Raksha bandhan Kavita (Poem) Hindi राखी पर कविता Rakhi Poem for Brother and Sister

राखी पर कविता / Rakhi Poem Hindi Rakshabandhan Kavita (Poem) रक्षाबंधन पर भाई बहन के लिए कवितायेँ और दोहे Rakhi Poem for Brother and Sister 2020 : दोस्तों रक्षाबंधन का त्यौहार प्रतेक वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा को सम्पूर्ण भारत में मनाया जाता है | यह दिन इसलिए खास होता है क्योकि बहिन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिये उस दिन का बेसब्री से इंतज़ार करती है | जैसे रक्षाबंधन का त्यौहार आता बहिन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बाधते समय कुछ Raksha Bandhan Kvita (Poems)जो उन्हें सुनती है | ये Rakshabandhan Bhai Behan Kavita / Rakshabandhan Kavita (Poem) Hindi Rakhi Poem for Brother and Sister डाउनलोड कर आप अपने whatsapp,Facebook पर भेज कर अपने भाई/बहिन को बधाई दे सकते है | हम यहाँ उन्ही Rakshabandhan Poems कविताओ का संग्रह लेकर आये है जो निचे दी जा रही है |

राखी पर कविता Raksha bandhan Poem / Dohe Brother Sister in Hindi

Rakshabandhan For Brother Sister Poems / Dohe in Hindi 2020 : रक्षाबंधन का त्यौहार भाई बहिन के प्यार का दिन होता है | दोस्तों Raksha bandhan का त्यौहार पर हम आपके लिए लेकर आये है | एक प्रसिद्ध कविता जो एक बहिन अपने भाई के लिए कहती है रक्षा बंधन की ये है डोर पवित्र पावन और है बेजोड़ है जो आपको शायद पसंद आएगी |

रक्षा बंधन की ये है डोर
पवित्र पावन और है बेजोड़
ये ऐसा त्यौहार अनोखा
जैसे हो सावन का पहला झोंका
दुआ से बहन की और मिठाई
सजती है भाई की कलाई
लम्बी दूरी करती सहन
निकले राखी लेकर के बहन
इस दिन बहना बांधे राखी
भाई की उम्र हो लम्बी ताकी
इस दिन लेते है भाई शपथ
हो बहन की रक्षा शत प्रतिशत
आओ जाने इसकी कहानी
जो बहुत निराली बहुत पुरानी
द्रोपती पर जब विपदा आई
सामने उसके खड़ा कसाई
एक ही बस आवाज लगाई,
आ पहुचे श्री कृष्णा भाई
यूँ त्योहारो से साल सजा है
रक्षाबंधन का अपना मजा है
रक्षा बंधन का ये है डोर
पवित्र, पावन और बेजोड़!

Rakshabandhan Kavita Hindi 2020

कैसी भी हो एक बहन होनी चाहिये
बड़ी हो तो माँ-बाप से बचाने वाली
छोटी हो तो हमारे पीठ पीछे छुपने वाली
बड़ी हो तो चुपचाप हमारे पॉकेट में पैसे रखने वाली
छोटी हो तो चुपचाप पैसे निकाल लेने वाली
छोटी हो या बड़ी छोटी-छोटी बातों पे
लड़ने वाली एक बहन होनी चाहिये
खुद से ज्यादा हमे प्यार करने वाली
एक बहन होनी चाहिये
Happy Rakshabandhan 2020

राखी पर भाई बहन के लिए कविता

प्रीत के धागो के बंधन में,
स्नेह का उमड़ रहा संसार,
सारे जग में सबसे सच्चा,
होता भाई बहन का प्यार,
नन्हे भैया का है कहना,
राखी बांधो प्यारी बहना
सावन की मस्तीली फुहार,
मधुरिम संगीत सुनती है,
मेघों की ढोल ताप पर,
वसुंधरा मुस्काती है
आया सावन का महीना,
राखी बांधो प्यारी बहना.
धरती ने चाँद मामा को.
इंद्रधनुषी राखी पहनाई,
बिजली चमकी खुशियों से,
रिमझिम जी ने झड़ी लगाई..
राजी ख़ुशी सदा तुम रहना,
राखी बाँधों प्यारी बहना.

Rakshabandhan Bhai Behan Poem in Hindi

Hello Friends we are providing here Raksha Bandhan Bhai Behan Poem in Hindi.You can listen to these poems and read and send your sister and Brother through social media.Here we are presenting Best Raksha Bandhan Bhai Behan Poem in Hindi which you will like .

राखी आई खुशियाँ लाई
बहन आज फूली ना समाई
राखी, रोली और मिठाई
इन सब से थाली खूब सजाई
बाँधे भाई की कलाई पे धागा
भाई से लेती है यह वादा
राखी की लाज भैया निभाना
बहना को कभी भूल ना जाना
भाई देता बहन को वचन
दुःख उसके सब कर लोग हरण
भाई बहन को प्यारा है
राखी का त्यौहार सबसे न्यारा है!

रक्षाबंधन पर कविता हिन्दी  राखी पर कविता हिन्दी में

धागा नहीं यह तो प्यारा का नाता है
तोहफे के लिए भी तो हम रोते हैं
फिर जाके मिठाई भी खिलाते हैं
नजर उतारते हैं हम यूं हीं
आरती की ताली से देख
प्यार के धागे होते हैं कोमल
हैं ये रिश्ते बचपन से
भैया मानो तो मेरी बात
मां -पापा का न छोडो साथ।

रक्षाबंधन पर बहन के लिए कविता

जाति-धर्म के तोड़ता बंधन, फिर भी सबको है भाता।
कांटे भी खिलते फूलों से, जब रक्षाबंधन है आता।।
प्राणवायु नहीं दिखती फिर भी, जीवन उसी से है चलता।
बहन हो कितने दूर भी, फिर भी राज उसी का है चलता।।
जंजीरें भी जकड़ न पाएं, मन इतना चंचल होता।
पल में अवनि, पल में अंबर, पल में सागर में खोता।।
इतने चंचल मन को बांधा, इक रेशम के धागे ने,
हंसते-हंसते खुद बंध जाना, सबके मन को है भाता।
कांटे भी खिलते फूलों से, जब रक्षाबंधन है आता।

रक्षाबंधन भाई पर कविता

भारत का प्रमुख त्यौहार रक्षाबंधन श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है | इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बाँध कर उसकी लम्बी उम्र की कामना करती है | और इस दिन भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है | इसी लिए हम लेकर आये आपके लिए कुछ चुनिन्दा रक्षाबंधन भाई पर कविता जो निचे दी जा रही है |

बाजरो में राखी सजी है
अपनी भी कलाई में सजाने दो
रौनक हर जगह दिख रही है
मुझे भी उत्सव मानाने दो
नहीं चाहिय मेवे और उपहार बदले में
तुम बस रक्षा का वचन निभावो ना
भैया तुम आ जाओं ना
आओ मुझ को तिलक लगाने दो
मैंने फिर से पूजा की थाली सजाई है
देखो मैंने पसंद की बुंदिया बनाई है
साथ में मिठाई और लड्डू है
नहीं है इस बार कोई शिकायत तुमसे
तुम भी मन का बैर मिटाओ ना
भैया तुम आ जाओं ना

Raksha bandhan marathi kavita or रक्षाबंधन वर मराठी कविता

नात हे प्रेमच तुझ आणि माझ
हरवलेले ते गोड दिवस , त्यांच्या मधुर आठवणी
आज सार सार आठवलाय
हातातल्या राखी सोबतच .
भाव मनी दाटतोय ..
बंध हे प्रेमाचे नात आहे
ताई तुझ आणि माझ नात जन्मो जन्मीचे आहे

रक्षाबंधन भोजपुरी कविता Rakshabandhan Bhojpuri poem

गलिया क गलिया फिरइ मनिहरवा,
के लइहैं मोतिया क हार-हिंडोलवा।
मोतिया क हार लइहैं भैंया हो – भैया,
जेकर बहिनी दुलारी – हिंडोलवा।
पाछे लागी ठुनकई बहिनी रानी,
एक लर हमहूं क देहूं – हिंडोलवा।
एक लर टुटि हैं सहस मोती गिरि हैं।
एक लर बहिनि तुं लेउ – हिंडोलवा।

ठाढ़ी झरोखवा मैं चितवऊं,
नैहरे से कोई नाहीं आइ।
ओहिरे से केउ नाहीं बपई रे
जिन मोरी सुधियों न लीन।
ओहिरे बहिनिया कैसन बीरन,
ससुरे में सावन होई।

राखी पर कविता Poem on Rakhi

राखी बांधत जसोदा मैया ।
विविध सिंगार किये पटभूषण, पुनि पुनि लेत बलैया ॥
हाथन लीये थार मुदित मन, कुमकुम अक्षत मांझ धरैया।
तिलक करत आरती उतारत अति हरख हरख मन भैया ॥
बदन चूमि चुचकारत अतिहि भरि भरि धरे पकवान मिठैया ।
नाना भांत भोग आगे धर, कहत लेहु दोउ मैया॥
नरनारी सब आय मिली तहां निरखत नंद ललैया ।
सूरदास गिरिधर चिर जीयो गोकुल बजत बधैया ॥

Raksha Bandhan Poetry Hindi for Brother and Sister

दीदी जब सावन में,
काली मिट्टी पर उग आए,
हरे पौधों को देखता हूँ,
तो मेरी साँवली कलाई पर,
हरे रंग का रेशम,
खुद ब खुद,
उग आता है,
मैं अपने माथे पर,
सुर्ख रोली ढूँढता हूँ,
और,
जब सहर आसमाँ के माथे पर,
वही लाल रोली मलती है,
तो हल्का-सा टीका मुझे भी,
लगा जाती है!!

बरसात जब बूँदों का अक्षत,
मेरे सर पर छिड़कती है,
तो मैं होश में आता हूँ,
और,
सूनी कलाई, सूनी दुनिया,
सूना माथा पाता हूँ!!
दीदी, कभी भोर, कभी मिट्टी,
कभी बारिश बन कर आओ,
शायद मैं अकेला हूँ,
मुझे साथ ले जाओ…

Bhai Bahan Raksha Bandhan Poem in Hindi

नमस्कार दोस्तों सबसे पहले www.Rkalert.in परिवार की तरफ रक्षाबंधन के इस पावन पर्व की ढेरसारी सुभकामनाऐं| इस कविता में दोस्तों एक बहन अपने भाई को ये समझा रही की मुझे माँ-बाबा की दौलत में कुछ नहीं चाहिय बस तुम भी इस कच्चे धागे का मान ज़रा-सा रख लेना कम से कम राखी के दिन बहना का रस्ता तक लेना | दोस्तों इस कविता में वास्तव में उस बहन और उसके भाई के बीच मौजूद असीम प्रेम की झलक दर्शाती है “|

नहीं चाहिए मुझको हिस्सा माँ-बाबा की दौलत में,
चाहे वो कुछ भी लिख जाएँ भैया मेरे! वसीयत में!!
नहीं चाहिए मुझको झुमका चूड़ी पायल और कंगन,
नहीं चाहिए अपनेपन की कीमत पर बेगानापन!!
मुझको नश्वेर चीज़ों की दिल से कोई दरकार नहीं,
संबंधों की कीमत पर कोई सुविधा स्वीकार नहीं!!
माँ के सारे गहने-कपड़े तुम भाभी को दे देना,
बाबूजी का जो कुछ है सब ख़ुशी ख़ुशी तुम ले लेना!!
चाहे पूरे वर्ष कोई भी चिट्ठी-पत्री मत लिखना,
मेरे स्नेह-निमंत्रण का भी चाहे मोल नहीं करना!!
नहीं भेजना तोहफे मुझको चाहे तीज-त्योहारों पर,
पर थोडा-सा हक दे देना बाबुल के गलियारों पर!!
रूपया पैसा कुछ ना चाहूँ.. बोले मेरी राखी है,,
आशीर्वाद मिले मैके से मुझको इतना काफी है!!
तोड़े से भी ना टूटे जो ये ऐसा मन -बंधन है,
इस बंधन को सारी दुनिया कहती रक्षाबंधन है!!
तुम भी इस कच्चे धागे का मान ज़रा-सा रख लेना,
कम से कम राखी के दिन बहना का रस्ता तक लेना!!

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