रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता हैं ? रक्षाबंधन पर राखी का महत्व इतिहास और निबन्ध

Raksha Bandhan Festival 2020 : The Raksha Bandhan festival is coming closer. Raksha Bandhan is celebrated on Monday 03 August 2020.The sisters are getting excited to tie Rakhi their brothers. But the time for rakhi Bind on Rakshabandhan is very short. 03 August is the auspicious time for the Raksha Bandhan from 09.15 am to 6.15 pm on Monday.

राखी बांधने का मुहूर्त 2020

राखी बांधने का मुहूर्त : 09:27:30 से 21:17:06 तक
अवधि : 11 घंटे 49 मिनट
रक्षा बंधन अपराह्न मुहूर्त : 13:47:43 से 16:28:59 तक
रक्षा बंधन प्रदोष मुहूर्त : 19:10:15 से 21:17:06 तक

rakshabandhan festival

रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता हैं

रक्षाबंधन का त्योहार पूरे भारत देश मैं बड़ी ही श्रधा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। आमतौर पर यह त्योहार भाई-बहनों का माना जाता है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र की दुआ करती हैं और भाई भी अपनी बहनों को सदा रक्षा करने का वचन देते हैं। पुराणिक मान्यताओं के अनुसार रक्षा बंधन को लेकर बहुत सी कथा हैं | भगवान श्री कर्ष्णं और द्रोपती 2 राजा बलि और लक्ष्मी माता की 3  सिकंदर की पत्नी ने अपने पति के शत्रु पुरु को राखी बाँधी थी 4 रानी कर्णावती और हुमायू 5 इंद्र देव को उस की पत्नी दवारा रक्षा सूत्र बांधना अन्य कथा हैं | लिकिन इस त्यौहार को हमेशा भाई के दवारा बहन की रक्षा के रूप में देखा गया हैं |यह रक्षा सूत्र बहिन अपने भाई की रक्षा के लिये बंधता हैं और अपने भाई से वचन लेती हैं की तुम हमेशा मेरी रक्षा करोगे |

राखी के त्योहार की शुरुआत : रक्षा बंधन का त्योहार भाई-बहन मनाते हैं पर क्या आप जानते हैं कि यह त्योहार भाई-बहन ने नहीं बल्कि पति पत्नी ने शुरू किया था और तभी संसार में रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाने लगा। पुराणों के अनुसार एक बार दानवों ने देवताओं पर आक्रमण कर दिया। देवता दानवों से हारने लगे। देवराज इंद्र की पत्नी देवताओं की हो रही हार से घबरा गईं और इंद्र के प्राणों की रक्षा के तप करना शुरू कर दिया, तप से उन्हें एक रक्षासूत्र प्राप्त हुआ। शचि ने इस रक्षासूत्र को श्रावण पूर्णिमा के दिन इंद्र की कलाई पर बांध दिया, जिससे देवताओं की शक्ति बढ़ गयी और दानवों पर जीत प्राप्त की। इसलिए श्रावण पूर्णिमा के दिन रक्षासूत्र बांधने से यह दिन रक्षा बंधन के त्योंहार के नाम से मनाया जाने लगा। पुराणों के अनुसार आप जिसकी भी रक्षा एवं उन्नति की इच्छा रखते हैं उसे रक्षा सूत्र यानी राखी बांध सकते हैं, चाहें वह किसी भी रिश्ते में हो।

रक्षाबंधन राखी मन्त्र

रक्षाबंधन का त्योहार बिना राखी के पूरा नहीं होता, लेकिन राखी तभी प्रभावशाली बनती है जब उसे मंत्रों के साथ रक्षासूत्र बांधा जाए।

राखी बांधने का मंत्र : ‘येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वां प्रतिबध्नामि, रक्षे! मा चल मा चल |’

इस मंत्र का अर्थ है कि जिस प्रकार राजा बलि ने रक्षासूत्र से बंधकर विचलित हुए बिना अपना सब कुछ दान कर दिया। उसी प्रकार हे रक्षा! आज मैं तुम्हें बांधता हूं, तू भी अपने उद्देश्य से विचलित न हो और दृढ़ बना रहे।

रक्षाबंधन का महत्व : Importance of Rakshabandhan

रक्षा बंधन का पर्व श्रवण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है. वर्ष 2017 में यह 7 अगस्त, के दिन मनाया जायेगा. यह पर्व भाई -बहन के रिश्तों की अटूट डोर का प्रतीक है. भारतीय परम्पराओं का यह एक ऎसा पर्व है, जो केवल भाई बहन के स्नेह के साथ साथ हर सामाजिक संबन्ध को मजबूत करता है. इस लिये यह पर्व भाई-बहन को आपस में जोडने के साथ साथ सांस्कृ्तिक, सामाजिक महत्व भी रखता है.

Importance of Rakshabandhan

रक्षा बंधन के महत्व को समझने के लिये सबसे पहले इसके अर्थ को समझना होगा. “रक्षाबंधन “ रक्षा+बंधन दो शब्दों से मिलकर बना है. अर्थात एक ऎसा बंधन जो रक्षा का वचन लें. इस दिन भाई अपनी बहन को उसकी दायित्वों का वचन अपने ऊपर लेते है |

रक्षा बंधन की विशेषता : Importance of Rakdhabandhan

रक्षा बंधन का पर्व विशेष रुप से भावनाओं और संवेदनाओं का पर्व है | एक ऎसा बंधन जो दो जनों को स्नेह की धागे से बांध ले. रक्षा बंधन को भाई – बहन तक ही सीमित रखना सही नहीं होगा. बल्कि ऎसा कोई भी बंधन जो किसी को भी बांध सकता है. भाई – बहन के रिश्तों की सीमाओं से आगे बढ़ते हुए यह बंधन आज गुरु का शिष्य को राखी बांधना, एक भाई का दूसरे भाई को, बहनों का आपस में राखी बांधना और दो मित्रों का एक-दूसरे को राखी बांधना, माता-पिता का संतान को राखी बांधना हो सकता है.

रक्षाबंधन का इतिहास : The History of Raksha Bandhan

एक सौ 100 यज्ञ पूर्ण कर लेने पर दानवेन्द्र राजा बलि के मन में स्वर्ग का प्राप्ति की इच्छा बलवती हो गई तो का सिंहासन डोलने लगा। इन्द्र आदि देवताओं ने भगवान विष्णु से रक्षा की प्रार्थना की। भगवान ने वामन अवतार लेकर ब्राह्मण का वेष धारण कर लिया और राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुँच गए। उन्होंने बलि से तीन पग भूमि भिक्षा में मांग ली।बलि के गु्रु शुक्रदेव ने ब्राह्मण रुप धारण किए हुए विष्णु को पहचान लिया और बलि को इस बारे में सावधान कर दिया किंतु दानवेन्द्र राजा बलि अपने वचन से न फिरे और तीन पग भूमि दान कर दी।
वामन रूप में भगवान ने एक पग में स्वर्ग और दूसरे पग में पृथ्वी को नाप लिया। तीसरा पैर कहाँ रखें? बलि के सामने संकट उत्पन्न हो गया। यदि वह अपना वचन नहीं निभाता तो अधर्म होता। आखिरकार उसने अपना सिर भगवान के आगे कर दिया और कहा तीसरा पग आप मेरे सिर पर रख दीजिए। वामन भगवान ने वैसा ही किया। पैर रखते ही वह रसातल लोक में पहुँच गया।
जब बलि रसातल में चला गया तब बलि ने अपनी भक्ति के बल से भगवान को रात-दिन अपने सामने रहने का वचन ले लिया और भगवान विष्णु को उनका द्वारपाल बनना पड़ा। भगवान के रसातल निवास से परेशान लक्ष्मी जी ने सोचा कि यदि स्वामी रसातल में द्वारपाल बन कर निवास करेंगे तो बैकुंठ लोक का क्या होगा? इस समस्या के समाधान के लिए लक्ष्मी जी को नारद जी ने एक उपाय सुझाया। लक्ष्मी जी ने राजा बलि के पास जाकर उसे रक्षाबन्धन बांधकर अपना भाई बनाया और उपहार स्वरुप अपने पति भगवान विष्णु को अपने साथ ले आयीं। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी यथा रक्षा-बंधन मनाया जाने लगा।

रक्षाबंधन पर निबन्ध : Essay on Rakhi

आजकल राखी प्रमुख रूप से भाई-बहन का पर्व माना जाता है । बहिनों को महीने पूर्व से ही इस पर्व की प्रतीक्षा रहती है । इस अवसर पर विवाहित बहिनें ससुराल से मायके जाती हैं और भाइयों की कलाई पर राखी बाँधने का आयोजन करती हैं । वे भाई के माथे पर तिलक लगाती हैं तथा राखी बाँधकर उनका मुँह मीठा कराती हैं । भाई प्रसन्न होकर बहन को कुछ उपहार देता है । प्रेमवश नया वस्त्र और धन देता है । परिवार में खुशी का दृश्य होता है । बड़े बच्चों के हाथों में रक्षा-सूत्र बाँधते हैं । घर में विशेष पकवान बनाए जाते हैं ।रक्षाबंधन के अवसर पर बाजार में विशेष चहल-पहल होती है । रंग-बिरंगी राखियों से दुकानों की रौनक बढ़ जाती है । लोग तरह-तरह की राखी खरीदते हैं । हलवाई की दुकान पर बहुत भीड़ होती है । लोग उपहार देने तथा घर में प्रयोग के लिए मिठाइयों के पैकेट खरीदकर ले जाते हैं ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.