Tulsi Vivah Katha in Hindi Tulasi Vivah Ki Kahani Katha Mantra तुलसी विवाह की सम्पूर्ण कथा कहानी व मंत्र

Tulsi Vivah Katha Kahani Mantra in Hindi Tulasi Vivah Ki Kahani. Tulasi Vivah Ki Katha Tulsi Vivah Hindi Me Katha Kahani Mantra. तुलसी विवाह की सम्पूर्ण कथा कहानी व मंत्र : हर साल कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की एकादशी. अर्थात देवउठनी एकादशी तिथि के दिन तुलसी माता का विवाह भगवान शालिग्राम के साथ पूर्ण विधि-विधान से किया जाता है | और यहाँ से आप तुलसी विवाह की कहानी कथा मंत्र Tulsi Vivah Katha Kahani Mantra हिंदी में पढ़ सकते है | इन Tulsi Vivah Katha Kahani को तुलसी विवाह के समय जरुर सुने और सुनाए |

Tulsi Vivah Katha Kahani Mantra in Hindi

प्रामाणिक पौराणिक तुलसी विवाह कथा कहानी व मंत्र Tulsi Vivah Katha Kahani

तुलसी विवाह देव उठनी ग्यारस का पर्व इस साल 26 नवंबर गुरुवार को है | अगर आप तुलसी विवाह के समय सुनी व बोली जाने वाली कथा कहानी व मंत्र Tulsi Vivah Katha Kahani खोज रहे है | तो आपको बतादे की इस लेख में आप तुलसी विवाह से जुड़ी बहुत प्रचलित Tulsi Vivah Katha Kahani प्रस्तुत / शेयर की गई है | यहाँ तुलसी विवाह की 3 प्रामाणिक पौराणिक कथा कहानी लेकर आये है | आइये पढ़ते है Tulsi Vivah Katha Kahani Mantra in Hindi.

तुलसी विवाह कथा – 1 : Tulsi Vivah Ki Katha Kahani Hindi Main

Tulsi Vivah Katha Kahani : जलंधर नाम का एक पराक्रमी असुर था | जिसका विवाह वृंदा नाम की कन्या से हुआ | वृंदा भगवान विष्णु की परम भक्त थी और पतिव्रता थी | इसी कारण जलंधर अजेय हो गया | अपने अजेय होने पर जलंधर को अभिमान हो गया और वह स्वर्ग की कन्याओं को परेशान करने लगा | दुःखी होकर सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में गए और जलंधर के आतंक को समाप्त करने की प्रार्थना करने लगे |

भगवान विष्णु ने अपनी माया से जलंधर का रूप धारण कर लिया और छल से वृंदा के पतिव्रत धर्म को नष्ट कर दिया | इससे जलंधर की शक्ति क्षीण हो गई और वह युद्ध में मारा गया | जैसे ही वृंदा का सतीत्व भंग हुआ, जलंधर का सिर उसके आंगन में आ गिरा। जब वृंदा ने यह देखा तो क्रोधित होकर जानना चाहा कि फिर जिसे उसने स्पर्श किया वह कौन है | सामने साक्षात विष्णु जी खड़े थे |

जब वृंदा को भगवान विष्णु के छल का पता चला तो उसने भगवान विष्णु को पत्थर का बन जाने का शाप दे दिया | देवताओं की प्रार्थना पर वृंदा ने अपना शाप वापस ले लिया | लेकिन भगवान विष्णु वृंदा के साथ हुए छल के कारण लज्जित थे | अतः वृंदा के शाप को जीवित रखने के लिए उन्होंने अपना एक रूप पत्थर रूप में प्रकट किया जो शालिग्राम कहलाया |

भगवान विष्णु को दिया शाप वापस लेने के बाद वृंदा जलंधर के साथ सती हो गई | वृंदा के राख से तुलसी का पौधा निकला | वृंदा की मर्यादा और पवित्रता को बनाए रखने के लिए देवताओं ने भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप का विवाह तुलसी से कराया | इसी घटना को याद रखने के लिए प्रतिवर्ष कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन तुलसी का विवाह शालिग्राम के साथ कराया जाता है |

तुलसी विवाह कथा – 2 : Tulsi Vivah Katha Kahani in Hindi

Tulsi Vivah Katha Kahani : प्राचीन काल में जलंधर नामक राक्षस बड़ा वीर तथा पराक्रमी था | उसकी वीरता का रहस्य था, उसकी पत्नी वृंदा का पतिव्रता धर्म | उसी के प्रभाव से वह विजयी बना हुआ था | जलंधर के उपद्रवों से परेशान देवगण भगवान विष्णु के पास गए तथा रक्षा की गुहार लगाई |

उनकी प्रार्थना सुनकर भगवान विष्णु ने वृंदा का पतिव्रता धर्म भंग करने का निश्चय किया | उन्होंने जलंधर का रूप धर कर छल से वृंदा का स्पर्श किया | वृंदा का पति जलंधर, देवताओं से पराक्रम से युद्ध कर रहा था लेकिन वृंदा का सतीत्व नष्ट होते ही मारा गया | जलंधर का सिर उसके आंगन में आ गिरा |

जब वृंदा को भगवान विष्णु के छल का पता चला तो उसने भगवान विष्णु को शाप दे दिया | ‘जिस प्रकार तुमने छल से मुझे पति वियोग दिया है | उसी प्रकार तुम्हारी पत्नी का भी छलपूर्वक हरण होगा और स्त्री वियोग सहने के लिए तुम भी मृत्यु लोक में जन्म लोगे | यह कहकर वृंदा अपने पति के साथ सती हो गई | वृंदा के शाप से ही प्रभु श्रीराम ने अयोध्या में जन्म लिया और उन्हें सीता वियोग सहना पड़ा़ |

Tulsi Vivah 2020 Date And Time तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त – यहाँ देखे

3 – तुलसी विवाह कथा : Tulsi Shaligram Vivah Katha Kahani

Tulsi Vivah Katha Kahani : एक बार शिव ने अपने तेज को समुद्र में फैंक दिया था | उससे एक महातेजस्वी बालक ने जन्म लिया | यह बालक आगे चलकर जालंधर के नाम से पराक्रमी दैत्य राजा बना | इसकी राजधानी का नाम जालंधर नगरी था | जालंधर का विवाह दैत्यराज कालनेमी की कन्या वृंदा से हुआ | जालंधर महाराक्षस था | अपनी सत्ता के मद में चूर उसने माता लक्ष्मी को पाने की कामना से युद्ध किया |

समुद्र से ही उत्पन्न होने के कारण माता लक्ष्मी ने उसे अपने भाई के रूप में स्वीकार किया | वहां से पराजित होकर वह देवी पार्वती को पाने की लालसा से कैलाश पर्वत पर गया | भगवान शिव का ही रूप धर कर माता पार्वती के समीप गया, परंतु मां ने अपने योगबल से उसे तुरंत पहचान लिया तथा वहां से अंतर्ध्यान हो गईं | देवी पार्वती ने क्रुद्ध होकर सारा वृतांत भगवान विष्णु को सुनाया |

जालंधर की पत्नी वृंदा अत्यन्त पतिव्रता स्त्री थी | उसी के पतिव्रत धर्म की शक्ति से जालंधर न तो मारा जाता और न ही पराजित होता था | इसीलिए जालंधर का नाश करने के लिए वृंदा के पतिव्रत धर्म को भंग करना बहुत ज़रूरी था | इसी कारण भगवान विष्णु ऋषि का वेश धारण कर वन में जा पहुंचे, जहां वृंदा अकेली भ्रमण कर रही थीं | भगवान के साथ दो मायावी राक्षस भी थे, जिन्हें देखकर वृंदा भयभीत हो गईं |

ऋषि ने वृंदा के सामने पल में दोनों को भस्म कर दिया | उनकी शक्ति देखकर वृंदा ने कैलाश पर्वत पर महादेव के साथ युद्ध कर रहे अपने पति जालंधर के बारे में पूछा | ऋषि ने अपने माया जाल से दो वानर प्रकट किए | एक वानर के हाथ में जालंधर का सिर था तथा दूसरे के हाथ में धड़ | अपने पति की यह दशा देखकर वृंदा मूर्छित हो कर गिर पड़ीं | होश में आने पर उन्होंने ऋषि रूपी भगवान से विनती की कि वह उसके पति को जीवित करें |

भगवान ने अपनी माया से पुन: जालंधर का सिर धड़ से जोड़ दिया, परंतु स्वयं भी वह उसी शरीर में प्रवेश कर गए | वृंदा को इस छल का ज़रा आभास न हुआ | जालंधर बने भगवान के साथ वृंदा पतिव्रता का व्यवहार करने लगी, जिससे उसका सतीत्व भंग हो गया | ऐसा होते ही वृंदा का पति जालंधर युद्ध में हार गया | इस सारी लीला का जब वृंदा को पता चला, तो उसने क्रुद्ध होकर भगवान विष्णु को शिला होने का श्राप दे दिया तथा स्वयं सती हो गईं | जहां वृंदा भस्म हुईं, वहां तुलसी का पौधा उगा |

भगवान विष्णु ने वृंदा से कहा, ‘हे वृंदा, तुम अपने सतीत्व के कारण मुझे लक्ष्मी से भी अधिक प्रिय हो गई हो | अब तुम तुलसी के रूप में सदा मेरे साथ रहोगी | जो मनुष्य शालिग्राम रूप के साथ तुलसी का विवाह करेगा उसे इस लोक और परलोक में विपुल यश प्राप्त होगा |

Tulsi Vivah Mantra शालिग्राम-तुलसी विवाह के मंगलाष्टक मंत्र

Tulsi Vivah Katha Kahani Mantra : अगर आप के जीवन में अमंगल या अप्रिय घटनाएं घटित हो रही है और आप उनसे मुक्ति पाना चाहते है तो देव उठनी ग्यारस के दिन शालिग्राम व तुलसी के विवाह में इन मंगलाष्टक मंत्रों का पाठ करके अन्न, बल, धन, सुख के साथ जीवन के सारे अमंगल भी दूर होने लगेंगे | लेकिन ध्यान रहे इन मंत्रो का उच्चारण एक कटोरी में थोड़े से चावल को हल्दी में पीले कर तुलसी विवाह विधिवत पूजन करने के बाद इन मंत्रों का उच्चारण करें | उच्चारण पूर्ण होने के बाद तुलसी-शालिग्राम जी पर सभी अमंगल दूर होने के भाव से अर्पित करें |

ॐ श्री मत्पंकजविष्टरो हरिहरौ, वायुमर्हेन्द्रोऽनलः। चन्द्रो भास्कर वित्तपाल वरुण, प्रताधिपादिग्रहाः।
प्रद्यम्नो नलकूबरौ सुरगजः, चिन्तामणिः कौस्तुभः, स्वामी शक्तिधरश्च लांगलधरः, कुवर्न्तु वो मंगलम्॥

Tulsi Vivah Mantra

गंगा गोमतिगोपतिगर्णपतिः, गोविन्दगोवधर्नौ, गीता गोमयगोरजौ गिरिसुता, गंगाधरो गौतमः।
गायत्री गरुडो गदाधरगया, गम्भीरगोदावरी, गन्धवर्ग्रहगोपगोकुलधराः, कुवर्न्तु वो मंगलम्॥

************************

नेत्राणां त्रितयं महत्पशुपतेः अग्नेस्तु पादत्रयं, तत्तद्विष्णुपदत्रयं त्रिभुवने, ख्यातं च रामत्रयम्।
गंगावाहपथत्रयं सुविमलं, वेदत्रयं ब्राह्मणम्, संध्यानां त्रितयं द्विजैरभिमतं, कुवर्न्तु वो मंगलम्॥

************************

बाल्मीकिः सनकः सनन्दनमुनिः, व्यासोवसिष्ठो भृगुः, जाबालिजर्मदग्निरत्रिजनकौ, गर्गोऽ गिरा गौतमः।
मान्धाता भरतो नृपश्च सगरो, धन्यो दिलीपो नलः, पुण्यो धमर्सुतो ययातिनहुषौ, कुवर्न्तु वो मंगलम्॥

************************

गौरी श्रीकुलदेवता च सुभगा, कद्रूसुपणार्शिवाः, सावित्री च सरस्वती च सुरभिः, सत्यव्रतारुन्धती।
स्वाहा जाम्बवती च रुक्मभगिनी, दुःस्वप्नविध्वंसिनी, वेला चाम्बुनिधेः समीनमकरा, कुवर्न्तु वो मंगलम्॥

तुलसी विवाह मंत्र

गंगा सिन्धु सरस्वती च यमुना, गोदावरी नमर्दा, कावेरी सरयू महेन्द्रतनया, चमर्ण्वती वेदिका।
शिप्रा वेत्रवती महासुरनदी, ख्याता च या गण्डकी, पूर्णाः पुण्यजलैः समुद्रसहिताः, कुवर्न्तु वो मंगलम्॥

************************

लक्ष्मीः कौस्तुभपारिजातकसुरा, धन्वन्तरिश्चन्द्रमा, गावः कामदुघाः सुरेश्वरगजो, रम्भादिदेवांगनाः।
अश्वः सप्तमुखः सुधा हरिधनुः, शंखो विषं चाम्बुधे, रतनानीति चतुदर्श प्रतिदिनं, कुवर्न्तु वो मंगलम्॥

************************

ब्रह्मा वेदपतिः शिवः पशुपतिः, सूयोर् ग्रहाणां पतिः, शुक्रो देवपतिनर्लो नरपतिः, स्कन्दश्च सेनापतिः।
विष्णुयर्ज्ञपतियर्मः पितृपतिः, तारापतिश्चन्द्रमा, इत्येते पतयस्सुपणर्सहिताः, कुवर्न्तु वो मंगलम्॥

Dev Uthani Ekadashi FB Whatsapp Status देव उठानी एकादशी की शुभकामनाएं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.