जब भी हम प्रकृति के साथ खिलवाड़ करेंगे उस ईश्वर द्वारा बनाए हुए इस धरा के संतुलन को बिगाड़ेंगे तो हमें इस तरह की आपदाओं का सामना करना पड़ेगा। हमें प्राकृतिक संसाधनों का प्राकृतिक तरीके से प्रयोग करना चाहिए और हमें इस धरा को हरा भरा रखना चाहिए वन्यजीवों का भी ध्यान रखना चाहिए क्योंकि आज उनके आवास घटते जा रहे हैं और उनकी प्रजातियों की संख्या लुप्त होती जा रही है। सभी राष्ट्रों को इस बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दे पर मिलकर सोचना होगा और मिलकर काम करना होगा तभी हम इस तरह की आपदाओं से बच सकते हैं।

बचाव के मुख्य कारण 

भूकम्प आने पर किसी खाली जगह पर खड़े हो जाये जहा पर कोई मकान अथवा बिल्डिंग ना हो खुले आसमान में खड़े रहे

बाढ़ से बचने के लिए किसी ऊँची सुरक्षित जगह पर चले जाना चाहिये जहाँ पानी न हो। साथ में खाने-पीने का जरूरी सामान, दवाइयां, टोर्च, पीने का पानी, रस्सी, चाक़ू, फोन जैसा जरूरी सामान ले लें। बाढ़ में घर का बिजली का मेंन स्विच बंद कर दें।

सूखे की समस्या से निपटने के लिए वर्षा के जल का संरक्षण टैंको और प्राकृतिक जलाशयों में करना चाहिये

सुनामी से बचाव के लिए एक जीवन रक्षा किट बना लें। इसमें खाना, पानी,फोन, दवाइयां, प्राथमिक उपचार किट रखे। सुनामी आने से पहले अपने स्थान से बाहर निकलने की ड्रिल एक दो बार कर लें।

मूसलाधार बारिश होने पर बिजली गिरना आम बात है। हर साल सैकड़ो लोग बिजली गिरने से मर जाते है। जब भी मौसम खराब हो, आसमान में बिजली चमक रही हो कभी भी किसी पेड़ के नीचे न खड़े हो और कम से कम 5-6 मीटर दूर रहें। बिजली के खम्बो से दूर रहे।

आंधी, तूफ़ान, चक्रवातीय तूफ़ान आने पर घर में ही रहना चाहिये। घर से बाहर नही निकलना चाहिये। सभी खिड़की दरवाजे बंद कर लेना चाहिये।

जंगल में आग लगने पर वन विभाग के कर्मचारियों को तुरंत सूचित करना चाहिये। जंगल की आग बुझाना अत्यंत कठिन काम है। इसे अधिक स्टाफ और आधुनिक उपकरणों की सहायता से बुझाया जा सकता है।

हिमस्खलन से बचने के लिए कुछ उपाय है। लोहे के तारो का जाल बनाकर पहाड़ो पर सड़कों की सुरक्षा की जा सकती है। सोफ्टवेयर द्वारा पहाड़ी जगहों में ऐसे स्थानों का पता लगा सकते हैं जहाँ हिमस्खलन आ सकता है। पहाड़ो पर अधिक से अधिक पेड़ लगाकर, ढलानों को काटकर चबूतरा बनाकर, मजबूर दीवार बनाकर हिमस्खलन को रोका जा सकता है।

भूस्खलन होने पर फ़ौरन उस स्थान से निकल जाना चाहिये।

ज्वालामुखी फटने पर फ़ौरन घर का कीमती सामान अपने साथ लेकर सुरक्षित स्थान पर चले जायें।

महामारी/ संक्रामक रोगों बरसात के मौसम में अधिक होते है। रोगाणु- विषाणु पानी के माध्यम से सबसे जल्दी फैलते है इसलिए साफ़ पानी पीना चाहिये।

पर्यावरण के प्रति जागरूकता

भारत में भी पर्यावरण असंतुलन बढ़ती हुई चिंता का विषय है और यहां भी पर्यावरण असंतुलन को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयास अपर्याप्त ही साबित हो रहे हैं। हर वर्ष 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाया जाता हैं |जिस पर सभी लोगो को शिवर के माध्यम से पर्यावरण सुरक्षा के बारे मैं समझया जाता हैं | लेकिन सरकार के अथक प्रयासों की वजह से धीरे धीरे सुधार तो हुआ हैं | और हम सभी लोगों को मिलकर पर्यावरण की सुरक्षा का जिम्मा लेना होगा हैं |

प्रक्रति का भक्ष्क बना मानव ग्रीनहाउस गैस की वातावरण मैं बढ़ोतरी

मानव निर्मित कारणों से भी पर्यावरण का असंतुलन बढ़ रहा है। पर्यावरण के दुश्मन हरे पेड़ों को काट रहे हैं ,बड़े बड़े जंगलो को नष्ट क्र रहे हैं | जंगलो की कटाई करके उसकी जगह बड़ी बड़ी बिल्डिंग बनाई जा रही हैं | जनसंख्या में हो रही बेतहाशा वृद्धि की वजह से मानुष्यों की जरूरत बढ़ी हैं और उनमें उपभोक्तावादी प्रवृति बढ़ी है। इन दोनों ही वजहों से प्राकृतिक संसाधनों पर असर पड़ा है। पेड़ों को काटना, खनिज पदार्थों के लिए खानों का दुरुपयोग एवं वायुमंडलीय प्रदूषण पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा हैं। प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि करने में इन सभी कारकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।पानी की बढ़ती जरूरत लगातार भू-जल के स्तर को कम कर रही है और साथ ही औद्योगिक विषाक्त सॉल्वैंट्स को नदियों में बहाया जा रहा है जिससे हमारा जल दूषित हो रहा है। कारखानों और वाहनों से लगातार निकलता गंदा धुआं एवं ग्रीनहाउस गैस वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं। ऐसी स्थिति अगर लगातार चलती रही तो पृथ्वी पर प्राणियों का जीवन दूभर हो जाएगा।

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