महर्षि वाल्मीकि जयंती महोत्सव पवित्र ग्रंथ रामायण के रचियता

\महर्षि वाल्मीकि वैदिक काल के ऋषियों में से एक महान ऋषि थे | जिन्होंने संस्कृत भाषा में महान ग्रंथ रामायण की रचना की थी | महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण को वाल्मीकि रामायण भी कहते है | हिन्दू धर्म का यह महान ग्रंथ ( रामायण ) भगवन श्रीराम के जीवन पर आधारित है | देवी सीता ने उनके आश्रम शरण ली थी और उनके जुड़वां पुत्र कुशा और लव जो भी महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में पैदा हुए थे | यह ग्रंथ भगवन श्रीराम के कर्तव्य का परिचय करवाता है | ‘रामायण‘ के रचियता वाल्मीकिजी को महर्षि वाल्मीकि ऐसे ही नहीं कहा गया है क्यों की वाल्मीकिजी एक महान तपस्वी थे | एक बार की बात है की वाल्मीकि महाराज तपस्या में बेठे थे | वाल्मीकिजी को यहाँ तक पता नहीं चला की उनके शारीर पर बाँबी ने अपना बिल बना लिया है | इसलिए जब वाल्मीकि को दीमक से बहार निकले तो उन्हें दीमक वाल्मीकि कहने लगे हैं |

महर्षि वाल्मीकि जयंती  Mharshi Valmiki Jayanti 2019

महर्षि बाल्मीकि की जयंती को लोग बड़ी धूम धाम से मानते है | इस दिन शोभा यात्रा निकली जाती है | महर्षि वाल्मीकि ने जिस ग्रन्थ की रचना की है उसमे हर व्यक्ति सत के मार्ग पर चलने की राह दिखाई है | इस महाकाव्य में प्रेम, त्याग, तप व यश की भावनाओं को महत्व दिया गया है | कहा जाता है की वाल्मीकि मंदिर में बड़े धूम धाम से पूजा अर्चना की जाती है |और झाकियां निकाली जाती हैं व राम भजन होता है| उनकी मूर्तियों पर माल्यार्पण करके उनको श्रद्धासुमन अर्पित किए जाता है |

महर्षि वाल्मीकि जयंती महोत्सव दिन और दिंनाक

गुरुवार  13 अक्टूबर 2019 के दिन महर्षि वाल्मीकि जयंती महोत्सव मनाया जायेगा |

महर्षि वाल्मीकी का जीवन इतिहास Life history of Maharishi Valmiki

बताया गया ही की महर्षि बनने से पहले वाल्मीकि का असल नाम रत्नाकर था | रत्नाकर अपने परिवार को पलने के लिए लुट पाट किया करते थे | एक बार जब वे लुट पाट कर रहे थे तो उन्हें निर्जन वन में नारद मुनि मिल गए तब नारदजी ने रत्नाकर से पूछा की तुम ये तुच्छ कार्य करते हो या अपने परिवार को पलने के लिए यह अपराध करते हो क्या वे सब इन पापो के भागीदार बनने को तैयार है | तब जाकर रत्नाकर ने सोचा की यह तो बिल्कुल सही बात है | तब जाकर रत्नाकर ने नारद मुनि के पैर पकड लिए और लुट पाट का जीवन छोड़ कर रत्नाकर तपस्या में लीन हो गए | तभी नारद मुनि ने उन्हें सत्य का ज्ञान करवाया | नारद मुनि ने रत्नाकर से राम -राम नाम जपने को कहा परन्तु रत्नाकर ऐसा उचारण नहीं कर पाए तो उन्हें मरा-मरा जपने को कहा मरा मरा जपते जपते यही राम हो गया | इस नाम को रटते-रटते वह ऋषि वाल्मीकि बन गया |

क्या है वाल्मीकि रामायण | what is Valmiki Ramayana

बताया जाता है की एक बार महर्षि वाल्मीकि नदी के किनारे पर बेठे हुए क्रौंच पक्षी के जोड़े को देख रहे थे | वह जोड़ा अपनी पूर्ण प्रेम लीला में व्यस्थ था |इसी जोड़े में से किसी नर पक्षी को सीकारी ने मार दिया | मादा पक्षी विलाप करने लगी | इस विलाप को सुनकर महर्षि वाल्मीकि के मुह से स्वत: ही मां निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः।  यत्क्रौंचमिथुनादेकम् अवधीः काममोहितम्।। नामक श्लोक निकल पड़ा जो आज महाकाव्य रामायण की आधार शीला बन गया |

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