रक्षाबंधन मुहर्त 2020 ये हैं भाई के राखी बाँधने का उचित समय

रक्षाबंधन राखी मुहूर्त 2020 : हमारे शास्त्रों की परम्परा के अनुसार रक्षाबन्धन के दिन बहन द्वारा भाई के राखी उचित मुहर्त और सही समय देखकर बाँधी जाती हैं | रक्षा बंधन का त्यौहार 03 अगस्त, 2020 को सोमवार को मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि का प्रारम्भ 2 अगस्त 2020 को रात के 09 :25 बजे से आरंभ होगा परन्तु भद्रा काल व्याप्त रहेगी। रक्षा बंधन का पवित्र पर्व भद्रा रहित काल में ही मनाना चाहिए ऐसा कहा गया है | अतः हिन्दू शास्त्र के अनुसार यह त्यौहार 03 अगस्त को भद्रा रहित काल में मनाया जाएगा। किन्तु किसी कारणवश भद्रा काल में यह कार्य करना हो तो भद्रा मुख को छोड़कर भद्रा पुच्छ काल में रक्षा बंधन का त्यौहार मानना श्रेष्ठ होगा। अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिये हर बहन रक्षा बंधन के दिन का इंतजार करती है। श्रावण मास की पूर्णिमा को यह पर्व मनाया जाता है। इस पर्व को मनाने के पिछे कहानियां हैं। यदि इसकी शुरुआत के बारे में देखें तो यह भाई-बहन का त्यौहार नहीं बल्कि विजय प्राप्ति के किया गया रक्षा बंधन है। भविष्य पुराण के अनुसार जो कथा मिलती है वह इस प्रकार है।

राखी बांधने का मुहूर्त :
09:27:30 से 21:17:06 तक
अवधि :
11 घंटे 49 मिनट
रक्षा बंधन अपराह्न मुहूर्त :
13:47:43 से 16:28:59 तक
रक्षा बंधन प्रदोष मुहूर्त :
19:10:15 से 21:17:06 तक

रक्षाबंधन 2020 राखी बाँधने का शुभ मुहूर्त

Sunrise August 03, 2020 6:02 AM
Sunset August 03, 2020 7:03 PM
Purnima Tithi Starts August 02, 2020 9:29 PM
Purnima Tithi Ends August 03, 2020 9:28 PM
Bhadra Starts August 02, 2020 9:29 PM
Bhadra Ends August 03, 2020 9:25 AM
Raksha Bandhan Time August 03, 9:25 AM – August 03, 9:15 PM
Raksha Bandhan Aparahan Time August 03, 1:51 PM – August 03, 4:27 PM
Raksha Bandhan Pradosha Time August 03, 7:03 PM – August 03, 9:15 PM

इस प्रकार रक्षाबंधन पर राखी बाँधने का ये श्रेष्ठ समय हैं | आर्टिकल मैं दिए गये समय के अनुसार बहने अपने प्यारे बाई के राखी बांध सकती हैं |

रक्षाबंधन की कथा 

एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से ऐसी कथा को सुनने की इच्छा प्रकट की, जिससे सभी कष्टों से मुक्ति मिल जाती हो। इसके उत्तर में श्री कृष्ण ने उन्हें यह कथा सुनायी–

प्राचीन काल में देवों और असुरों के बीच लगातार 12 वर्षों तक संग्राम हुआ। ऐसा मालूम हो रहा था कि युद्ध में असुरों की विजय होने को है। दानवों के राजा ने तीनों लोकों पर कब्ज़ा कर स्वयं को त्रिलोक का स्वामी घोषित कर लिया था। दैत्यों के सताए देवराज इन्द्र गुरु बृहस्पति की शरण में पहुँचे और रक्षा के लिए प्रार्थना की। श्रावण पूर्णिमा को प्रातःकाल रक्षा-विधान पूर्ण किया गया।

इस विधान में गुरु बृहस्पति ने ऊपर उल्लिखित मंत्र का पाठ किया; साथ ही इन्द्र और उनकी पत्नी ने भी पीछे-पीछे इस मंत्र को दोहराया। इंद्र की पत्नी इंद्राणी ने सभी ब्राह्मणों से रक्षा-सूत्र में शक्ति का संचार कराया और इन्द्र के दाहिने हाथ की कलाई पर उसे बांध दिया। इस सूत्र से प्राप्त बल के माध्यम से इन्द्र ने असुरों को हरा दिया और खोया हुआ शासन पुनः प्राप्त किया।

रक्षा बंधन को मनाने की एक अन्य विधि भी प्रचलित है। महिलाएँ सुबह पूजा के लिए तैयार होकर घर की दीवारों पर स्वर्ण टांग देती हैं। उसके बाद वे उसकी पूजा सेवईं, खीर और मिठाईयों से करती हैं। फिर वे सोने पर राखी का धागा बांधती हैं। जो महिलाएँ नाग पंचमी पर गेंहूँ की बालियाँ लगाती हैं, वे पूजा के लिए उस पौधे को रखती हैं। अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधने के बाद वे इन बालियों को भाईयों के कानों पर रखती हैं।

कुछ लोग इस पर्व से एक दिन पहले उपवास करते हैं। फिर रक्षाबंधन वाले दिन, वे शास्त्रीय विधि-विधान से राखी बांधते हैं। साथ ही वे पितृ-तर्पण और ऋषि-पूजन या ऋषि तर्पण भी करते हैं।

कुछ क्षेत्रों में लोग इस दिन श्रवण पूजन भी करते हैं। वहाँ यह त्यौहार मातृ-पितृ भक्त श्रवण कुमार की याद में मनाया जाता है, जो भूल से राजा दशरथ के हाथों मारे गए थे।

इस दिन भाई अपनी बहनों तरह-तरह के उपहार भी देते हैं। यदि सगी बहन न हो, तो चचेरी-ममेरी बहन या जिसे भी आप बहन की तरह मानते हैं, उसके साथ यह पर्व मनाया जा सकता है।

रक्षा बंधन 2020

3 अगस्त

रक्षाबंधन अनुष्ठान का समय- 09:28 से 21:14

अपराह्न मुहूर्त- 13:46 से 16:26

प्रदोष काल मुहूर्त- 19:06 से 21:14

पूर्णिमा तिथि आरंभ – 21:28 (2 अगस्त)

पूर्णिमा तिथि समाप्त- 21:27 (3 अगस्त)

भद्रा समाप्त: 09:28

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