शरद पूर्णिमा पर कविता और गीत

नमस्कार दोस्तों : rkalert.in परिवार की तरफ से शरद पूर्णिमा की हार्दिक सुभकामनाये | हम आप के लिय लेकर आये है वो कविताये और गीत जो आप  दोस्तों को सुन सकते है या मेसेज कर सकते है | इन कविताओ का शरद पूर्णिमा पर बहुत बड़ा महत्व है | शरद पूर्णिमा का यह पावन पर्व हिन्दुओ में बहुत ही महत्वपूर्ण और लोकप्रिय त्यौहार है | इस त्यौहार को हम वर्ष 2017 में 05 अक्टूबर को मानाने जा रहे है | मुख्य तय शरद पूर्णिमा का त्यौहार आश्विन मास की पूर्णिमा को आता है इसलिए इसे शरद पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।

Poem on Sharad Purnima 2017

शरद पूर्णिमा पर प्यार भरी कविता चाँद बहुत खिला था Love poem on Sharad Purnima

कल पिघलती हुई चांदनी में
देख कर अकेला मुझको तुम्हारा प्यार
आया चलकर मेरे पास था
चाँद बहुत खिला हुआ था
आज की बिखरती हुई चांदनी में
रुलाकर अकेला मुझको
तुम्हरी बेवफाई चलकर मेरे पास आई थी
चाँद पर इस तरह बेबसी छाई थी
कल मचलती हुई चांदनी में जगाकर अकेली मुझको

तुम्हारी याद चलकर मेरे पास आई थी

शरद पूर्णिमा पर कविता तुम्हारी जरुरत कहा रह जाती है poem on Sharad Purnima

शरद पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा की बादामी रात में अकेली में चाँद देखा करती हु
तुम्हारी जरुरत कहा रह जाती है चाँद जो होता पास मेरे
तुम सा पर मेरे साथ मुझे देखता सुनता मेरा चाँद
तुम्हारी जरुरत कहा रह जाती है
ढूढा करती हु मै सितारों को परन्तु
मदिव रूप में उनकी बिसात कहा रह जाती है
थोडा थोडा वैसा ही है जैसे चाँद जो होता पास मेरे
तो तुम्हारी जरुरत कहा रह जाती है |

शरद पूर्णिमा पर बेस्ट गीत चमकती रात में Best Song on Sharad Purnima

शरद पूर्णिमा की इस चमकती रात में
ये मेरा मन बहुत उदास रहता है
तुम उठो ना और चाँद से बाते करो

और मै कदर बहने लगती हु
इस नील आकाश की केशरिया चांदनी में
तब तुम मुझे बहुत याद आते हो
इन अपनी मीठी आँखों से शरद पूर्णिमा के गीत गाते हो

शरद पूर्णिमा पर कविता याद करती तुम्हें poem on Sharad Purnima

चांद नहीं कहता
तब भी मैं याद करती तुम्हें

चांद नहीं सोता
तब भी मैं जागती तुम्हारे लिए

चांद नहीं बरसाता अमृत
तब भी मुझे तो पीना था विष

चांद नहीं रोकता मुझे
सपनों की आकाशगंगा में विचरने से

फिर भी मैं फिरती पागलों की तरह
तुम्हारे ख्वाबों की रूपहली राह पर

चांद ने कभी नहीं कहा
मुझे कुछ करने से
मगर फिर भी
रहा हमेशा साथ
मेरे पास
बनकर विश्वास।

यह जानते हुए भी कि
मैं उसके सहारे
और उसके साथ भी

उसके पास भी
और उसमें खोकर भी
याद करती हूं तुम्हें

मैं और चांद दोनों जानते हैं कि
चांद बेवफा नहीं होता |

 

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