Navratri 2018 नवरात्रा कलश स्थापना मुहूर्त समय, और पहले नवरात्रा की पूजा विधि सामग्री

नवरात्र 2018 : प्रत्येक वर्ष में दो बार नवरात्रे आते है। पहले नवरात्रे चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरु होकर चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि तक चलते है। अगले नवरात्रे शारदीय नवरात्रे कहलाते है। ये नवरात्रे आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरु होकर नवमी तिथि तक रहते है। दोनों ही नवरात्रों में देवी का पूजन किया जाता है। देवी का पूजन करने की विधि दोनों ही नवरात्रों में लगभग एक समान रहती है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष के नवरात्रों के बाद दशहरा पर्व मनाया जाता है।

नवरात्रों में माता के नौ रुपों की पूजा की जाती है।

नवरात्री देवी दुर्गा को समर्पित नौ दिन का त्योहार है। नवरात्र एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ हैं 9 रात । इन नौ के दौरान रात और दस दिन, देवी दुर्गा की पूजा 9 विभिन्न रूपों में की जाती है, जिसे नवदुर्गा कहा जाता है। दसवां दिन विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है जब देवी दुर्गा की मूर्तियों को पानी में डुबोया जाता है। नवरात्रि का त्योंहार भारत के विभिन्न राज्यों मैं मनाया जाता है। हालांकि, गुजरात, महाराष्ट्र और पश्चिमी राज्यों में नवरात्रि बहुत लोकप्रिय त्योहार है कर्नाटक में नवरात्रि के पहले दिन, देवी दुर्गा को ज्योति के साथ पूर्ण वैदिक अनुष्ठानों के साथ कलश में लाया जाता है मंत्रों का उचारण करके द्वि माँ दुर्गे की कलश की स्थापना की जाती हैं | और यह दिन एक खाश दिन होता हैं |पश्चिम बंगाल में नवरात्रि को दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है। पश्चिम बंगाल में, देवी दुर्गा की नवरात्रि के अंतिम तीन दिनों में पूजा की जाती है और ये तीन दिन मशहूर दुर्गा सप्तमी, दुर्गा अष्टमी और दुर्गा नवमी के रूप में जाने जाते हैं।

Navratri 2018 : कलश स्थापना और पूजा का समय

navratri ghatsthapna vidhi

 

इस वर्ष शारदीय नवरात्री कलश स्थापना और पूजा का समय / Navratri 2018 : इस वर्ष नवरात्री पूजन 10 अक्टूबर 2018 से प्रारम्भ है। उस दिन प्रथम नवरात्र है। नवरात्रि के प्रथम दिन माता शैलपुत्री के रूप में विराजमान होती है। उस दिन कलश स्थापना के साथ-साथ माँ शैलपुत्री की पूजा होती हैऔर इसी पूजा के बाद मिलता है माँ का आशीर्वाद।

प्रथम नवरात्र हेतु तारीख वार

  • दिन(वार) – बुधवार
  • तिथि – प्रतिपदा
  • नक्षत्र – चित्रा
  • योग – Vaidhriti
  • करण – बालव
  • पक्ष – शुकल
  • मास – आश्विन
  • लग्न – कन्या (द्विस्वभाव)
  • लग्न समय – 6:25 से 7:25
  • राहु काल – 12:14 से 13:41 तक
  • विक्रम संवत – 2075

Navratri 2018 : माता दुर्गा का प्रथम रूप

navdurga puja

माँ दुर्गा के प्रथम रूप “शैलपुत्री” की उपासना के साथ नवरात्रि आरम्भ होती है। शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में उत्पन्न होने के कारण, माँ दुर्गा के इस रूप का नाम शैलपुत्री है। पार्वती और हेमवती भी इन्हीं के नाम हैं। माता के दाएँ हाथ में त्रिशूल तथा बाएँ हाथ में कमल का फूल है। माता का वाहन वृषभ है। माता शैलपुत्री की पूजा-अर्चना इस मंत्र के उच्चारण के साथ करनी चाहिए-

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

Navratri 2018 : पूजन सामग्री

माँ दुर्गा की सुन्दर प्रतिमा, माता की प्रतिमा स्थापना के लिए चौकी, लाल वस्त्र , कलश/ घाट , नारियल का फल, पांच पल्लव आम का, फूल, अक्षत, मौली, रोली, पूजा के लिए थाली , धुप और अगरबती, गंगा का जल, कुमकुम, गुलाल पान, सुपारी, चौकी,दीप, नैवेद्य,कच्चा धागा, दुर्गा सप्तसती का किताब ,चुनरी, पैसा, माता दुर्गा की विशेष कृपा हेतु संकल्प तथा षोडशोपचार पूजन करने के बाद, प्रथम प्रतिपदा तिथि को, नैवेद्य के रूप में गाय का घी माता को अर्पित करना चाहिए तथा पुनः वह घी किसी ब्राह्मण को दे देना चाहिए।

Navratri 2018 : पूजा का फल

वैसे तो गीता में कहा गया है- कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन अर्थात आपको केवल कर्म करते रहना चाहिए फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। फिर भी प्रयोजनम् अनुदिश्य मन्दो अपि न प्रवर्तते सिद्धांतानुसार विना कारण मुर्ख भी कोई कार्य नहीं करता है तो भक्त कारण शून्य कैसे हो सकता है। माता सर्व्यापिनी तथा सब कुछ जानने वाली है एतदर्थ मान्यता है कि माता शैलपुत्री की भक्तिपूर्वक पूजा करने से मनुष्य की सभी मनोकामनाये पूर्ण होती है तथा भक्त कभी रोगी नहीं होता अर्थात निरोगी हो जाता है।

नवरात्र 2018 की तिथियां

10. अक्टूबर 2018 : इस दिन घटस्थापना शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 25 मिनट से लेकर 07 बजकर 25 मिनट तक का है। प्रथम नवरात्र को देवी के शैलपुत्री रूप का पूजन किया जाता है।

11. अक्टूबर 2018 : नवरात्र की द्वितीया तिथि को देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है।
12. अक्टूबर 2018 : तृतीया तिथि को देवी दुर्गा के चन्द्रघंटा रूप की आराधना की जाती है।
13. अक्टूबर 2018 : नवरात्र पर्व की चतुर्थी तिथि को मां भगवती के देवी कूष्मांडा स्वरूप की उपासना की जाती है।
14. अक्टूबर 2018 : पंचमी तिथि को भगवान कार्तिकेय की माता स्कंदमाता की पूजा की जाती है।
15. अक्टूबर 2018 : नारदपुराण के अनुसार आश्विन शुक्ल षष्ठी को मां कात्यायनी की पूजा करनी चाहिए।
16. अक्टूबर 2018 : नवरात्र पर्व की सप्तमी तिथि को मां कालरात्रि की पूजा का विधान है।
17. अक्टूबर 2018 : अष्टमी तिथि को मां महागौरी की पूजा की जाती है। इस दिन कई लोग कन्या पूजन भी करते हैं।
18. अक्टूबर 2018 : नवरात्र पर्व की नवमी तिथि को देवी सिद्धदात्री स्वरूप का पूजन किया जाता है। सिद्धिदात्री की पूजा से नवरात्र में नवदुर्गा पूजा का अनुष्ठान पूर्ण हो जाता है।
19. अक्टूबर 2018 : बंगाल, कोलकाता आदि जगहों पर जहां काली पूजा या दुर्गा पूजा की जाती है वहां दसवें दिन दुर्गा जी की मूर्ति का विसर्जन किया जाता है।

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