Swami Vivekananda Wikipedia Biography History in Hindi स्वामी विवेकानन्द की जीवन कहानी / जीवन परिचय

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स्वामी विवेकानन्द वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे | बहुत से लोग स्वामी विवेकानन्द जी की जीवन कहानी लाइफ स्टोरी Swami Vivekanand Ke Bare Mein Jankari Details Information जानने के लिए ऑनलाइन सर्च करते है की Swami Vivekananda Kon The Swami Vivekananda Jivani Jivan Kahani, Swami Vivekananda Wikipedia Hindi Life Story, Swami Vivekananda Wikipedia Swami Vivekananda Biography, Swami Vivekananda History Swami Vivekananda Jivani Swami Vivekananda Jivan Parichay Jivan Kahani इत्यादि |

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Swami Vivekananda Ki Jivani Jivan Parichay स्वामी विवेकानंद की प्रेरक जीवनी

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Swami Vivekananda Wikipedia Jivani Life Story Biography History In Hindi : नरेन्द्र नाथ दत्त (swami vivekananda original name) जिन्हें आज पुरे विश्व में स्वामी विवेकानन्द के नाम से जानते है | अर्थात स्वामी विवेकानन्द का वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था | वे रामकृष्ण परमहंस (swami vivekananda guru name) के सुयोग्य शिष्य थे | और वे अपने गुरु रामकृष्ण देव से काफी प्रभावित थे | जिनसे उन्होंने सीखा कि सारे जीवो मे स्वयं परमात्मा का ही अस्तित्व हैं | इसलिए मानव जाति की सेवा द्वारा परमात्मा की भी सेवा की जा सकती है | स्वामी विवेकानन्द के गुरु रामकृष्ण की मृत्यु के बाद विवेकानंद ने बड़े पैमाने पर भारतीय उपमहाद्वीप का दौरा किया |

स्वामी विवेकानन्द ने अमेरिका स्थित शिकागो में 1893 में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था | विश्व धर्म महासभा के भाषण की शुरुआत “मेरे अमरीकी भाइयो एवं बहनो” के साथ करके उन्होंने इस प्रथम वाक्य ने सबका दिल जीत लिया था | स्वामी विवेकानन्द भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदान्त दर्शन अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में स्वामी विवेकानन्द की वक्तृता के कारण ही पहुँचा |

स्वामी विवेकानन्द ने संयुक्त राज्य अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोप में हिंदू दर्शन के सिद्धांतों का प्रसार किया व कई सार्वजनिक और निजी व्याख्यानों का आयोजन किया | इसलिए स्वामी विवेकानन्द को वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु के साथ -साथ एक देशभक्त संन्यासी के रूप में माना जाता है | इसलिए स्वामी विवेकानन्द के जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस National Youth Day के रूप में हर साल मनाया जाता है | स्वामी विवेकानन्द ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी जो आज भी अपना काम कर रहा है |

Ramakrishna Paramahamsa and Swami Vivekananda रामकृष्ण परमहंस के साथ विवेकानंद जी का रिश्ता

Short Biography of Swami Vivekananda History Wikipedia in Hindi स्वामी विवेकानंद की जीवनी / जीवन परिचय
पूरा नामनरेंद्रनाथ विश्वनाथ दत्त
जन्म दिनांक12 जनवरी 1863
जन्मस्थान कलकत्ता (पं. बंगाल)
पिता का नामविश्वनाथ दत्त
माता का नामभुवनेश्वरी देवी
वास्तविक नामनरेन्द्रनाथ दत्त
धर्महिन्दू
राष्ट्रीयताभारतीय
बचपन का नामवीरेश्वर
मठवासी बनने के बाद नामस्वामी विवेकानंद
भाई-बहन9
गुरु / शिक्षा का नामरामकृष्ण परमहंस
शिक्षा1884 मे बी. ए. परीक्षा उत्तीर्ण
संस्थापकरामकृष्ण मठ, रामकृष्ण मिशन
फिलोसिफीआधुनिक वेदांत, राज योग
दर्शनआधुनिक वेदांत, राज योग, भक्ति योग, कर्म योग, ज्ञान योग
साहत्यिक कार्यराज योग, कर्म योग, भक्ति योग, मेरे गुरु, अल्मोड़ा से कोलंबो तक दिए गए व्याख्यान
अन्य महत्वपूर्ण कामन्यूयार्क में वेदांत सिटी की स्थापना, कैलिफोर्निया में शांति आश्रम और भारत में अल्मोड़ा के पास ”अद्धैत आश्रम” की स्थापना।
कथन“उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाये”
स्वामी विवेकानन्द के हस्ताक्षर
मृत्यु तिथि 4 जुलाई, 1902
उम्र 39 वर्ष
मृत्यु स्थानबेलूर, पश्चिम बंगाल, भारत
Swami Vivekananda Date of Birth स्वामी विवेकानंद का जन्म कब हुआ

Swami Vivekananda Birth Date / Janm Dinank स्वामी विवेकानंद जन्म तिथि ( स्वामी विवेकानन्द का जन्म कब हुआ ): स्वामी विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी 1863 को कायस्थपरिवार में हुआ था | उन्होंने अपने जीवन में प्रगति कर भारत में वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु के रुप में पूजे जाने लगे | आज पूरा देश उनके जन्म दिवस को राष्ट्रीय युवा दिवस National Youth Day और स्वामी विवेकानन्द जयंती Swami Vivekananda Jayanti के रूप में मनाते है |

Swami Vivekananda Birth Place स्वामी विवेकानंद का जन्म कहाँ हुआ

स्वामी विवेकानन्द का जन्म स्थान ( स्वामी विवेकानन्द का जन्म कहाँ हुआ ) : स्वामी विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता के एक कुलीन बंगाली कायस्थपरिवार में हुआ था | उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन देश की सेवा में देकर आज देशभक्त संन्यासी के रूप में जाने जाते है |

स्वामी विवेकानन्द के बचपन की कहानी Swami Vivekananda Childhood Story

स्वामी विवेकानन्द को बचपन में उनके माता – पिता वीरेश्वर के नाम से पुकारते थे किन्तु उनका वास्तविक नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था | नरेन्द्रनाथ दत्त यानि की स्वामी विवेकानन्द बचपन से ही अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि और नटखट थे | वे अपने मित्रो के साथ खूब शरारत करते थे और मौका मिलने पर अपने अध्यापकों के साथ भी शरारत करने से नहीं चूकते थे | उनके घर में नियमपूर्वक रोज पूजा-पाठ होता था धार्मिक प्रवृत्ति की होने के कारण स्वामी विवेकानन्द जी की माता को पुराण,रामायण, महाभारत आदि की कथा सुनने व भजन-कीर्तन का बहुत शौक था |

परिवार के धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण के प्रभाव से स्वामी विवेकानन्द के मन में बचपन से ही धर्म एवं अध्यात्म के संस्कार गहरे होते गये | माता-पिता के संस्कारों और धार्मिक वातावरण के कारण उनके मन में बचपन से ही ईश्वर को जानने और उसे प्राप्त करने की लालसा दिखाई देने लगी थी | ईश्वर के बारे में जानने की उत्सुकता में कभी-कभी वे ऐसे प्रश्न पूछ बैठते थे कि इनके माता-पिता और कथावाचक पण्डितजी तक चक्कर में पड़ जाते थे |

Swami Vivekananda Mother & Father Name स्वामी विवेकानंद के माता पिता का नाम

स्वामी विवेकानन्द के माता पिता का नाम Swami Vivekananda Parents Name ( स्वामी विवेकानन्द के माता पिता का क्या नाम था ) : स्वामी विवेकानन्द के पिता का नाम विश्वनाथ नाथ था | वे कलकत्ता हाईकोर्ट के एक प्रसिद्ध वकील थे | स्वामी विवेकानन्द के दादा का नाम दुर्गाचरण दत्ता था वे संस्कृत और फारसी के विद्वान थे | स्वामी विवेकानन्द के दादा ने 25 की उम्र में अपने परिवार को छोड़कर साधु बन गए | स्वामी विवेकानन्द की माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था वह धार्मिक विचारों की महिला थीं | स्वामी विवेकानन्द की माताजी का अधिकांश समय भगवान शिव की पूजा-अर्चना में व्यतीत होता था | उन्हें पुराण,रामायण, महाभारत आदि की कथा सुनने और भजन-कीर्तन का बहुत शौक था |

Swami Vivekanand ke Shiksha Par Vichar

स्वामी विवेकानन्द की शिक्षा : स्वामी विवेकानन्द ने आठ साल की उम्र में यानि 1871 में ईश्वर चंद्र विद्यासागर के मेट्रोपोलिटन संस्थान में प्रवेश लिया | यहाँ से उनकी शिक्षा का आरम्भ हुआ | 1879 में वह एकमात्र छात्र थे जिन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज प्रवेश परीक्षा में प्रथम डिवीजन से पास हुए थे | स्वामी विवेकानन्द दर्शन, धर्म, इतिहास, सामाजिक विज्ञान, कला और साहित्य सहित विषयों के एक उत्साही पाठक थे | इनकी वेद, उपनिषद, भगवद् गीता, रामायण, महाभारत, पुराणों व अन्य हिन्दू शास्त्रों में गहन रूचि थी |

विवेकानन्द पश्चिमी तर्क, पश्चिमी दर्शन और यूरोपीय इतिहास का अध्ययन करने के लिए सन 1880 में जनरल असेम्बली इंस्टीट्यूशन में प्रवेश लिया | पश्चिम दार्शनिकों के अध्यन के साथ ही इन्होंने संस्कृत ग्रंथों और बंगाली साहित्य को भी सीखा | स्वामी विवेकानन्द को भारतीय शास्त्रीय संगीत में प्रशिक्षित किया गया | स्वामी विवेकानन्द शारीरिक व्यायाम व खेलों में भाग लिया करते थे | सन 1884 में स्वामी विवेकानन्द ने स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी | उसी वर्ष उनके पिता का स्वर्गवास हो गया था |

स्वामी विवेकानन्द की जीवन परिचय Swami Vivekanand Ka Jeevan Parichay in Hindi

स्वामी विवेकानंद डेविड ह्यूम, इमैनुएल कांट, जोहान गोटलिब फिच, बारूक स्पिनोज़ा, जोर्ज डब्लू एच हेजेल, आर्थर स्कूपइन्हार , ऑगस्ट कॉम्टे, जॉन स्टुअर्ट मिल और चार्ल्स डार्विन के कामों का अध्ययन किया | उन्होंने स्पेंसर की किताब एजुकेशन का सन 1860 बंगाली में अनुवाद किया | स्वामी विवेकानन्द ने 1886 में वराहनगर मठ की स्थापना कर जनवरी 1887 में सन्यासि बन भारत की और से विदेशो में धर्म महासभा का प्रतिनिधितत्व कर भारतीय संस्कृति की सुगंध विदेशों में बिखेरनें लगे | विलियम हेस्टी (महासभा संस्था के प्रिंसिपल) ने लिखा की, नरेंद्र वास्तव में एक जीनियस है, मैंने काफी विस्तृत और बड़े इलाकों में यात्रा की है लेकिन उनकी जैसी प्रतिभा वाला का एक भी बालक कहीं नहीं देखा यहाँ तक की जर्मन विश्वविद्यालयों के दार्शनिक छात्रों में भी नहीं” |

Swami Vivekananda Chicago Speech स्वामी जी की अमेरिका यात्रा और शिकागो भाषण (1893 विश्व धर्म सम्मेलन) 

स्वामी विवेकानन्द का योगदान तथा महत्व

Swami Vivekananda Contribution And Importance Swami Vivekananda ka yogadan mahatw : इस आर्टिकल में आपको स्वामी विवेकानन्द का जीवन परिचय बता रहे है कि स्वामी विवेकानन्द ने उन्तालीस वर्ष के जीवनकाल में जो काम कर गए वे आने वाली अनेक शताब्दियों तक पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे | स्वामी विवेकानन्द केवल सन्त ही नहीं, वे एक महान देशभक्त, वक्ता, विचारक, लेखक और मानव-प्रेमी भी थे | अमेरिका से लौटकर उन्होंने देशवासियों का आह्वान करते हुए कहा था “नया भारत निकल पड़े मोची की दुकान से, भड़भूँजे के भाड़ से, कारखाने से, हाट से, बाजार से निकल पडे झाड़ियों, जंगलों, पहाड़ों, पर्वतों से” |

गान्धीजी को आजादी की लड़ाई में जो जन-समर्थन मिला, वह विवेकानन्द के आह्वान का ही फल था | इस प्रकार वे भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के भी एक प्रमुख प्रेरणा के स्रोत बने | स्वामी विवेकानन्द जी का कथन था “उठो, जागो, स्वयं जागकर औरों को जगाओ, अपने नर-जन्म को सफल करो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाये” |

Swami Vivekanand History in Hindi
  • तीस वर्ष की आयु में स्वामी विवेकानन्द ने शिकागो, अमेरिका के विश्व धर्म सम्मेलन में हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किया और उसे सार्वभौमिक पहचान दिलाई | गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने कहा था की “यदि आप भारत को जानना चाहते हैं तो विवेकानन्द को पढ़िये | उनमें आप सब कुछ सकारात्मक ही पायेंगे, नकारात्मक कुछ भी नहीं” |
  • रोमां रोलां ने उनके बारे में कहा था की “उनके द्वितीय होने की कल्पना करना भी असम्भव है, वे जहाँ भी गये, सर्वप्रथम ही रहे | सब पर प्रभुत्व प्राप्त कर लेना ही उनकी विशिष्टता थी | एक बार हिमालय प्रदेश में एक अनजान यात्री उन्हें देख ठिठक कर रुक गया और आश्चर्यपूर्वक चिल्ला उठा | यह ऐसा हुआ की मानो उस व्यक्ति के आराध्य देव ने अपना नाम उनके माथे पर लिख दिया हो |
  • उन्नीसवीं सदी के आखिरी वर्षोँ में विवेकानन्द सशस्त्र / हिंसक क्रान्ति के जरिए देश को आजाद करना चाहते थे लेकिन उन्हें जल्द ही यह विश्वास हो गया था कि परिस्थितियाँ उन इरादों के लिये अभी परिपक्व नहीं हैं | इसके बाद ही विवेकानन्द ने ‘एकला चलो‘ की नीति का पालन करते हुए एक परिव्राजक के रूप में भारत और दुनिया को खंगाल डाला | उन्होंने कहा था कि मुझे बहुत से युवा संन्यासी चाहिये जो भारत के गाँव – गाँव शहर – शहर जाकर देशवासियों की सेवा में जुट जाए | लेकिन उनका यह सपना पूरा नहीं हुआ | स्वामी विवेकानन्द पुरोहितवाद, धार्मिक आडम्बरों, कठमुल्लापन और रूढ़ियों के सख्त खिलाफ थे | स्वामी विवेकानन्द का अपने देश की धरोहर के लिये दम्भ / बड़बोलापन नहीं थे |
Death of Swami Vivekananda स्वामी विवेकानन्द की मृत्यु

Swami Vivekananda Death Date स्वामी विवेकानन्द की मृत्यु दिनांक ( स्वामी विवेकानन्द की मृत्यु कब हुई ) : 4 जुलाई 1902 को महज 39 साल की उम्र में स्वामी विवेकानंद की मृत्यु हो गई | उनके शिष्यों के अनुसार स्वामी विवेकानंद जीवन के अन्तिम दिन ( 4 जुलाई 1902 ) की दिनचर्या भी बदली | नित्य दिनचर्या की भांति उस दिन भी उन्होंने अपनी ध्यान करने की दिनचर्या को नहीं बदला और प्रात: दो तीन घण्टे ध्यान किया और ध्यानावस्था में ही अपने ब्रह्मरन्ध्र को भेदकर महासमाधि ले ली | उन्होंने अपनी भविष्यवाणी को सही साबित किया की वे 40 साल से ज्यादा नहीं जियेंगे |

इस महान पुरुषार्थ वाले महापुरूष का अंतिम संस्कार बेलूर में गंगा तट पर चन्दन की चिता पर किया गया था | और इसी गंगा तट के दूसरी ओर उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस का सोलह वर्ष पूर्व अन्तिम संस्कार हुआ था | उनके शिष्यों और अनुयायियों ने उनकी स्मृति में वहाँ एक मन्दिर बनवाया और समूचे विश्व में विवेकानन्द तथा उनके गुरु रामकृष्ण के सन्देशों के प्रचार के लिये 130 से अधिक केन्द्रों की स्थापना की |

Swami Vivekananda Journey स्वामी विवेकानन्द जी की यात्राए

स्वामी विवेकानन्द केवल सन्त ही नहीं बल्कि एक महान देशभक्त, वक्ता, विचारक, लेखक और मानव-प्रेमी भी थे | उन्होंने विदेशो यात्रा कर कर लोगो को दर्शन, धर्म, इतिहास, सामाजिक विज्ञान, कला और साहित्य सहित अनेक विषयों पर लोगो को जागरुक किया | स्वामी विवेकानन्द जी की यात्राओ का विवरण / मतवपूर्ण तिथियाँ निचे दी गई है | इस सारणी में आप स्वामी विवेकानन्द की जन्म दिनांक, स्वामी विवेकानन्द द्वारा की गई यात्राओ की दिनांक व स्थान स्वामी विवेकानन्द की मृत्यु की दिनांक का विश्लेषण दिया गया है |

Swami Vivekananda Travel Date & Place List
12 जनवरी 1863स्वामी विवेकानन्द का जन्म
1879प्रेसीडेंसी कॉलेज कलकत्ता में प्रवेश
1880जनरल असेम्बली इंस्टीट्यूशन में प्रवेश
नवम्बर 1881रामकृष्ण परमहंस से प्रथम भेंट
1882 To 1886रामकृष्ण परमहंस से सम्बद्ध
1884स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण
1884स्वामी विवेकानन्द के पिता का स्वर्गवास
1885रामकृष्ण परमहंस की अन्तिम बीमारी
16 अगस्त 1886रामकृष्ण परमहंस का निधन
1886वराहनगर मठ की स्थापना
1890-93परिव्राजक के रूप में भारत-भ्रमण
25 दिसम्बर 1892कन्याकुमारी में
13 फ़रवरी 1893प्रथम सार्वजनिक व्याख्यान सिकन्दराबाद में
31 मई 1893मुम्बई से अमरीका रवाना
25 जुलाई 1893वैंकूवर, कनाडा पहुँचे
30 जुलाई 1893शिकागो आगमन
अगस्त 1893हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रो॰ जॉन राइट से भेंट
11 सितम्बर 1893विश्व धर्म सम्मेलन, शिकागो में प्रथम व्याख्यान
27 सितम्बर 1893विश्व धर्म सम्मेलन, शिकागो में अन्तिम व्याख्यान
16 मई 1894हार्वर्ड विश्वविद्यालय में संभाषण
नवंबर 1894न्यूयॉर्क में वेदान्त समिति की स्थापना
जनवरी 1895न्यूयॉर्क में धार्मिक कक्षाओं का संचालन आरम्भ
अगस्त 1895पेरिस में
अक्टूबर 1895लन्दन में व्याख्यान
6 दिसम्बर 1895वापस न्यूयॉर्क
22-25 मार्च 1896फिर लन्दन
मई-जुलाई 1896हार्वर्ड विश्वविद्यालय में व्याख्यान
15 अप्रैल 1896वापस लन्दन
मई-जुलाई 1896लंदन में धार्मिक कक्षाएँ
28 मई 1896ऑक्सफोर्ड में मैक्समूलर से भेंट
30 दिसम्बर 1896नेपाल से भारत की ओर रवाना
15 जनवरी 1897कोलम्बो, श्रीलंका आगमन
जनवरी, 1897रामनाथपुरम् (रामेश्वरम) में जोरदार स्वागत एवं भाषण
6-15 फ़रवरी 1897मद्रास में
19 फ़रवरी 1897कलकत्ता आगमन
1 मई 1897रामकृष्ण मिशन की स्थापना
मई-दिसम्बर 1897उत्तर भारत की यात्रा
जनवरी 1898कलकत्ता वापसी
19 मार्च 1899मायावती में अद्वैत आश्रम की स्थापना
20 जून 1899पश्चिमी देशों की दूसरी यात्रा
31 जुलाई 1899न्यूयॉर्क आगमन
22 फ़रवरी 1900सैन फ्रांसिस्को में वेदान्त समिति की स्थापना
जून 1900न्यूयॉर्क में अन्तिम कक्षा
26 जुलाई 1900योरोप रवाना
24 अक्टूबर 1900विएना, हंगरी, कुस्तुनतुनिया, ग्रीस, मिस्र आदि देशों की यात्रा
26 नवम्बर 1900भारत रवाना
9 दिसम्बर 1900बेलूर मठ आगमन
10 जनवरी 1901मायावती की यात्रा
मार्च-मई 1901पूर्वी बंगाल और असम की तीर्थयात्रा
जनवरी-फरवरी 1902बोध गया और वाराणसी की यात्रा
मार्च 1902बेलूर मठ में वापसी
4 जुलाई 1902स्वामी विवेकानन्द की मृत्यु ( महासमाधि )

A to Z Alphabet Wise Tiranga Name DP Photo Picture Image [तिरंगा फोटो नाम वाला]

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