Sanskrit Diwas Essay Poem Speech in Sanskrit & Hindi संस्कृत दिवस पर निबंध कविता और भाषण

Sanskrit Diwas Essay Poem Speech in Sanskrit & Hindi Sanskrit Divas Par Essay Poem Speech Sanskrit or Hindi Mai संस्कृत दिवस पर निबंध कविता और भाषण : हमारे देश की सबसे प्राचीन भाषा संस्कृत है | संस्कृत भाषा को सभी आधुनिक भारतीय भाषाओं की जननी माना जाता हैं | सभी भारतीय भाषाओं की मां और भारत में बोली जाने वाली प्राचीन भाषाओं में से सबसे पहली भाषा के लिए संस्कृत दिवस Sanskrit Day मनाया जाता है | हिंदू कैलेंडर के अनुसार संस्कृत दिवस Sanskrit Diwas श्रवण पूर्णिमा को मनाया जाता है | पहली बार संस्कृत दिवस 1969 में मनाया गया था | वर्तमान समय में, संस्कृत भाषा का उपयोग केवल पूजा-पथ और अकादमिक गतिविधियों तक ही सीमित रह गया है इसलिए वैदिक भाषा को बढ़ावा देने के लिए संस्कृत दिवस के दिन विभिन्न गतिविधियां, संगोष्ठी और कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं | और आज हम इस लेख में Sanskrit Diwas Essay Poem Speech संस्कृत दिवस पर निबंध कविता और भाषण लेकर आये है | ये Sanskrit Diwas Par Essay Poem Speech Sanskrit or Hindi Mai कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए दिए गए है |

Sanskrit Diwas Essay Poem Speech in Sanskrit & Hindi

हमारे देश में मातृभाषा संस्कृत को सम्मान देने के लिए हर वर्ष श्रावण माह की पूर्णिमा के दिन संस्कृत दिवस मनाया जाता हैं | आपको बतादे की इस दिन हिंदुओ का मुख्य त्यौहार रक्षाबंधन भी होता हैं | इस वर्ष 2020 में संस्कृत दिवस 03 अगस्त को हैं | ऋषि-मुनियों को विस्तृत संस्कृत साहित्य के जनक माने जाते हैं | इसलिए संस्कृत दिवस, ऋषि पूर्णिमा के दिन भी मनाई जाती है | इस दिन सभी जिला और ब्लाक स्तर पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताओ का आयोजन किया जाता हैं | संस्कृत भाषा के विद्वान कवि और लेखक अपनी अपनी प्रस्तुती देते हैं | अगर आप अपने स्कूल के स्पीच प्रतियोगिता, डिबेट कम्पटीशन, कार्यक्रम या भाषण प्रतियोगिता के लिए Sanskrit Diwas Essay Poem Speech खोज रहे है तो आपको बतादे की यहाँ संस्कृत दिवस पर निबंध कविता और भाषण Sanskrit Diwas Short / Long Essay in Hindi Sanskrit Sanskrit Divas Par Kavita Poem Sanskrit Day Speech Simple & Easy Sanskrit Diwas Essay Poem Speech दिए गए है | इन Sanskrit Diwas Nibandh Kavita Bhashan को किसी भी सांस्कृतिक प्रतियोगिता परीक्षा व कार्यक्रम में प्रयोग कर सकते है |

Sanskrit Day Essay in Hindi Sanskrit Diwas Par Nibandh Hindi Me

संस्कृत भाषा भारत की सभ्यता और सुनहरे इतिहास का प्रतीक हैं | अगर आप संस्कृत दिवस पर निबंध हिंदी में संस्कृत दिवस हिंदी निबंध Sanskrit Day Essay in Hindi Sanskrit Diwas Par Nibandh Hindi Me तलाश कर रहे है तो आप यहाँ दिया हुआ Sanskrit Diwas Essay Nibandh in Hindi जरुर देखे |

संस्कृत देवभाषा है | विश्व की समस्त भाषाएँ इसी के गर्भ से उद्भूत हुई है | संस्कृत का तात्पर्य परिष्कृत, परिमार्जित,पूर्ण, एवं अलंकृत है और यह भाषा अति परिष्कृत एवं परिमार्जित है | वेदों की रचना इसी भाषा में होने के कारण इसे वैदिक भाषा भी कहते हैं | संस्कृत भाषा का प्रथम काव्य-ग्रन्थ ऋग्वेद को माना जाता है | किसी भी भाषा के उद्भव के बाद इतनी दिव्या एवं अलौकिक कृति का सृजन कहीं दृष्टिगोचर नहीं होता है | ऋग्वेद की ऋचाओं में संस्कृत भाषा का लालित्य, व्याकरण, व्याकरण, छंद, सौंदर्य, अलंकर अद्भुत एवं आश्चर्यजनक है | अलंकर इसका सौंदर्य है। अतः संस्कृत को पूर्ण भाषा का दर्जा दिया गया है | यह भाषा अपनी दिव्य एवं दैवीय विशेषताओं के कारण आज भही उतनी ही प्रासंगिक एवं जीवंत है | भाषा विज्ञानी इसे इंडो-इरानियन परिवार का सदस्य मानते है | इसकी प्राचीनता को ऋग्वेद के साथ जोड़ा जाता है | अन्य मूल भारतीय ग्रन्थ भी संस्कृत में ही लिखित है |

संस्कृत का प्राचीन व्याकरण पाणिनि का अष्टाध्यायी है | संस्कृत को वैदिक एवं क्लासिक संस्कृत के रूप में प्रमुखतः विभाजित किया जाता है | वैदिक संस्कृत में वेदों से लेकर उपनिषद तक की यात्रा सन्निहित है, जबकि क्लासिक संस्कृत में पौराणिक ग्रन्थ, जैसे रामायण, महाभारत आदि हैं | संस्कृत की इस समृद्धि ने पाश्चात्य विद्वानों को अपनी ओर आकर्षित किया | यह ग्रीक से अधिक पूर्ण है, लैटिन से अधिक समृद्ध और अन्य किसी भाषा से अधिक परिष्कृत है।” इसी कारण संस्कृत को सभी भाषाओँ की जननी कहा जाता है | संस्कृत को इंडो-इरानियन भाषा वर्ग के अंतर्गत रखा जाता है और सभी भाषाओँ की उत्पत्ति का सूत्रधार संस्कृत भाषा माना जाता है |

आज के समय में इस देवभाषा के सभी आयामो पर फिर अनुसन्धान कर आमजन में इसके प्रति जागृति लाने की आवश्यकता हैं | क्युकी यह मात्र एक भाषा न होकर भारतीय संस्कृति का पर्याय भी हैं | हमारी सभ्यता और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए हमे इस भाषा को अधिक महत्व देना चाहिए |

Sanskrit Diwas Essay Nibandh in Sanskrit

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सम्यक् परिष्कृतं शुद्धमर्थाद् दोषरहितं व्याकरणेन संस्कारितं वा यत्तदेव संस्कृतम् | एवञ्च सम्-उपसर्गपूर्वकात् कृधातोर्निष्पन्नोSयं शब्द संस्कृतभाषेति नाम्रा सम्बोध्यते | सैव देवभाषा गीर्वाणवाणी, देववाणी, अमरवाणी, गीर्वागित्यादिभिर्नामभिः कथ्यते | इयमेव भाषा सर्वासां भारतीयभाषाणां जननी, भारतीयसंस्कृतेः प्राणस्वरूपा, भारतीयधर्मदर्शनादिकानां प्रसारिका, सर्वास्वपि विश्वभाषासु प्राचीनतमा सर्वमान्या च मन्यते | अस्माकं समस्तमपि प्राचीनं साहित्यं संस्कृतभाषायामेव रचितमस्ति, समस्तमपि वैदिक साहित्यं रामायणं महाभारतं पुराणानि दर्शनग्रन्थाः स्मृतिग्रन्थाः काव्यानि नाटकानि गद्य-नीति-आख्यानग्रन्थाश्च अस्यामेव भाषायां लिखिताः प्राप्यन्ते | गणितं, ज्योतिषं, काव्यशास्त्रमायुर्वेदः, अर्थशास्त्रं राजनीतिशास्त्रं छन्दःशास्त्रं ज्ञान-विज्ञानं तत्वजातमस्यामेव संस्कृतभाषायां समुपलभ्यते | अनेन संस्कृतभाषायाः विपुलं गौरवं स्वमेव सिध्यति |

Sanskrit Diwas Slogan
ब्रह्मत्वं परिधायकिं करिष्यामि?
त्वं गृहाण, मोक्षरूपं विजयम्
मह्यं देहिछलरहितं मनुष्यत्वम्

Sanskrit Day Slogan
न त्वं ब्राह्मणवादी न वेदवादी न जातिवादी वा
नूनमभूस्त्वं ब्राह्मण सम-विश्वाभ्युदयवादी

Sanskrit Divas Slogan
न यो हिन्दुपक्षे न च तुर्कपक्षे
स निश्चप्रचं सत्यवक्ता कबीरा

Sanskrit Diwas Par Slogan
सुरस सुबोधा विश्वमनोज्ञा ललिता हृद्या रमणीया
अमृतवाणी संस्कृत भाषा नैव क्लिष्टा न च कठिणा

Sanskrit Diwas Poem in Sanskrit
आज्ञापालनमात्रनष्टविभवा: नो ते वयं किङ्करा:
ये नृत्यन्ति निरर्थकं तव कृते नो ते वयं किन्नरा:
ये कूर्दन्ति च रन्जितुं मनो न स्मो वयं वानरा:
चे जीवन्ति सदैव मानसहितं, राजन! वयं ते नरा:

Sanskrit Diwas Par Kavita
न सा निर्वर्णयति स्वकीयं रूपंदर्पणे/ चिरं/उपभोग-चिह्नानि
नखक्षतानि दन्तक्षतानि
विलोकयन्ती उपनेत्रं धृत्वा/ दैनन्दिन्यामङ्कयति
रजकस्य देयम् दुग्धस्य देयम्

Sanskrit Day Poem Kavita
माँ, माँ त्वम् संसारस्य अनुपम् उपहार
न त्वया सदृश्य कस्याः स्नेहम्
करुणा-ममतायाः त्वम् मूर्ति
न कोअपि कर्त्तुम् शक्नोति तव क्षतिपूर्ति
तव चरणयोः मम जीवनम् अस्ति
‘माँ’शब्दस्य महिमा अपार
न माँ सदृश्य कस्याः प्यार
माँ त्वम् संसारस्य अनुपम् उपहार

संस्कृत दिवस पर कविता पोएम संस्कृत में
अन्धः किमपि न द्रष्टुम् शक्तः, पंगुः क्वापि न चलितुम् शक्तः |
मूकः किमपि न वक्तुम् शक्तः, बधिरः श्रोतुम् भवत्यशक्तः ||
मूढः बोद्धूम् न भवति शक्तः, न चापि भीरुः योद्धुम् शक्तः |
शयने रोगी भावत्यशक्तः, दीनः किमपि न दातुम् शक्तः ||
वृद्धः न भारं वोढुम् शक्तः, ईर्ष्युः कमपि न सोढुम् शक्तः |
नैव धावितुम् स्थूलः शक्तः, लोभी शान्त्या स्वपितुमशक्तः ||
अलसः मूर्खः निद्रायुक्तः, कार्यम् किमपि न कर्तुम शक्तः |
सदैव मिथ्याचरणे शक्तः, नैव स सत्यं द्रष्टुम् शक्तः ||

Sanskrit Diwas Speech on Hindi Sanskrit Diwas Par Bhashan

संस्कृत भाषा हमारे देश की सबसे प्राचीन भाषा है | हमारी सभ्यता और संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने व लोगो को जागरुक करने के लिए संस्कृत दिवस मनाते है | संस्कृत दिवस पहली बार वर्ष 1969 में मनाया गया था | भारतीय कैलेंडर के अनुसार संस्कृत दिवस की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है | भारत देश के प्राचीन ग्रन्थ, वेद आदि की रचना संस्कृत में ही हुई थी | यह भाषा बहुत सी भाषा की जननी है | संस्कृत आज देश की कम बोले जानी वाली भाषा बन गई है, लेकिन इस भाषा की महत्ता को हम सब जानते है, इसके द्वारा ही हमें दूसरी भाषा सीखने बोलने में मदद मिली, इसकी सहायता से बाकि भाषा की व्याकरण समझ में आई | संस्कृत एक सुंदर भाषा है | इसने हमारे समाज को प्राचीन काल से समृद्ध किया है | संस्कृत समृद्ध भारतीय सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है और यही असली कुंजी है | संस्कृत दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य संस्कृत भाषा को बढ़ावा देना और आम जनता को शिक्षित करना है | इसे आम जनता के सामने लाया जाये, हमारी नयी पीढ़ी इस भाषा के बारे में जाने, और इसके बारे में ज्ञान प्राप्त करे | लोगों की सोच को बदलने के लिए इसे एक महत्वपूर्ण दिवस के रूप में मनाया जाता है |

धन्यवाद
संस्कृत दिवस की हार्दिक शुभकामना

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