Sundar Pichai Biography Life Achievements Wife, Family and Profile सुन्दर पिचाई की आत्मकथा

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Sundar Pichai Biography Sundar Pichai Life Achievements सुन्दर पिचाई की आत्मकथा Sundar Pichai’s Autobiography

He was born as Pichai Sundararajan on 12 July 1972 in Madurai Tamil Nadu India. His father, Regunatha Pichai, worked as an electrical engineer for the British conglomerate GEC and managed a factory that made electrical components. His mother used to be a stenographer before having children.  He excelled academically at his school, Padma Seshadri Bala Bhavan and earned a seat in the Indian Institute of Technology in Kharagpur, one of the most prestigious engineering institutions in India. Sundar Pichai holds a B.Tech degree from the Indian Institute of Technology (IIT), Kharagpur. He also earned his MS degree from Stanford University and MBA degree from The Wharton School.He is married to Anjali Pichai and has two children a daughter and a son. Sundar Pichai says that if you want your life to be successful, learn to take risks and give up everything to achieve your goal. As much a study of the organization’s fascinating eco-system that allows experimentation innovation and progress to thrive Incisive and informative, as of the person chosen to head it, this book will inspire as much as it will inform.भारत मूल के सुन्दर पिचाई की आप बीती सुनिए कहा से कहा तक पहुंचा दिया मेहनत और लगन ने भारत में जन्मे एक छोटे से गाँव में एक साधारण से परिवार में जन्मा लड़का आज गूगल में सीईओ के पद पर कार्य कर रहा हें जानीय इस के सफलता के पीछे के राज | पिचाई सुंदर राजन’ अल्फाबेट कंपनी के ‘गूगल खोज’ नामक अनुभाग के सीईओ बने हैं। गूगल ने अपनी कंपनी का नाम अल्फ़ाबेट में बदल दिया. इसके बाद लेरी पेज ने गूगल खोज नामक कंपनी का सीईओ सुंदर पिचाई को बना दिया और स्वयं अल्फाबेट कंपनी के सीईओ बन गए।पद ग्रहण 2 अक्टूबर 2015 को किया।

Sundar Pichai life after joining Google सुन्दर पिचाई के प्रारंभिक जीवन के बारे में जानिए

To serve as a holding company and conglomerate to own the subsidiaries that were previously owned by Google, including a new slimmed down version of Google itself. In 2015, Google formed a company, Alphabet Inc. In this position he started appearing more often at Google presentations and continued rising up the ranks in Google.In 2008, Pichai was promoted to Vice President of product development. In 2013, Andy Rubin, the creator of Android, left to work on a different project.By 2012, he had become the Senior Vice President of Chrome and apps. Larry Page then made Pichai in-charge of Android as well. His influence continued to increase and he was made the Product Chief in October 2014.  In February 2016, he was awarded 273,328 shares of Google’s holding company Alphabet, which led to a rise in his net worth. These shares were worth $199 million, and this took his holdings up to $650 million. On 10 August 2015, Sundar Pichai was named the new CEO of Google. दुनिया में एक अलग पहचान बनाने वाले सुन्दर पिचाई (बचपन का नाम पिचाई सुंदराजन) का जन्म तमिलनाडु के छोटे से गाँव मदुरै में 12 जुलाई 1972 में हुआ था पिता का नाम रघुनाथ पिचाई और माता का नाम लक्ष्मी पिचाई प्रारंभिक शिक्षा अपने गाँव के सरकारी स्कूल में की और 10वीं और 12वीं की परीक्षा जवाहर विधालय, अशोक नगर चेन्नई पूरी की उमेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर से अपनी डिग्री अर्जित किया। अमेरिका में सुंदर ने एमएस की पढ़ाई स्टैनडफोर्ड यूनिवर्सिटी से की और वॉर्टन यूनिवर्सिटी से एमबीए किया। पिचाई को पेन्सिलवानिया यूनिवर्सिटी में साइबेल स्कॉलर के नाम से जाना जाता था।

Sundar Pichai  Chief Executive Officer (CEO) of Google

Full name Pichai Sundararajan, also known as Sundar Pichai
Date of birth July 12, 1972 (age 44)
Place of birth Madurai, Tamil Nadu, India
Residence  Los Altos Hills, California, U.S.
Nationality Indian-American
Citizenship United States
Occupation CEO of Google
Father Regunatha Pichai
Mother Lakshmi Pichai
Spouse/Partner Anjali Pichai

Sundar Pichai The struggle behind success सुंदर पिचाई को असली पहचान कब मिली

सुंदर पिचाई ने 2004 में गूगल ज्वाइन किया था।  सुंदर का पहला प्रोजेक्ट प्रोडक्ट मैनेजमेंट और इनोवेशन शाखा में गूगल के सर्च टूलबार को बेहतर बनाकर दूसरे ब्रॉउजर के ट्रैफिक को गूगल पर लाना था। इसी दौरान उन्होंने सुझाव दिया कि गूगल को अपना ब्राउजर करना चाहिए।   इसी एक आइडिया से वे गूगल के संस्थापक लैरी पेज की नजरों में आ गए। इसी आइडिया से उन्हें असली पहचान मिलनी शुरू हुई। 2008 से लेकर 2013 के दौरान सुंदर पिचाई के नेतृत्व में क्रोम ऑपरेटिंग सिस्टम की सफल लांचिंग हुई और उसके बाद एंड्रॉइड मार्केट प्लेस से उनका नाम दुनियाभर में हो गया।  सुंदर ने ही गूगल ड्राइव, जीमेल ऐप और गूगल वीडियो कोडेक बनाए हैं। सुंदर द्वारा बनाए गए क्रोम ओएस और एंड्रॉइड एप ने उन्हें गूगल के शीर्ष पर पहुंचा दिया। गूगल के अन्य व्यवसाय को आगे बढ़ाने में भी अपना योगदान दिया। पिचाई की वजह से ही गूगल ने सैमसंग को साझेदार बनाया।   लंबे समय तक एक एंप्लॉयी के रूप में काम करने वाले सुंदर पिचाई को गूगल ने अगस्त 2015 में सीईओ का पद सौंप दिया। पिछले साल सैलरी के रूप में US $200 मिलियन (करीब 13 अरब रुपए) दिया गया था.Then Google’s very own browser Google Chrome started. He led product management and found Google’s client software products Google Chrome and Chrome OS (operating system). In 2008 he was appointed as VP (vice president) of product development

Sundar Pichai a love story सुंदर पिचाई को भी किसी से प्यार हुआ था जानिए उन के प्यार के बारे में

सुंदर पिचाई जब इंजीनियरिंग की पढाई के दोरान एक लड़की से प्यार हो गया था लेकिन सुंदर पिचाई उसे प्रपोज मारने से डरते थे (पिचाई को काफी शर्मीला छात्र कहा जाता था) कही में अपने ल्क्षय से भटक तो नही रहा हो बस यहे ही सोचते रहते और धीरे धीरे वक्त बीतता गया और पिचाई ने अपने प्यार को दिल में दबाये रखे, और आखिर वो दिन आया जब सुन्दर ने उस लड़की को अपने दिल की बात कह दी फाइनल ईयर के दौरान ही सुंदर ने प्रपोज किया था। अब आप सोच रहें होंगे की आखिर वो लड़की कोन थी हम आप को बताते हें राजस्थान कोटा की रहने वाली अंजलि नाम की लड़की जो सुन्दर के साथ इंजीनियरिंग कॉलेज में सुन्दर की क्लास मेट थी | और आगे जाकर उसी लड़की को सुंदर पिचाई ने अपना जीवनसाथी बना लिया

सुंदर पिचाई को अपने जीवन में किन किन कठनाई का सामना करना पड़ा Inspirational story of beautiful pichai

आज में आप को एक सुंदर कहानी सुनाता हों । यह कहानी है फर्श पर सोने वाले युवा सुंदर की जो आज गूगल का सीईओ बनकर अर्श पर हैं। सुंदर की कामयाबी की कहानी किसी परिकथा से कम नहीं। उनके दो कमरों के एक मकान में शुरू होती हें पिता ब्रिटिश कंपनी जीईसी में इंजीनियर थे। उसमें सुंदर की पढ़ाई के लिए कोई अलग कमरा नहीं था। इसलिए वे ड्राइंग रूम के फर्श पर अपने छोटे भाई के साथ सोते थे। घर में न तो टेलीविजन था और न ही कार। इससे उनके परिवार की आर्थिक हैसियत का अनुमान लगाया जा सकता है लेकिन इंजीनियर पिता ने बचपन में अपने बेटे के मन में तकनीक के बीज बो दिए। सुंदर पिचाई को बहुत सी कठनाई का सामना करना पड़ा लेकिन उसने हार नही मानी और अपनी लगन और विश्वास से सफलता की सीडी पर चढ़ता गया सबसे ज्यादा परेशानी तब आई जब अमेरिका जाने के बाद उनके पास इतने पैसे नहीं होते थे कि वो इंडिया कॉल करके अपनी पत्नी अंजलि से और अपने परिवार से बात कर सकें। कई बार ऐसा होता था कि वे छह महीने तक बात नहीं कर पाते थे। सुंदर पिचाई खड़गपुर में आईआईटी कैंपस में स्टूडेंट्स से छात्रों से संवाद कर रहे हैं.थे तो उन्होंने एक बात कही थी एक सफल व्यक्ति की सफलता को मत देखो उस के पीछे का संघर्ष और बलिदान को देखो |

Learn how much salaries take Google’s CEO Sundar गूगल सीईओ सुंदर पिचाई जब भारत आये तो उन के द्वारा कही गई बातें और उन का अनुभव

  • मैंने स्कूल में हिन्दी सीखी लेकिन मैं ज्यादा बोल नहीं पाता था. मैं चेन्नई  से आया था. मैंने लोगों को बोलते हुए सुनता था. एक बार मैंने किसी को मेस में देखा जिसे बुलाने के लिए मैंने कहा. अबे साले. तब मैं समझ रहा था कि ऐसे ही बोला जाता है.
  • यहां लौटना बेहद शानदार है. तब कैमरा और फोन नहीं हुआ करते थे
  • यहां एडमिशन लेना आसान नहीं था. यह बेहद मेहनत का काम था
  • मैं यहीं पर अपनी पत्नी से मिला था. तब किसी के पास यूं चले जाना और बात करना आसान नहीं था
  • मेस में खाने को लेकर जो मजेदार सवाल जवाब किए जाते थे, उनमें से मेरा यह एक फेवरिट था. लोग पूछते थे कि बताओ यह दाल है या सांभर..
  • कुछ चीजें कभी नहीं बदलतीं लेकिन मैं यहां कैंपस में काफी ज्यादा बदलाव देखता हूं
  • भारत में डिजिटल मार्केट फल फूल रहा है. भारतीय कंपनियों को बड़ी चीजों पर फोकस करने की जरूरत है. निश्चित तौर पर भारत से जल्द ही कई ग्लोबल इनोवेशन देखने को मिलेंगी.
  • भारत में काफी ज्यादा टैलेंट मौजूद है.
  • हम उन चीजों पर काम करना चाहते हैं जिन्हें अरबों लोग प्रतिदिन इस्तेमाल करते हैं.
  • हो सकता है आप कभी कभी फेल भी हो जाएं. पर ठीक है. लैरी पेज कहा करते थे कि आपको बड़े काम करने का लक्ष्य रखना चाहिए. यदि आप फेल होते हैं तो भी आप कुछ ढंग का सृजित कर पाएंगे जिससे आप काफी कुछ सीखेंगे.
  • मैं युवाओं को रचनात्मकता पर फोकस करते हुए देखना चाहता हूं और चाहता हूं कि वे जोखिम लें.

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