दुर्गाष्टमी महानवमीं पूजन विधि कन्या पूजन जानिए कन्या पूजन का महत्व और विधि

दुर्गाष्टमी महानवमीं पूजन : नवरात्र के नौ दिनों तक मां दुर्गा के नो रूपों की पूजा की जाती हैं |पूजा व्रत की समाप्ति कन्या पूजन के साथ की जाती है| दुर्गाष्टमी और महानवमीं का पूजन व्रत करने वाले कुछ लोग/महिलाएं अपना व्रत दुर्गाष्टमी को खोलते हैं और कुछ नवमी को कन्याओ को भोजन करवाने के बाद खोलते हैं | 10 अक्टूबर से नवरात्रि प्रारम्भ हो रहे हैं और 18 अक्टूबर को महानवमी, नवरात्रि हैं | इन नो दिनों मैं माँ दुर्गा के नो रूपों की पूजा की जाती हैं |

17 अक्टूबर 2018 को हैं दुर्गाष्टमी , होगा कंवारी कन्याओं का पूजन : कन्या पूजन विधि नवरात्रि में

Kanya Puja on Navratri नवरात्र पर्व के आठवें और नौवें दिन कन्या पूजन और उन्हें घर बुलाकर भोजन कराने का विधान होता है. दुर्गाष्टमी और नवमी के दिन आखरी नवरात्रों में इन कन्याओ को नौ देवी स्वरुप मानकर इनका स्वागत किया जाता है | माना जाता है की इन कन्याओ को देवियों की तरह आदर सत्कार और भोज से माँ दुर्गा प्रसन्न हो जाती है और अपने भक्तो को सुख समृधि का वरदान दे जाती है |

Navratri Kanya Poojan

 

महालक्ष्मी व्रत में इन आठ बातों का रखें ख्याल, बरसेगा धन

आज चैत्र नवरात्र में दुर्गाष्टमी का दिन है आज भी देशभर के कई व्रती कन्या पूजन कर अपना व्रत संकल्प पूरा कर रहे हैं. वहीं कुछ व्रती कल नवमीं के दिन कन्या पूजन कर अपना व्रत पूर्ण करेंगे. हम आपको बताते हैं क्या है कन्या पूजन का महत्व और कैसे करें मां के कंजक (कन्या) स्वरूप की पूजा ?

दुर्गाष्टमी महानवमीं कन्या पूजन का महत्व

धर्म ग्रंथों के अनुसार, कन्याएं साक्षात माता का स्वरूप मानी जाती है | माता दुर्गा की नो दिन नो रूपों की पूजा की जाती हैं ,इन नो रूपों की अलग अलग विशेषता हैं,जैसे – एक कन्या की पूजा से ऐश्वर्य, दो की पूजा से भोग और मोक्ष, तीन की अर्चना से धर्म, अर्थ व काम, चार की पूजा से राज्यपद, पांच की पूजा से विद्या, छ: की पूजा से छ: प्रकार की सिद्धि, सात की पूजा से राज्य, आठ की पूजा से संपदा और नौ की पूजा से पृथ्वी के प्रभुत्व की प्राप्ति होती है |

दुर्गाष्टमी कन्‍या पूजन की विधि

  1.  एक दिन पूर्व ही कन्‍याओं को उनके घर जाकर निमंत्रण दें |
  2.  गृह प्रवेश पर कन्याओं का पूरे परिवार के साथ फूलों की वर्षा से स्वागत करें और नव दुर्गा के सभी नौ नामों के जयकारे   लगाएं |
  3.  अब इन कन्याओं को आरामदायक और स्वच्छ जगह बिठाएं |
  4.  सभी के पैरों को दूध से भरे थाल या थाली में रखकर अपने हाथों से उनके पैर स्‍वच्‍छ पानी से धोएं |
  5.  उसके बाद कन्‍याओं के माथे पर अक्षत, फूल या कुंकुम लगाएं |
  6.  फिर मां भगवती का ध्यान करके इन देवी रूपी कन्याओं को इच्छा अनुसार भोजन कराएं |
  7.  भोजन के बाद कन्याओं को अपने सामर्थ्‍य के अनुसार दक्षिणा, उपहार दें और उनके पुनः पैर छूकर आशीष लें |

9 दिन के नवरात्र व्रत में रखें 9 बातों का ध्यान

शारदीय नवरात्र, 10 अक्टूबर से शुरु हो रहे हैं। क्या आप भी पूरे 9 दिन का व्रत रखना चाह रहे हैं? तो इसके लिये सबसे पहले यह सोचें कि आपको व्रत किस तरह रखना है? फलाहार करना है या फिर तरल पदार्थ जैसे दूध और जूस पीकर व्रत रखना है। अगर आप 9 दिन का व्रत रख रहे हैं, तो इसके लिये आपको इन बातों का ध्यान ज़रूर रखना चाहिये।

नवरात्र व्रत का कैसा हो भोजन ?

-ऐसी चीज़ें खायें, जिसमें हाई फाइबर और लो फैट हो।
-मॉर्डरेट प्रोटीन, हाई कार्बोहाइड्रेट से युक्त होना चाहिये।
-त्वचा की खुश्की दूर करने के लिये लिक्विड डायट बढ़ायें।
-सामान्य दूध की जगह स्किम्ड दूध पीना चाहिये।

नवरात्रा में कोनसी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए ?

  • सिर्फ नीबू-पानी पीकर व्रत न रखें।
  • बिना कुछ खाये, सिर्फ दूध पीकर व्रत न रखें।
  • ऐसा करने से पेट कमज़ोर होगा।
  • थकान, ब्लड प्रेशर लो और चिड़चिड़ापन हो सकता है।
  • गैस्ट्राइटिस, एसिडिटी और सीने में जलन की शिकायत।
  • व्रत में खट्टे फल जैसे संतरा, नीबू, मौसम्मी न खायें।
  • व्रत में दोपहर और रात का फलाहार
  • व्रत के लंच और डिनर में संतुलित आहार लेना चाहिये।
  • कुटू या सिंघारे के आटे की चपाती खाना चाहिये।
  • साबूदाने की खीर या खिचड़ी तथा घिया खा सकते हैं।
  • सीताफल, आलू की रसेदार सब्जी खाना अच्छा रहेगा।
  • दिन में 3 बार फल या फ्रूट सलाद खाना चाहिये।
  • 4-6 बार सूखे मेवों के साथ जूस, दूध, शेक पीना अच्छा रहेगा।
  • नारियल पानी को अपने डायट में अवश्य शामिल करें।
  • नवरात्र व्रत में कम से कम 8 लीटर पानी पियें।
  • एक ही तरह के फल के बजाय मिक्स फ्रूट लेना अच्छा रहेगा।
  • ताज़े फल खायें और कड़वे स्वाद वाले फल न खायें।

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