भारत के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी स्वतन्त्रता दिवस देंगे चोंकाने वाला भाषण

प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी का स्वतन्त्रता दिवस  पर भाषण : प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त 2020 को सबसे पहले देश को सम्बोधित करेंगे और फिर देश के अमर शहीदों को श्रन्धांजलि देंगे |फिर आये हुये अथिति गणों स्वागत करने के बाद पुरे राष्ट्र को सबोधित करेंगे |दूसरी बार भारत के प्रधानमंत्री पद के भार सभालने के बाद वह एक देश एक कानून होने के बाद पहली बार स्वतन्त्रता दिवस भाषण देंगे मोदी जी  प्रधानमन्त्री नरेंद्र इस बार बहुत बड़े बड़े फैसले लिये हैं पद ग्रहण करते ही धारा 370 को पूर्ण रूप से समाप्त कर दिया और पुरे भारत को एक देश एक कानून के धागे में बांधने का कार्य किया हैं | और सबसे बड़ा फैसला राम मंदिर का जो बहुत सालो से गले की फ़ांस बना हुआ था | इस बार प्रधानमन्त्री नरेंद्र पुरे विश्व को शांति सन्देश देने वाले हैं |सबसे अहम बात पाकिस्तान वह चीन जो बार बार युद्ध की धमकी देते रहते हैं | उन को आतकवाद फैलाने वह जड खत्म करने के लिये कड़ी भाषा में बोलेंगे | आज पाकिस्तान वो हालात हैं भीख मागने की कगार पर खड़े हैं | लेकिन आतंकवाद को छोड़ने की बात नही करते हैं | हमारे देश दोनों एक साथ आजाद हुये थे आज अपने आप को हमारे साथ तुलना कर के देखो हम चाँद पर हैं तुम धरती पर नजर नही आते हो | आज भारत जगत गुरु बनने की और आगे बढ़ रहा हैं |

स्वतन्त्रता दिवश पर प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी का देश के नाम संदेश

वे कैसे लोग और कैसी सरकारें हैं जो निर्दोष लोगों के मरने पर आतंकवादियों को ग्लोरिफाई करते हैं |मैं भटके हुए नौजवानों से कहना चाहता हूं कि हिंसा का रास्ता छोड़कर लौट आएँ और देश को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करें हिंसा से कुछ नहीं मिलेगा | गुड गवर्नेंस के लिए जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की जरूरत होती है मुझे देश की स्थिति बदलनी है और बदल कर रहूंगा | हमें सरकार की पहचान बनाने से ज्यादा हिंदुस्तान की पहचान बनाने की फिक्र है | नई योजनाएं घोषित करने से सरकारी पहचान बन जाती है लेकिन पुरानी योजनाओं को नहीं छोड़ना चाहिए | आजादी के बाद 38 हजार से ज्यादा जवानों ने देश की रक्षा के लिए अपनी जान दी है हम आज आजादी का जश्न उन्हीं के त्याग और बलिदान की बदौलत मना रहे हैं देश को आगे बढ़ाने के लिए हिंसा को मिटाना जरूरी है |

पंचायत हो या संसद हो, ग्राम प्रधान हो या प्रधानमंत्री हो, हर लोकतांत्रिक संस्था को सुराज्य की ओर बढ़ने के लिए अपनी जिम्मेदारियों को निभाना होगा | यह सच है कि देश के सामने कई समस्याएं हैं, लेकिन सामर्थ्य भी है सामर्थ्य की शक्ति से समस्याओं के समाधान मिल जाते हैं | शासन को जनता के लिए उत्तरदायी होना चाहिए ऐसा न होने पर आम लोगों की समस्याएं जस की तस रहती हैं बदलाव नजर नहीं आता शासन को संवेदनशील होना चाहिए | दो साल के कार्यकाल में हमने अनगिनत काम किए हैं मैं भी लाल किले की प्राचीर से सरकार की बहुत सारी उपलब्धियां बता सकता हूं लेकिन उसका हिसाब देने के लिए मुझे यहां हफ्ते भर तक बोलना होगा मध्यम वर्ग के लोग पुलिस से ज्यादा इनकम टैक्स वालों से परेशान रहते हैं. मैं यह स्थिति बदल कर रहूंगा | 18 हजार गांवों में से 15 हजार में बिजली पहुंचा दी गई है मुझे पता चला कि उनमें से कई गांव आज पहली बार देश की आजादी के जश्न को टीवी पर देख रहे होंगे | यह बात सही है कि पिछली सरकार में महंगाई दर 10 फीसदी को भी पार कर गई थी | हमने इसे 6 फीसदी से आगे नहीं जाने दिया जबकि दो साल देश में अकाल रहा |किसान के पास मिट्टी है | अगर उसे पानी मिल जाए तो मेरे देश के किसानों में इतना दम है कि वे जमीन से सोना निकाल लें इसलिए हम जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दे रहे हैं | हमारे वैज्ञानिकों ने 171 नए बीज विकसित किए हैं | वे देश की जलवायु और मिट्टी के हिसाब से इन बीजों को विकसित कर रहे हैं |

ब्रिटीश शासन को हटाने के लिए अनगिनत स्वतंत्रता सेनानीयों ने दिया जीवन का बलिदान

ब्रिटीश शासन से 15 अगस्त 1947 में भारत को स्वतंत्रता मिली। आजादी के बाद हमें अपने राष्ट्र और मातृभूमि में सारे मूलभूत अधिकार मिले। हमें अपने भारतीय होने पर गर्व होना चाहिये और अपने सौभाग्य की प्रशंसा करनी चाहिये कि हम आजाद भारत की भूमि में पैदा हुए है। गुलाम भारत का इतिहास सबकुछ बयाँ करता है कि कैसे हमारे पूर्वजों ने कड़ा संघर्ष किया और फिरंगियो कें क्रूर यातनाओं को सहन किया। हम यहाँ बैठ के इस बात की कल्पना नहीं कर सकते कि ब्रिटीश शासन से आजादी कितनी मुश्किल थी। इसने अनगिनत स्वतंत्रता सेनानीयों के जीवन का बलिदान और 1857 से 1947 तक कई दशकों का संघर्ष लिया है। भारत की आजादी के लिये अंग्रेजों के खिलाफ सबसे पहले आवाज ब्रिटीश सेना में काम करने वाले सैनिक मंगल पांडे ने उठायी थी।बाद में कई महान स्वतंत्रता सेनानीयों ने संघर्ष किया और अपने पूरे जीवन को आजादी के लिये दे दिया। हम सब कभी भी भगत सिंह, खुदीराम बोस और चन्द्रशेखर आजाद को नहीं भूल सकते जिन्होंने बहुत कम उम्र में देश के लड़ते हुए अपनी जान गवाँ दी। कैसे हम नेताजी और गाँधी जी संघर्षों को दरकिनार कर सकते है। गाँधी जी एक महान व्यक्तित्व थे जिन्होंने भारतीयों को अहिंसा का पाठ पढ़ाया था। वो एक एकमात्र ऐसे नेता थे जिन्होंने अहिंसा के माध्यम के आजादी का रास्ता दिखाया। और अंतत: लंबे संघर्ष के बाद 15 अगस्त 1947 को वो दिन आया जब भारत को आजादी मिली।

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