Sri Sri Ravi Shankar Maharaj Biography in Hindi गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर जी महाराज का जीवन चित्रण शिक्षा और अनमोल विचार

Sri Sri Ravi Shankar Maharaj Biography All Books Sri Ravi Shankar family Sri Sri Ravi Shankar wife Sri Ravi Shankar net worth Sri Sri Ravi Shankar ashram Sri Ravi Shankar daughter Sri Ravi Shankar quotes Sri Ravi Shankar meditation Sri Ravi Shankar Biography  Ravi Shankar Maharaj All Books Sri. Through a myriad of programs and teachings, a network of organizations including the Art of Living and the International Association for Human Values, and a rapidly growing presence across 156 countries Sri has reached an estimated 450 million people. Sri Ravi Shankar is a globally revered spiritual and humanitarian leader. Sri Sri has developed unique impactful programs that empower, equip and transform individuals to tackle challenges at global, national, community and individual levels. He has spearheaded an unprecedented worldwide movement for a stress-free, violence-free society. Numerous honors have been bestowed upon Gurudev, including the highest civilian awards of Colombia, Mongolia and Paraguay. He is the recipient of the Padma Vibhushan, India highest annual civilian award and has also been conferred with 15 honorary doctorates from around the world.

Sri Sri Ravi Shankar Maharaj Biography in Hindi गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर जी महाराज का जीवन चित्रण शिक्षा और अनमोल विचार

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Born in 1956 in Southern India, Gurudev was a gifted child. By the age of four, he was able to recite the Bhagavad Gita, an ancient Sanskrit scripture, and was often found in meditation. He holds degrees in, both, Vedic literature and physics. In 1982, Gurudev entered a ten-day period of silence in Shimoga located in the Indian state of Karnataka. The Sudarshan Kriya, a powerful breathing technique, was born. With time, the Sudarshan Kriya became the center-piece of the Art of Living courses. Sri Sri Ravi Shankar is a spiritual guru of India who is a religious leader and founder of Art of Living Foundation. In 1981, through his Art of Living Foundation, he has taught many people of the country and abroad the art of being happy, which has affected the lives of millions of people. He has also been awarded the Padma Vibhushan in 2016 for his commendable work. He spread his message in many countries of the world and he has many followers all over the world. Let us introduce you to the biography and works of Sri Sri Ravi Shankar.

गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर जी : गुरुदेव श्री श्री रविशंकर एक मानवीय नेता, एक आध्यात्मिक गुरु और शांति के राजदूत है। उनकी दृष्टि एक तनाव मुक्त, हिंसा-मुक्त समाज ने लाखों लोगों को दुनिया पर सेवा परियोजनाओं और जीवन जीने की कला के पाठ्यक्रम के माध्यम से संयुक्त किया है।रवि शंकर एक आध्यामिक नेता एवं मानवतावादी धर्मगुरु हैं। उनके भक्त उन्हें आदर से श्री श्री के नाम से पुकारते हैं।

नाम : श्री श्री रविशंकर
जन्म : 13 मई 1956
माता का नाम : विसलक्षी रत्नम
पिता का नाम : वेंकट रत्नम्
गाँव : पापनासम
राज्य : तमिलनाडू

श्री श्री रवि शंकर महाराज की जीवनी : Sri sri ravi shankar Maharaj Biography

Ravi Shankar commonly known as Sri Sri Ravi Shankar is a spiritual leader and humanitarian religious leader globally. His devotees often call him “Sri Sri”. He is the founder of the Art of Living Foundation. Ravi Shankar was born on 13 May 1956 in the state of Tamil Nadu, India. His father’s name was Venkat Ratnam who was a linguist. His mother Mrs. Vishalakshi was a gentle woman. Taking inspiration from Adi Shankara, his father named him ‘Ravi Shankar’. Ravi Shankar was of spiritual instinct from the beginning. At the age of just four, he used to recite the Shlokas of the Srimad Bhagavad Gita. He started meditating as a child. His disciples say that he took an advanced degree in physics at the age of 17 Years .

रविशंकर का जन्म भारत के तमिलनाडु राज्य में 13 मई 1956 को हुआ। उनके पिता का नाम व वेंकट रत्नम् था जो भाषाकोविद् थे। उनकी माता श्रीमती विशालाक्षी एक सुशील महिला थीं। आदि शंकराचार्य से प्रेरणा लेते हुए उनके पिता ने उनका नाम रखा ‘रविशंकर’।

श्री श्री रवि शंकर महाराज का बचपन और शिक्षा ; Childhood and Education of Sri Sri Ravi Shankar Maharaj

श्री श्री रवि शंकर (Sri sri ravi shankar) एक प्रतिभावान बालक थे| चार वर्ष की आयु से ही वे भगवद्गीता, जोकि एक प्राचीन संस्कृत में लिखा धर्मग्रन्थ है, उसका व्याख्यान कर लेते थे| उनके पहले गुरु श्री सुधाकर चतुर्वेदी थे, जिनका महात्मा गाँधी के साथ बहुत लम्बा सहयोग रहा था| उन्होंने वैदिक साहित्य और भौतिक विज्ञान, दोनों में डिग्री प्राप्त की है|रविशंकर शुरू से ही आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे। बचपन में ही उन्होंने ध्यान करना शुरू कर दिया था। उनके शिष्य बताते हैं कि फीजिक्स में अग्रिम डिग्री उन्होंने 17 वर्ष की आयु में ही ले ली थी। रविशंकर पहले महर्षि महेश योगी के शिष्य थे। उनके पिता ने उन्हें महेश योगी को सौंप दिया था। अपनी विद्वता के कारण रविशंकर महेश योगी के प्रिय शिष्य बन गये। उन्होंने अपने नाम रविशंकर के आगे ‘श्री श्री’ जोड़ लिया जब प्रख्यात सितार वादक रवि शंकर ने उन पर आरोप लगाया कि वे उनके नाम की कीर्ति का इस्तेमाल कर रहे हैं।रविशंकर लोगों को सुदर्शन क्रिया सशुल्क सिखाते हैं। इसके बारे में वो कहते हैं कि 1982 में दस दिवसीय मौन के दौरान कर्नाटक के भद्रा नदी के तीरे लयबद्ध सांस लेने की क्रिया एक कविता या एक प्रेरणा की तरह उनके जेहन में उत्पन्न हुई। उन्होंने इसे सीखा और दूसरों को सिखाना शुरू किया।1982 में में श्री श्री रविशंकर ने आर्ट ऑफ लिविंग फाउण्डेशन की स्थापना की। यह शिक्षा और मानवता के प्रचार प्रसार के लिए सशुल्क कार्य करती है। 1997 में ‘इंटरनेशनल एसोसियेशन फार ह्यूमन वैल्यू’ की स्थापना की जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर उन मूल्यों को फैलाना है जो लोगों को आपस में जोड़ती है।

श्री श्री रवि शंकर महाराज की सुदर्शन -क्रिया : Sudarshan Kriya of Sri Sri Maharaj

सुदर्शन- क्रिया ‘आर्ट ऑफ लिविंग कोर्स का आधार है। जो लोग सुदर्शन क्रिया सीखने की इच्छा जताते हैं उन्हें एक समझौते पर हस्ताक्षर करना पड़ता है कि वे सुदर्शन क्रिया को किसी अन्य व्यक्ति को नहीं बताएंगे। सुदर्शन क्रिया के बारे में ऐसा कहा जाता है कि यह शरीर, मन और भावनाओं को ऊर्जा से भर देती है तथा उन्हें प्राकृतिक स्वरूप में ले आती है। इसे सिखाने के कोर्स की फीस हर देश में अलग-अलग है। अमेरिका में एक व्यक्ति से 375 डालर लिये जाते हैं। कालेज के विद्यार्थियों को कुछ छूट दी जाती है। इसके अलावा कुछ और संस्थाएं हैं जो श्री श्री रवि शंकर की देख-रेख में काम करती हैं जो निमन्वत हैं-

वेद विज्ञान विद्यापीठ

  • श्री श्री सेंटर फार मीडिया स्टडीज
  • श्री श्री कालेज और आयुर्वेदिक साइंस एण्ड रिसर्च
  • श्री श्री मोबाइल एग्रीकल्चरल इनिसिएटीव्स

शान्ति के दूत : PeaceFull messenger

शान्ति के दूत के रूप में श्री श्री रवि शंकर द्वंद्व समाधान में एक अहम् भूमिका अदा करते हैं, और अपने तनाव एवं हिंसा मुक्त समाज का सन्देश जनसभाओं और विश्व सम्मेलनों में प्रचारित करते हैं| निष्पक्ष और केवल शान्ति की कार्यावली रखने वाले समझे जाने वाले, आप झगड़े में फंसे लोगों के लिए आशा के प्रतीक हैं| श्री रवि शंकर महाराज को ख़ास श्रेय मिला है इराक, आइवरी कोस्ट, कश्मीर और बिहार में विरोधी पार्टियों को समझौते की बातचीत करने के लिए मनाने के लिए| श्री रवि शंकर महाराज को कर्नाटक सरकार द्वारा कृष्णदेवराय राज्याभिषेक की 500वी सालगिरह पर स्वागत कमेटी का सभापति निर्धारित किया गया| श्री श्री रवि शंकर अमरनाथ तीर्थस्थल समिति के सदस्य भी हैं |

श्री श्री रविशंकर को मिले सम्मान एवं पुरस्कार : Awards and honors to Shri Sri Ravi Shankar

  • नेशनल वेटरैन्स फाउंडेशन अवार्ड,अमेरिका, 2007
  • वर्षद कन्नडिगा, ईटीवी, 2007
  • आर्डर पोल स्टार 2006, मंगोलिया का सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार

कामयाबी के चार सूत्र : श्री श्री रविशंकर : Four Formulas of Success: Sri Sri Ravi Shankar

एक बुद्धिमान व्यक्ति के पास चार तकनीक होती है जो अंदर और ब्राह्य दोनो ही है जैसे – साम, दान, भेद और दंड।

1. साम : लोगों से व्यवहार के लिए बुध्दिमता पूर्ण जीवन जीने के लिए, पहली तकनीक साम है जिसका अर्थ है शांति और समझदारी भरा मार्ग।
२. दान : जब पहले वाली तकनीक काम ना करें तो आप दूसरी तकनीक पर जाये जिसे दान कहतें हैं, जिसका अर्थ है इसे होने देना, क्षमा कर देना, स्थान देना।
3. भेद : यदि लोग आपकी उदारता को नही पहचान पातें हैं तो तीसरी तकनीक भेद काम में आती है। इसका अर्थ है तुलना करना, दूरी उत्पन्न करना। यदि कोई व्यक्ति आपसे उलझता है तो पहले आप उस से बात करे। यदि इस से बात नहीं बने तो प्रेम से उनकी उपेक्षा कर दें। उन्हें स्वयं ही समझने का अवसर दें। आपकी उदारता और उपेक्षा उनको उनकी गलती का अनुभव करवा देगी।
4. दंड : लेकिन यदि वे उस पर ध्यान नहीं दे तो उनसे भेद कर लें और उनसे दूरी बना लें।यदि वहां पर दो व्यक्ति है तो आप उनमें एक के थोड़ा करीब हो जायें। ऐसा करने से दूसरा व्यक्ति अनुभव करने लगेगा। उसे अपनी गलती का अनुभव हो जायेगा। यदि अब भी कोई बात नही बनी तो अंतिम है, डंडा। यही चारों तरीके आप अपने स्वयं के साथ भी अपनायें। आंतरिक जीवन के लिये यह उसी तरह एक के बाद एक नही है। साम – समानता बनाना। यदि सुखद क्षण आ रहे तो उनको देखे। यदि दुखद क्षण आ रहें हैं तो उनको भी देखें। अपने में समानता रखे। दान का अर्थ छोड़ देना।

आर्ट ऑफ़ लिविंग फाउंडेशन – जीवन जीने की कला : योग और ध्यान (श्री श्री रवि शंकर जी महाराज )

  • व्यावहारिक उपकरण जैसे सुदर्शन क्रिया
  • अपनी पूरी क्षमता को अनलॉक करने के लिए योग और ध्यान
  • भारी तनाव से राहत के आसान तरीके और अपने जीवन के सभी पहलुओं को बढ़ाव देने
  • शरीर, मन और आत्मा को ठीक करने और संयोजन करने के लिए
  • मन की नकारात्मक भावनाओं को संभालने के लिए कौशल
  • रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए व्यावहारिक ज्ञान

द आर्ट ऑफ लिविंग एक बहु पक्षीय, बिना किसी लाभ वाली शैक्षिक और मानवतावादी गैर सरकारी संस्था है जो विश्व के दो तिहाई देशों में मौजूद है। परम पूज्य श्री श्री रविशंकर द्वारा 1982 में संस्थापित द आर्ट ऑफ लिविंग विश्व की सबसे बड़ी स्वयंसेवी संस्था है।संथापक की हिंसा रहित, तनाव रहित वसुदेव- कुटुम्बकम की दृष्टि से प्रेरित होकर संस्था मानवता के उद्धार और जीवन के स्तर में सुधार की बढ़ोत्तरी के कई पहल करने में लगी हुई है। संस्था का उद्देश्य है कि व्यक्तिगत, सामाजिक, राष्ट्र और सम्पूर्ण विश्व के स्तर पर शांति स्थापित करना। उसके कार्य क्षेत्र में द्वंद समाधान, आपदा और आघात में सहायता, गरीबी उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण, कैदियों का पुन:स्थापन, सबके लिए शिक्षा, महिला भ्रूण हत्या के खिलाफ अभियान और बाल श्रमिक और पर्यावरण की निरंतर स्थिरता सम्मिलित है।

श्री श्री का शांति का मार्गदर्शक सिध्दान्त : जब तक हमारा तनाव रहित मन और हिंसा रहित समाज नहीं होगा तो हम विश्व शांति को प्राप्त नहीं कर सकते। द आर्ट ऑफ लिविंग कई तनाव निष्कासन और स्वयं के विकास के लिए कार्यक्रम प्रस्तुत करता है जो अधिकांश स्वास तकनीक, ध्यान और योग पर आधारित है। इन कार्यक्रमों ने हजारों लोगों को विश्वभर में निराशा, हिंसा और आत्महत्या करने प्रवृत्ति से निकलने में मदद की है।

श्री श्री रविशंकर जी महाराज के 10 सुविचार / Shree Ravi Shankar ji Maharaj Famous Quotes

1. तुम दिव्य हो. तुम मेरा हिस्सा हो. मैं तुम्हारा हिस्सा हूँ.

2. यदि तुम लोगों का भला करते हो , तुम अपनी प्रकृति की वजह से करते हो .

3. स्वर्ग से कितना दूर? बस अपनी आँखें खोलो और देखो. तुम स्वर्ग में हो.

4. “आज” भगवान का दिया हुआ एक उपहार है- इसीलिए इसे “प्रेजेंट” कहते हैं.

5. श्रद्धा यह समझने में है कि आप हमेशा वो पा जाते हैं जिसकी आपकी ज़रुरत होती है.

6. मानव विकास के दो चरण हैं- कुछ होने से कुछ ना होना और कुछ ना होने से सबकुछ होना. यह ज्ञान दुनिया भर में योगदान और देखभाल ला सकता है.
7. दूसरों को सुनो फिर भी मत सुनो. अगर तुम्हारा दिमाग उनकी समस्याओं में उलझ जाएगा, ना सिर्फ वो दुखी होंगे, बल्कि तुम भी दुखी हो जओगे.

8. एक निर्धन व्यक्ति नया साल वर्ष में एक बार मनाता है. एक धनाड्य व्यक्ति हर दिन. लेकिन जो सबसे समृद्ध होता है वह हर क्षण मनाता है.

9. जीवन ऐसा कुछ नहीं है जिसके प्रति बहुत गंभीर रहा जाए. जीवन तुम्हारे हाथों में खेलने के लिए एक गेंद है. गेंद को पकड़े मत रहो.

10. अपने कार्य के पीछे की मंशा को देखो. अक्सर तुम उस चीज के लिए नहीं जाते जो तुम्हे सच में चाहिए.

श्री श्री रविशंकर महाराज के अनमोल विचार : Priceless idea for Shri Shri

A. सफलता के लिए बेचैन मत होइए। यदि आपका लक्ष्य साफ है और आप में आगे बढ़ने का धैर्य है तो प्रकृति भी आपकी मदद करेगी।

B. जहाँ भी सच्चाई और प्रतिभा है उसे पहचाना जाता है। इसमें कुछ वक्त लग सकता है। लेकिन हमें चाहिए कि हम धैर्य के साथ अपने जुनून के प्रति समर्पित रहें।

C. असफलता भविष्य में सफलता प्राप्त करने की अच्छी विधि है।

D. आध्यात्मक ज्ञान की शक्ति आपको केन्द्रीकरण प्रदान करती है जिससे आपको कार्य के प्रति जुनून प्राप्त होता है।

E. आध्यात्मिक ज्ञान आपकी अन्तज्र्ञान शक्ति, मौलिक शक्ति और संवाद क्षमता को बढ़ाता है।

F. जिंदगी गंभीर बने रहने के लिए नहीं है| जिंदगी तुम्हारे हाथों में खेलने के लिए एक गेंद की तरह है – तुम इस गेंद को पकड़े मत रहो|

G. न तो आप बहुत ज़्यादा लापरवाह रहें और न ही बेचैन हों। आपको बीच का रास्ता अपनाना चाहिए।

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