Happy Teej Sindhara Festivel 2018 तीज और सिंधारा के त्योंहार पर घेवर बनाने की विधि

Teej Sindhara Festival 2018 : Sindhara is a bucket of gift which is sent to the daughter and her in-laws by the parents of married girl. Sindhara contains homemade sweets, Ghewar (घेवर), Henna, bangles etc. Due to custom of gifting Sindhara to the daughter and her in-laws during this Teej, Hariyali Teej is also known as Sindhara Teej.

Happy Sindhara Festival 2018 Wishes in Hindi

The Women,s are Very Excited for Teej & Sinjara Festivel in Savan Month. The Sinjara Festival will Celebrate 12 August . Sinjara Festivel on sent to Ghever ,Malpuve and other materials newlyweds and newly married women . According to the scriptures, Shravan is considered the month of Lord Shiva’s worship. On this day women wear new clothes and gather in one place. After this he either enjoys hanging swings in any garden and then he makes a hinge with a rope tied on a tree in someone’s house. During the swinging, they sang the Mangal song .

Indian Festival Sinjara Teej

Every indian festivals is a treat for indian women they enjoy every festivals with happiness and pride as every festivals is incomplete without INDIAN women today Indian women celebrate the IMPORTANT festival called SINJARA n TEEJ a 2 day long festival celebrated all around in Hindu family’s. this is very important festival for married and unmarried females… Hindu mythological significance of this festival is that after a long separation, Goddess Parvati reunited with her husband Lord Shiva. She gave a boon to this day that whoever do worship of Goddess Parvati on this day, Goddess Parvati will fulfill his/her wishes. Parents of married women send “Sinjara” gift to their daughters on the day before Teej. Sinjara is a gift package which includes make-up stuff symbolizing her Suhaag (coverture), i.e. bindi, vermilion, mehandi or henna, bangles; Ghevar (a special disc shaped sweet), and Lahariya (a multi-color sari with zigzag pattern). After receiving those gifts from the parents home, a married lady decorates herself with henna, various ornaments, wears Lahariya sari and enjoy Teej fair with her husband, in-laws and relatives.

Sindhara Dooj Ka Mahatva

सिंजारा तीज 2018 : सिंजारा मुख्‍य रूप से महिलाओं का त्‍यौहार है, इस दिन सभी सुहागन स्त्रियां व कुँवारी कन्यायें भी अपना श्रंगार करती है इस दिन बेटी के मायके वाले और ससुराल वाले भी अपनी बेटी व बहू को सोलह श्रंगार का सामान मिठाई और वस्त्र देते है जो कुँवारी कन्याये होती है उन्हें भी माता पिता नये वस्त्र कढ़े और मिठाई खिलाते है यह परम्परा सदियों से चली आ रही है कहा जाता है हिमाचल प्रदेश में आज भी पार्वती जी के मायके से उनके लिये सिंधारा भेजा जाता है ऐसा माना जाता है कि सिंधारा दोज मनाने से बहू बेटी सुहाग व सम्पनता से भरपूर रहती है सिंधारा दौज को Sowbhagya Dooj, Preethi Dwitiya, Sthanya Vriddhi और Gauri Dwitiya के नाम से भी जाना जाता है।

Sindhara song in Hindi

महीना आया सावन का सिंधारा मनाएंगे
चूड़े और चुनड़ी से मैया को सजायेंगे

श्रद्धा के फूलों से झूला सजाया है
हौले हौले मैया को झूला झुलायेंगे

चांदी की चौकी पर मैया को बिठाकर के
हाथों और पावों में मेहँदी लगाएंगे

चाँद और तारों से चुनड़ी सजाई है
लाल चुनड़ी लाये है उढ़ाकर ही जायेंगे ।

देर ना करो मैया भक्तों ने पुकारा ह झूला सजा बैठे हे,आज तुमको झुलायेंगे ।

जय माँ वेष्णु देवी की |

राजस्थानी घेवर बनाने की विध‍ि –

सावन मैं तीज ,सिंधारा और राखी के त्यौहार की विशेष मिठाई घेवर है | सावन के महीने मैं घेवर की सबसे अधिक खरीददारी होती हैं सावन महीने अं घेवर खाना भुत ही फल दाई होता हैं इसलिय आज हम आपको घेवर बनाने की पूरी विधि बताने जा रहे हैं इसकी सहायता से आप अपने घर पर भी घेवर बना सकते हैं |

घेवर बनाने के लिये स्पेशल कढ़ाई प्रयोग में लाई जाती है जिसका तला समतल होता है, जो करीब 12 इंच गहराई और 5-6 इंच चौड़ाई की होती है. बाजार में घेवर बनाने के लिये तो समतल तले की बड़ी कढ़ाई होती है और उसमें छ्ह इंच उंचे बेलनाकार गोले डाले जाते हैं, घी भरी कढाई में ये गोले पड़े रहते हैं और इन्हीं गोलों में घोल डाल कर घेवर तला जाता हैं, घेवर घर पर सामान्य भगोनी या घर की कढ़ाई में बहुत अच्छी तरह से बनाया जा सकता है.

घेवर बनाने के लिए आवश्यक सामग्री –
मैदा – 250 ग्राम (2 कप)
घी – 50 ग्राम ( 1/4 कप)
दूध – 50 ग्राम (1/4 कप)
पानी – 800 ग्राम ( 4 कप)
घी या तेल – घेवर तलने के लिये

चाशनी बनाने के लिये

चीनी – 400 ग्राम( 2 कप)
पानी – 200 ग्राम (1 कप)]

तीज ,सिंधारा पर घेवर बनाने विधि –

सबसे पहले मैदा छान कर किसी बर्तन में निकाल लीजिये, घी को किसी बड़े बर्तन में डाल लीजिये और बर्फ डालकर हाथ से फैटिये, फैंटते फैंटते घी की जब क्रीम जैसी बन जाय तब बर्फ के टुकड़े निकाल कर हटा दीजिये और घी को एक दम चिकनी क्रीम बनने तक फैट लीजिये, अब इसमें मैदा थोड़ी थोड़ी डालते जाइये और फैटते जाइये, गाढ़ा होने पर दूध मिला दीजिये और थोड़ा थोड़ा पानी डाल कर खूब फैटिये, मैदा डालते जाइये, सारी मैदा डालकर अच्छी तरह मिलाइये और फैटिये और चिकना गाढ़ा बैटर बना लीजिये, अब बैटर में थोड़ा थोड़ा पानी डालिये और घोल को खूब फैटिये, घोल में कोई गुठली न रहे और घोल एकदम चिकना हो जाय. घेवर बनाने के लिये घोल तैयार है. घोल की कन्सिस्टेन्सी एकदम पतली हो कि चमचे से घोल गिराने पर पतली धार से गिरे |कढ़ाई में करीब आधा से कम ऊचाई तक घी भर कर गरम कीजिये, घी अच्छी तरह गरम होने पर यानी मैदा की कोई भी बूंद घी में गिरे तो वह तुरन्त ऊपर उठकर तैरने लगे. मैदा का घोल किसी चमचे में भर कर बहुत ही पतली धार से इस गरम घी में डालिये, घोल डालने पर घी से उठे झाग ऊपर दिखाई देने लगते हैं|

दूसरा चमचा घोल डालने के लिये 1-2 मिनिट रुकिये, घी के ऊपर झाग खतम होने दीजिये, अब फिर से दूसरा चमचा घोल भरकर बिलकुल पतली धार से घोल घी में डालिये, आप देखेंगे कि घी फिर से झाग से भर जाता है, झाग खतम करने के लिये फिर से 1-2 मिनिट रुकिये |आप जितना बड़ा घेवर बनाना चाहते हैं उसके हिसाब से उतना घोल आप भगोने में डालेंगे, घोल को भगोने के बीच में डाला जाता है, यह घोल नीचे तले में जाता और तैर कर वापस ऊपर आता है और पहली परत के ऊपर पहुंच कर परत बनाता है, यदि घेवर में बीच में जगह न रहे तो आप किसी चमचे की पतली डंडी या तान से बीच से घोल हटाकर थोड़ी जगह बना सकते है इसी जगह से घोल को डालते रहिये जब तक घेवर का आकार सही न हो जाय | जब पर्याप्त घोल डाल चुके तब गैस की फ्लेम मीडियम कर दीजिये, अब आप घेवर को मीडियम आग पर हल्का ब्राउन होने तक सिकने दीजिये |

जब घेवर ऊपर से हल्का ब्राउन दिखने लगे तब घेवर को निकाल कर थाली में रखिये (घेवर को निकालने के लिये किसी लकड़ी या स्टील की पतली छड़, या कलछी को ऊपर से उलटा पकड़ कर उसका प्रयोग किया जा सकता है) घेवर निकाल कर जिस थाली में रख रहे हैं उसके ऊपर एक और प्लेट रख लीजिये, ताकि घेवर से निकला घी उस थाली में इकठ्ठा हो जाय, या थाली को तिरछा कर दीजिये ताकि अतिरिक्त घी थाली में नीचे की ओर निकल कर आ जाय.

सारे घेवर तल कर आप इसी तरह तैयार करके थाली में घेवर एक ऊपर एक रख लीजिये.

घेवर को मीठा करने के लिये 2 तार की चीनी की चाशनी तैयार कीजिये :

किसी बर्तन में चीनी में 1 कप पानी डाल कर गैस फ्लेम पर चाशनी बनने रखिये, उबाल आने के बाद 5-6 मिनिट तक पकाइये, चाशनी को चम्मच से लेकर एक बूंद किसी प्लेट में गिराइये, ठंडा होने पर उंगली और अंगूठे के बीच चिपका कर देखिये, वह उंगली और अंगूठे के बीच चिपकनी चाहिये, चाशनी में 2 तार बनने चाहिये, चाशनी तैयार हो गई है.

चाशनी को इतना ठंडा कीजिये कि उसे हाथ से छू सके और एक थाली लीजिये, थाली के ऊपर एक प्याली रख लीजिये, एक घेवर लेकर प्याली के ऊपर रखिये और चाशनी को चमचे से घेवर के ऊपर सारी सतह पर डालिये, चाशनी घेवर को मीठा करती हुई नीचे निकल जाती है, आपको घेवर ज्यादा या कम जैसा मीठा करना हो उसके हिसाब से चाशनी डालते जाइये. एक एक करके सारे घेवर जो आपने बनाये हैं वे मीठे कर लीजिये, अगर घेवर से चाशनी निकल रही हो तो जिस थाली में मीठे घेवर रख रहें उस थाली को तिरछा रखिये ताकि अतिरिक्त चाशनी निकल कर थाली में नीचे की ओर इकठ्ठी हो जाय, या घेवर के नीचे कोई प्लेट रख लीजिये थोड़ी ही देर में घेवर से अतिरिक्त चाशनी निकल जाती है ये घेवर हवा में 1 घंटे सूखने दीजिये, अब आपके मीठे घेवर तैयार हैं, आप इन्हैं अभी तो खा ही सकती हैं, और बचे हुये घेवर एअर टाइट कन्टेनर में भर कर रख लीजिये, 2 सप्ताह तक कन्टेनर से घेवर निकालिये और खाइये.

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