Sawan Purnima Vrat Katha Puja Vidhi सावन का चौथा सोमवार श्रावण पूर्णिमा व्रत कथा व पूजा विधि

Sawan Purnima Vrat Katha Puja Vidhi Sawan Purnima 2020 Vrat Ki Vidhi Shravan Purnima Vrat Katha सावन के 5वे सोमवार श्रावण पूर्णिमा व्रत कथा व पूजा विधि : हिंदू धर्म ग्रंथों में श्रावण मास की पूर्णिमा को विशेष महत्व दिया गया है | वैसे तो पूर्णिमा का व्रत हर माह में रखा जाता है | लेकिन श्रावण पूर्णिमा व्रत का काफी अधिक महत्व बताया गया है | सावन में हर दिन भगवान शिव की विशेष पूजा करने का विधान है | लेकिन सावन माह की अंतिम तिथि यानी पूर्णिमा के दिन शिव पूजा और जलाभिषेक से विशेष पुण्य प्राप्त होता होता है | भारत में श्रावण पूर्णिमा को कई नामों से पुकारा जाता है | दक्षिण भारत में इसे नारियल पूर्णिमा और अवित्तम, मध्य भारत में इसे कजरी पूनम और गुजरात में पवित्रोपना के नाम से जाना जाता है | सावन महीने की पूर्णिमा का दिन शुभ व पवित्र माना जाता है | इस दिन किए गए तप और दान से विशेष फल की प्राप्ति होती है | यहाँ से आप श्रावण पूर्णिमा व्रत कथा पूजा विधि Sawan Purnima Vrat Katha Puja Vidhi के बारे में जान सकते है |

Sawan Purnima 2020 Vrat Katha Puja Vidhi

श्रावण पूर्णिमा की व्रत कथा व पूजा विधि Sawan Purnima Vrat Katha Puja Vidhi : धार्मिक ग्रंथों के अनुसार श्रावण पूर्णिमा को अत्याधिक शुभ और मंगलकारी माना जाता है | उत्तर भारत में श्रावण पूर्णिमा को रक्षाबंधन के रूप में मनाया जाता है | यह दिन भाई बहन के लिए विशेष माना जाता है | इस दिन बहने अपने भाई की कलाईयों पर राखी बांधती हैं और भाई उन्हें उनकी रक्षा करने का वचन देता है | वैसे तो पूर्णिमा का व्रत हर माह में रखा जाता है लेकिन श्रावण पूर्णिमा व्रत का काफी अधिक महत्व बताया गया है | Sawan Purnima Vrat वैदिक कार्यों को पूर्ण करने वाला माना जाता है | नारद पुराण के अनुसार श्रावण पूर्णिमा के दिन देवताओं , ऋषियों तथा पितरों का तर्पण करना चाहिए | अगर आप श्रावण पूर्णिमा व्रत कथा व पूजा विधि Sawan Purnima Vrat Katha Puja Vidhi की तलाश कर रहे है तो आपको बतादे की यहाँ भारतीय विद्वान व ज्योतिषाचार्य द्वारा की जाने वाली Sawan Purnima Vrat Katha Puja Vidhi लेकर आये है | श्रावण पूर्णिमा की व्रत कथा व पूजा विधि नियमानूसार करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है | इस पेज को स्क्रॉल कर Sawan Purnima Vrat Katha Puja Vidhi देख सकते है |

श्रावण पूर्णिमा व्रत कथा व पूजा विधि शुभ मुहूर्त

श्रावण पूर्णिमा 2020 में 03 अगस्त को है | इस बार सूर्योदय से पहले ही भद्रा समाप्त हो रही है इसलिये यह पूर्णिमा बहुत ही शुभ है |

श्रावण पूर्णिमा तिथि आरंभ – 09:31 PM (02 अगस्त 2020)
श्रावण पूर्णिमा तिथि समाप्त – 09:30 PM (03 अगस्त 2020)

श्रावण पूर्णिमा कथा Shravan Purnima Vrat Katha Sawan Purnima Vrat Katha Hindi Me

अगर आप श्रावण पूर्णिमा कथा Shravan Purnima Vrat Ki Katha खोज रहे है तो यहाँ आप कई दशको से कही / सुनी जाने वाली श्रावण पूर्णिमा कथा Sawan Purnima Vrat Katha पढ़ सकते है | यह श्रावण पूर्णिमा कथा आप पूजा के दौरान दौहरा सकते है |

पौराणि कथा के अनुसार एक नगर में एक तुंगध्वज नाम का राजा राज करता था | एक बार राजा जंगल में शिकार करते थक गया और वह बरगद के पेड़ के नीचे बैठ गया | वहां उसने देखा कि कुछ लोग भगवान सत्यनारायण की पूजा कर रहे हैं | राजा अपने घमंड में इतना चूर था कि वह सत्यानारायण भगवान की कथा में भी नही गया और न ही उसने भगवान को प्रणाम किया | गांव वाले उसके पास आए और उसे आदर से प्रसाद दिया | लेकिन राजा इतना घमंडी था कि उसने प्रसाद को नहीं खाया और प्रसाद छोड़कर चला गया | जब राजा अपनी नगरी पहुंचा तो उसने देखा कि दूसरे राज्य के राजा ने उसके राज्य पर हमला कर सब कुछ तहस- नहस कर दिया | जिसके बाद वह समझ गया कि यह सब भगवान सत्यनारयण के क्रोध के कारण ही हुआ है | वह वापस उसी जगह पहुंचा और ग्वालों से भगवान का प्रसाद मांगा और अपनी भूल की श्रमा मांगकर प्रसाद को ग्रहण किया | भगवान सत्यनारायण ने राजा को श्रमा कर दिया और सब कुछ पहले जैसी ही कर दिया | राजा ने काफी लंबे समय तक राजसत्ता को सुख भोगा और मरने के बाद उसे स्वर्गलोक की प्राप्ति हुई |
शास्त्रों के अनुसार जो भी व्यक्ति विधि पूर्वक भगवान सत्यनारयण का व्रत और कथा सुनता है उसे संसार के सभी सुखों की प्राप्ति होती है | उस व्यक्ति पर हमेशा माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है | वह व्यक्ति कभी भी निर्धन नही रहता है और न ही उसे किसी भी प्रकार की कोई परेशानी होती | सत्यानारायण भगवान की कथा सुनने वाले व्यक्ति को मरने के बाद बैकुंठ धाम की भी प्राप्ति होती है | इसलिए प्रत्येक मनुष्य को भगवान सत्यनाराण की कथा अवश्य सुननी चाहिए | जिससे भगवान सत्यनारायण की कृपा हमेशा प्राप्त होती रहे |

सावन सोमवार व्रत कथा Shravan Somvar Vrat Katha

किसी नगर में एक साहूकार रहता था | जिसके घर में धन की कमी नहीं थी लेकिन उसे संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ था | जिस कारण वह बहुत परेशान रहता था | पुत्र प्राप्ति की इच्छा से वह हर सोमवार व्रत भी रखता था और पूरी श्रद्धा के साथ शिव मंदिर जाकर भगवान शिव और पार्वती जी की अराधना करता था | उसकी भक्ति भाव से मां पार्वती प्रसन्न हो गईं और भगवान शिव से उस साहूकार की मनोरथ पूर्ण करने का आग्रह करने लगीं | पार्वती जी की इच्छा सुनकर भगवान शिव ने कहा कि ‘हे पार्वती, इस संसार में हर प्राणी को उसके कर्मों का फल मिलता है और जिसके भाग्य में जो है उसे भोगना पड़ता है |’ लेकिन पार्वती जी ने साहूकार की भक्ति का मान रखने के लिए उसकी मनोकामना पूर्ण करने के लिए कहा |
माता पार्वती के आग्रह पर शिवजी ने साहूकार को पुत्र-प्राप्ति का वरदान दिया लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इस बालक की उम्र केवल बारह वर्ष ही होगी | माता पार्वती और भगवान शिव की बातचीत को साहूकार सुन रहा था | जिसे सुनकर न तो उसे कोई खुशी थी और ना ही दुख | वह पहले की तरह ही शिवजी की पूजा करता रहा |
कुछ समय के बाद साहूकार को पुत्र की प्राप्ति हुई | जब वह बालक ग्यारह वर्ष का हुआ तो उसे पढ़ने के लिए काशी भेजा गया | साहूकार ने पुत्र के मामा को बुलाया और उसे बहुत सारा धन दिया और कहा कि तुम इस बालक को काशी विद्या प्राप्त करने के लिए ले जाओ और मार्ग में यज्ञ कराते जाना | जहां भी यज्ञ कराओ वहां ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा देते हुए जाना | दोनों मामा-भांजे इसी तरह यज्ञ कराते और ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देते हुए काशी की तरफ चल पड़े | रास्ते में एक नगर पड़ा जहां नगर के राजा की कन्या का विवाह था | लेकिन जिस राजकुमार से उसका विवाह होने था वह एक आंख से काना था | जिसकी जानकारी लड़की और उसके घरवालों को नहीं थी |
राजकुमार के पिता ने अपने पुत्र के काना होने की बात को छुपाने के लिए एक चाल सोची | साहूकार के पुत्र को देखकर उसने सोचा कि क्यों न इस लड़के को ही दूल्हा बनाकर राजकुमारी से विवाह करा दिया जाए | विवाह के बाद इसको धन देकर विदा कर दूंगा और राजकुमारी को अपने नगर ले आऊंगा | उसने लड़के को दूल्हे के वस्त्र पहनाकर राजकुमारी से उसका विवाह करा दिया | लेकिन साहूकार का पुत्र ईमानदार था | उसने मौका पाकर राजकुमारी की चुन्नी पर लिख दिया कि ‘तुम्हारा विवाह तो मेरे साथ हुआ है लेकिन जिस राजकुमार के साथ तुम्हें भेजा जाएगा वह एक आंख से काना है |
राजकुमारी ने चुन्नी पर लिखी बात अपने माता-पिता को बताई | राजा ने अपनी पुत्री को विदा नहीं किया। दूसरी ओर साहूकार का लड़का और उसका मामा काशी पहुंचे और वहां जाकर उन्होंने यज्ञ किया | जिस दिन लड़के की आयु 12 साल की हुई उसी दिन यज्ञ रखा गया | लड़के ने अपने मामा से कहा कि मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं है | मामा ने कहा कि तुम अंदर जाकर सो जाओ | शिवजी के वरदानुसार कुछ ही देर में उस बालक के प्राण निकल गए | मृत भांजे को देख उसके मामा ने विलाप शुरू किया | संयोगवश उसी समय शिवजी और माता पार्वती उधर से जा रहे थे | पार्वती ने भगवान से कहा- स्वामी, मुझे इसके रोने के स्वर सहन नहीं हो रहा | आप इस व्यक्ति के कष्ट को अवश्य दूर करें |
जब शिवजी मृत बालक के समीप गए तो वह बोले कि यह उसी साहूकार का पुत्र है, जिसे मैंने 12 वर्ष की आयु का वरदान दिया | अब इसकी आयु पूरी हो चुकी है | लेकिन मातृ भाव से विभोर माता पार्वती ने कहा कि हे महादेव, आप इस बालक को और आयु देने की कृपा करें अन्यथा इसके वियोग में इसके माता-पिता भी तड़प-तड़प कर मर जाएंगे। माता पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने उस लड़के को जीवित होने का वरदान दिया | शिवजी की कृपा से वह लड़का जीवित हो गया | शिक्षा समाप्त करके लड़का मामा के साथ अपने नगर की ओर चल दिया | दोनों चलते हुए उसी नगर में पहुंचे, जहां उसका विवाह हुआ था | उस नगर में भी उन्होंने यज्ञ का आयोजन किया | उस लड़के के ससुर ने उसे पहचान लिया और महल में ले जाकर उसकी खातिरदारी की और अपनी पुत्री को विदा किया |
इधर साहूकार और उसकी पत्नी भूखे-प्यासे रहकर बेटे के आने की प्रतीक्षा कर रहे थे | दोनों ने प्रण लिया था कि यदि उन्हें अपने बेटे की मृत्यु का समाचार मिला तो वह अपने शरीर त्याग देंगे परंतु अपने बेटे के जीवित होने की बात सुनकर वह बेहद प्रसन्न हुए | उसी रात भगवान शिव ने व्यापारी के सपने में आकर कहा- मैं तेरे सोमवार के व्रत करने और व्रत कथा सुनने से प्रसन्न होकर तेरे पुत्र को लम्बी आयु प्रदान कर रहा हूं | इसी प्रकार जो कोई सोमवार व्रत करता है या कथा सुनता है उसके सभी दुख दूर होते हैं |

श्रावण पूर्णिमा व्रत पूजा विधि Shravan Purnima Puja Vidhi

यदि आप श्रावण पूर्णिमा का व्रत करते है और श्रावण पूर्णिमा पूजा विधि Shravan Purnima Ki Puja Vidhi की तलाश कर रहे है तो यहाँ बताई गई Shravan Purnima Puja Vidhi से आप नियमानुसार विधि विधान से श्रावण पूर्णिमा व्रत पूजा सफलतापूर्वक कर सकते है |

  • श्रावण पूर्णिमा पर राखी बांधने को अधिक महत्व दिया जाता है | इसलिए इस दिन लाल या पीले रेशमी वस्त्र में सरसों, अक्षत, रखकर उसे लाल धागे में बांधकर पानी से सींचकर तांबे के बर्तन में रखें |
  • भगवान विष्णु, भगवान शिव सहित देवी-देवताओं, कुलदेवताओं की पूजा कर ब्राह्मण से अपने हाथ पर पोटली का रक्षासूत्र बंधवाना चाहिये |
  • ब्राह्मण देवता को भोजन करवाकर दान-दक्षिणा देकर उन्हें संतुष्ट करना चाहिये |
  • श्रावण पूर्णिमा के दिन देव, ऋषि, पितर आदि का तर्पण भी किया जाता है | इस दिन किसी पवित्र नदी में नहाकर पित्तरों का तर्पण अवश्य करें |
  • श्रावण पूर्णिमा के दिन गाय को चारा, चिटियों को बूरा और मछलियों को आटे की गोली बनाकर डालना अत्यंत शुभ होता है |
  • इस दिन किसी निर्धन व्यक्ति या किसी ब्राह्मण को दान अवश्य दें |
  • विधि विधान से यदि पूर्णिमा व्रत का पालन किया जाये वर्ष भर वैदिक कर्म न करने की भूल भी माफ हो जाती है |

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