Shradh Piter Pooja 2017 पित्र दोष से मुक्ति के लिये कैसे करे पिंड दान

सबसे पहले हम बात करते हैं की श्राध क्यों मनाते हैं हमारे हिन्दू धर्म के ऐसी मानता की जो व्यक्ति मर जाता हैं उन में से कुछ पितृ बन जाते हैं जो मरने के बाद भी घर में ही रहते और समय समय पर उन को हर वस्तु उपलब्ध करवाये जाती हैं और इसी कारण से हर साल पितरो के लिये अलग से 16 दिनों तक केवल पितर पूजा ही चलती ये हमेशा आश्विन माह में कृष्ण पक्ष पूर्णिमा से शुरू होकर आमावस तक चलते हैं

Shradh 2017 Dates

पूर्णिमा तिथि का आरंभ समय 12.30 मिनट पर होगा. 6  सितंबर को प्रतिपदा का श्राद्ध है, समय 12.20 मिनट पर आरंभ होगी, 19 सितंबर को सुबह 11.42 मिनट के पश्चात अमावस्या तिथि प्रारंभ होगी.

pitru paksh 2017, क्या हैं पितृ दोष

मनुष्य लोक से ऊपर पितृ लोक है, पितृ लोक के ऊपर सूर्य लोक है एवं इस से भी ऊपर स्वर्ग लोक है|  आत्मा जब अपने शरीर को त्याग कर सबसे पहले ऊपर उठती है तो वह पितृ लोक में जाती है, वहाँ हमारे पूर्वज  मिलते हैं| अगर उस आत्मा के अच्छे पुण्य हैं तो ये हमारे पूर्वज भी उसको प्रणाम कर अपने को धन्य मानते हैं की इस अमुक आत्मा ने हमारे कुल में जन्म लेकर हमें धन्य किया| इसके आगे आत्मा अपने पुण्य के आधार  पर सूर्य लोक की तरफ बढती है| वहाँ से आगे, यदि और अधिक पुण्य हैं, तो आत्मा सूर्य लोक को बेध कर  स्वर्ग लोक की तरफ चली जाती है, लेकिन करोड़ों में एक आध आत्मा ही ऐसी होती है जो परमात्मा में समाहित  होती है|जिसे दोबारा जन्म नहीं लेना पड़ता हमारे ये ही पूर्वज सूक्ष्म  व्यापक शरीर से अपने परिवार को जब देखते हैं, और महसूस करते हैं कि हमारे परिवार के लोग ना तो हमारे प्रति श्रद्धा रखते हैं और न ही इन्हें कोई प्यार या स्नेह है और ना ही किसी भी अवसर पर ये हमको याद करते हैं, ना ही अपने ऋण चुकाने का प्रयास ही करते हैं  तो ये आत्माएं दुखी होकर अपने वंशजों  को श्राप दे देती हैं,जिसे “पितृ- दोष” कहा जाता है|

क्या सच में शांति मिलती पिंड दान से पितरो को

जी हा पिंड दान अगर हम सही तरीके से देते हैं तो हमारे पूर्वजो के पास पहुँच जाता हैं चाहे माध्यम कुछ भी हो जब आप पिंड दान करो तो सबसे उच्च स्थान हैं गया जी जहाँ पर पितरो को पूर्ण रूप से शांति मिल जाती जब आप गया जी में पूजा विधि के साथ 16 दिनों तक पिंड दान दे तो आप पूर्ण रूप से पितृ दोष से मुक्त हो जाते हो इस के बाद आप को कभी पिंड दान नही करना पड़ता हैं| इस के आलावा भी आप गंगा जी में भी कर सकते जहा तीन नदियों का संगम होता हैं आप वहा पर पितृ पूजा कर सकते हैं और अपने पितरो को खुश कर सकते हो |

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