Bhai Par Kavita भाई पर कविता छोटे-बड़े भाई पर हिंदी कविता Poem On Brother

Bhai Par Kavita भाई पर कविता छोटे-बड़े भाई पर हिंदी कविता Bhai Par Kavita Poem On Brother Best Poem On Brother Sister On Rakhi Raksha Bandhan : हर बहन के लिए उसका भाई पिता तुल्य होता हैं | भाई छोटा हो या बड़ा बहन को अति प्रिय होता हैं | बहन भी भाई के लिए बहुत प्रिय होती हैं | भाई -बहन बचपन में खूब लड़ते झगड़ते हैं | और आपस में एक दुसरे के कभी -कभी नाराज हो जाते हैं | लेकिन फिर भी बहन भाई एक दुसरे के पूरक होते हैं | बहन ने अपने प्रिय भाई के लिए विभिन्न कविता लिखी हैं | यहाँ पर कुछ Bhai Par kavita Poem On Brother Bade Chote Bhai Par Kavita उपलब्ध करवा रहे हैं | जो बहने अपने भाई के लिए गा सकती हैं | उन्हें भेज सकती हैं | आगे अगस्त को (रक्षाबन्धन) राखी भाई -बहन Rakhi 2019 Raksha Bandhan का त्योंहार आ रहा हैं | जिस पर बहने अपने भाई के लिए कविता गाकर बड़े -छोटे भाई को मना सकती हैं | उन्हें खुश कर सकते हैं |

Rakhi Raksha Bandhan Kavita Brother Sister Raksha Bandhan Hindi Poem

Rakhi Best Raksha Bandhan Poem Kavita Brother Sister : रक्षा बंधन भाई बहिन के प्यार का त्यौहार है | ये वो ही त्यौहार है जिस दिन एक भाई अपनी बहन की रक्षा के लिए वचन देता है | भाई बहन के पवित्र रिश्ते को ओर्र मजबूत बनता है |इस विशेष दिन के लिये Bhai Bahan Kavita Hindi और Raksha Bandhan Rakhi Par Chote Bade Bhai Par Poem हमने आपको निचे दी है |ये विशेष राखी रक्षा बंधन कविता आपके दिल को जरूर छू लेगी | तो पेश है रक्षा बंधन पर भाई बहन के लिये कविता निचे दी जा रही है |

भाई पर कविता छोटे-बड़े भाई पर हिंदी कविता Bhai Bhai Par Kavita Poem On Brother

मेरे प्यारे भाई
हो तुम मुझसे छोटे
लेकिन रिश्ते यूँ निभाते हो
जैसे हो मेरे से बड़े
जीवन पथ पर चलत चलत
जब मेने ठोकर खाई
सर ऊँचा कर देखा
साथ तुम्हारा पाई |

जब तुमने मुझे देखा
मुख मलिन था मेरा
फिर तुम कभी न खुश रहते
तुम्हारी हर कोशिश मुझे खुश रखने की
लेकर आगे कदम बढ़ाया
सर उठा कर देखा तो
हाथ तुम्हारा आगे पाया |

आँखों में आसूं मेरे होते
मायूस तुम नजर आते
सांत्वना की बड़ी टोकरी ले
मेरे सामनेसदा तुम्हे ही पाया
सिर उठाकर देखा तो
पास तुम्हे ही पाया ||

कोई परेशानी न हो ऐसी
जिसका समाधान न तुमने पाया
मेरे से ज्यादा विश्वास तुमपर
सदा आधार उसे बनाया
सर उठाकर देखा तो
हाथ तुम्हारा आगे पाया ||

चंदा मामा से प्यारा मेरा मामा
सब बच्चों से हमेशा गाया
बाल मन पढने में माहिर
क्या तुमने जादू छड़ी घुमाया
जो काम तेरी बहन नही कर पाती
मेरे भैया तुमने झट से कर दिखाया
सर ऊँचा कर देखा तो
सामने तुम्हे ही खड़ा पाया | |

बड़े भाई पर कविता Bade Bhai Par Hindi Kavita

हर ख़ुशी में हर गम में आपका साथ हो
मेरे भाई तुम पापा के सर ताज हो
सभी बहनों की खुशियों का तुम ही एक राज हो
तुम ही तो रक्षाबन्धन (राखी) की लाज हो
वैसे तो पत्थर की तराह कठोर हो
लेकिन पर मुसीबत आने पर मोम की तरह पिघलते हो |
कैसे जाने बिन बताये मन की बात कैसे जान लेते हो
बहनों की परेशानीयों को अपनी मान लेते हो
हर ख़ुशी में हर गम में आपका साथ हो
मेरे भाई तुम पापा के सर ताज हो

Bhai Par Kavita भाई पर हिंदी कविता

सावन आया राखी आई
बाजार से खूब मिठाई लाई |

भाई के लिए रस मलाई
और सुंदर सी राखी लाई

सुबह से मैं नाच रही थी और माच रही थी
बरसो बाद आज मेरे प्यारे भाई से मिलने वाली थी

दरवाजे पर एक दस्तक हुई
फिर एक समय को मैं में घबराई

दरवाजे पर न था भाई
डाकिया ने एक चिट्ठी लाइ
धीरे से मेरे हाथ में थमाई
मेने धीरे से हाथो में चिट्ठी को पाई

कांपते हाथों से मेने चिट्ठी को पढ़ पाई
संदेशा आया सरहद से भाई ने वीरगति हैं पाई

देश के लिए अपनी जान गवाई
मेने भी पूरी जिन्दगी भाई की याद में बिताई ||

छोटे भाई पर कविता

सदा तुम नफरत करते हो ,पर तुमको मुझसे प्यार हैं
मेरा प्रेम हैं हल्का फुल्का , पर ये नफरत तुम पर ही भार हैं |

जो नफरत बन फुट पड़ी हैं , बस वही प्यार का सार हैं
चाहे जितनी शिद्दत कर लो , मुझको यह स्वीकार हैं ,

भैया तुम क्या जानो कितना प्यार मुझसे करते हो
अपने दिल के हाथों तुम , इतना क्यों बेजार हो

तेरे दर पर जब आउंगी क्या दूर खड़े ही पाओगे
निश्चल जड़ बन खड़े रहोगे , आँख में भर ना पाओगे |

मामा कह जब वे दौड़ेंगे ,क्या उन्हें गोद में न ले पाओगे
बच्चों की मुस्कान देख तुम , क्या निष्ठुर रह पाओगे

जब शादी होगी तेरी तो क्या जीजू से द्वेष मनाओगे
बहने करती हैं जो रश्मे ,वो किस्से करवाओगे

कोन करेगा टिका तेरा , हल्दी किससे लगवाओगे
बहन से होगी इतनी नफरत तो, गैरो से खाक निभाओगे

प्यार में ज्यादा शक्ति हैं या नफरत में हैं बताओगे
मैं तुम्हे चुनोती देती हैं , तुम नफरत करके दिखलाओगे

तुम गुस्से को मत शांत करो ,और नफरत मुझेसे करते रहना
स्नेह की अग्नि पावन हैं , तुम ही पिघलोगे ये कहती बहना

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