वन्दे मातरम् गीत के रचियता शब्द साधन बोल हिंदी अर्थ राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता ऐतिहासिक तथ्यों की जानकारी

वन्दे मातरम् गीत की रचना प्रसिद्ध उपन्यासकार बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय ने 19वीं शताब्दी के अन्त में किया था | इस प्रसिद्ध उपन्यासकार ने बंगाल के मुस्लिम शासकों के क्रूरता और उनके व्यवहार के विरोध में “आन्नद मठ ” नामक एक उपन्यास लिखा था । बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय ने पहली बार वंदे मातरम् गीत लिखा जो पूरे एक पृष्ठ का था। इस गीत में मातृभूमि की प्रशंसाकी गई थी। चट्टोपाध्याय ने संस्कृत और बंगाली से शब्दों का उपयोग करते हुए ये गीत सबसे पहले संस्कृत और बंगला भाषा में प्रकाशित किया था। वन्दे मातरम् गीत अनेक लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है । इस गीत इतिहास एक सौ वर्ष से भी अधिक पुराना है। सबसे पहले इस गीत का प्रकाशन 1882 में हुआ था और इस वन्दे मातरम् गीत को सर्वप्रथम 7 सितम्बर 1905 के कांग्रेस अधिवेशन में राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया था।

स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरान्त जब भारत का संविधान निर्मित हो रहा था, तब ये प्रश्न उठा कि वंदे मातरम् गीत को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया जाये या किसी अन्य गीत को। उस दौरान तत्कालीन संगीतकारों का ये मानना था कि, वंदेमातरम् गीत को लयबध करना कुछ कठिन है। अतः इसके अतिरिक्त किसी अन्य गीत को राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया जाये। अंत में रविन्द्रनाथ टैगोर द्वारा रचित ‘जन मन गण’ को अपनाया गया। जवाहरलाल नेहरु के आग्रह पर ‘जन मन गण’ को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया

वन्दे मातरम् गीत का शब्द-साधन

संस्कृत शब्द वंदे की जड़ वंद है, जो ऋग्वेद और अन्य वैदिक ग्रंथों में प्रकट होती है। मोनिएर मोनियर-विलियम्स के अनुसार, संदर्भ के आधार पर, वंद का अर्थ है प्रशंसा जश्न मनाने प्रशंसा स्तुति सम्मान दिखाने के लिए श्रद्धांजलि अर्पित करें आदरपूर्वक सलाम करें या आदरपूर्वक पूजा करें या सम्मानपूर्वक कुछ भी प्रदान करें । शब्द मातरम में मातर्- (संस्कृत) मार्ट (ग्रीक) मार्ट (लैटिन) में इंडो-यूरोपीय जड़ है जिसका अर्थ “माँ” है।

भारत में गाये जाने वाले वन्दे मातरम् गीत के बोल Vande Mataram song lyrics

वन्दे मातरम्।
सुजलाम् सुफलाम्
मलयजशीतलाम्,
शस्यश्यामलाम्
मातरम्।
वन्दे मातरम्।।
शुभ्रज्योत्सना
पुलकितयामिनीम्,
फुल्लकुसुमित
द्रुमदलशोभिनीम्,
सुहासिनीम्
सुमधुरभाषिणीम्,
सुखदाम्
वरदाम् मातरम्।
वन्दे मातरम्।।

वन्दे मातरम् गीत का सम्पूर्ण हिंदी भावाअर्थ

अर्थात इसका सम्पूर्ण अर्थ हे भारत माँ मैं आपकी वंदना करता हुँ। स्वच्छ और निर्मल पानी से सिचित , अच्छे फलों से भरी , सुगन्धित सुष्क समीर (हवा) तथा हरे भरे खेतों वाली भारत माँ, मैं आपकी वंदना करता हूँ। सुन्दर चांदनी प्रकाशित रात, सुगंधित खिले हुए फूलों एवं घने वृक्षों की छाया प्रदान करते हुए, हंसी की मिठास (सुमधुर) वाणी के साथ वरदान देने वाली भारत माता मैं अपकी वंदना करता हूँ। मैं आपकी वंदना करता हूँ।

वंदे मातरम् का मूल गीत Original song of Vande Mataram

वन्दे मातरम्
सुजलां सुफलाम्
मलयजशीतलाम्
सस्यशामलाम्
मातरम्।

शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीम्
फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीम्
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्
सुखदां वरदां मातरम्।। 1।।

सप्त-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले
द्विसप्त-कोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले,
अबला केन मा एत बले।
बहुबलधारिणीं
नमामि तारिणीं
रिपुदलवारिणीं
मातरम्।। 2।।

तुमि विद्या, तुमि धर्म
तुमि हृदि, तुमि मर्म
त्वम् हि प्राणा: शरीरे
बाहुते तुमि मा शक्ति,
हृदये तुमि मा भक्ति,
तोमारई प्रतिमा गडी मन्दिरे-मन्दिरे।।। 3।।

त्वम् हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी
कमला कमलदलविहारिणी
वाणी विद्यादायिनी,
नमामि त्वाम्
नमामि कमलाम्
अमलां अतुलाम्
सुजलां सुफलाम्
मातरम्।। 4।।

वन्दे मातरम्
श्यामलाम् सरलाम्
सुस्मिताम् भूषिताम्
धरणीं भरणीं
मातरम्।। 5।।

राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता National song Recognition

1937 में वंदे मातरम के कुछ हिस्सों को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने चुना था क्योंकि यह ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से भारत की स्वतंत्रता को अपनाता था, मौलाना आजाद, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चन्द्र बोस, आचार्य देव और रबींद्रनाथ टैगोर ने अपनाने की सिफारिश की। लेकिन हिंदू नेताओं द्वारा पूरे गीत का चयन गैर-हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान करने के लिए किया गया था, और सभा में यह सहमति हुई कि किसी को भी राष्ट्रीय सभा में वैकल्पिक “अविश्वसनीय गीत” गाने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए अगर वे वंदे मातरम् नहीं गाते हैं क्योंकि उन्हें व्यक्तिगत कारणों से इसे “आपत्तिजनक” लगता है। नोबेल पुरस्कार विजेता रबींद्रनाथ टैगोर समेत कई नेताओं के मुताबिक, हालांकि पहले दो पदों की शुरुआत मातृभूमि की सुंदरता के अपवाद के साथ हुई थी | बाद में पठानों में हिंदू देवी दुर्गा के संदर्भ हैं। मुस्लिम लीग और मुहम्मद अली जिन्ना ने इस गीत का विरोध किया इसके बाद, महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू के समर्थन से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने सार्वजनिक सम्मेलनों में गाना जाने वाले राष्ट्रीय गीत के रूप में केवल पहले दो पदों को अपनाने का निर्णय लिया गया था | और दुर्भाग्य और लक्ष्मी के संदर्भों में शामिल अन्य छंदों को खारिज कर दिया गया ।

वंदे मातरम गीत के ऐतिहासिक तथ्य Historical facts of Vande Mataram song

  • बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय ने ‘वंदे मातरम’ गीत की रचना 7 नवंबर 1876 में बंगाल के कांतल पाडा गांव में की थी |
  • बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय के प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ का गीत वंदे मातरम 1882 में सम्मिलित हुआ।
  • रवीन्द्र नाथ टैगोर ने पहली बार ‘वंदे मातरम’ को गीत को 1896 में कलकत्ता के कांग्रेस अधिवेशन में गाया था ।
  • वंदे मातरम गीत के दो पद संस्कृत भाषा में थे, जबकि शेष गीत बांग्ला भाषा में।
  • अरविंद घोष ने वंदे मातरम् गीत का अंग्रेज़ी अनुवाद सबसे पहले किया था |
  • कांग्रेस कार्यकारिणी की बैठक में गीत को राष्ट्रगीत का दर्ज़ा दिसम्बर 1905 में प्रदान किया गया
  • बंग-भंग आंदोलन में ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रीय नारा बना।
  • कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवीन्द्र नाथ टैगोर ने इसका संशोधित रूप प्रस्तुत किया।
  • वंदे मातरम गीत 1906 में देवनागरी लिपि में प्रस्तुत किया गया |
  • 1923 में कांग्रेस अधिवेशन में वंदे मातरम् के विरोध में स्वर उठे।
  • 14 अगस्त 1947 की रात्रि में संविधान सभा की पहली बैठक का प्रारंभ वंदे मातरम गीत के साथ और समापन जन गण मन… के साथ हुआ।
  • 1950 वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत और जन गण मन राष्ट्रीय गान बना।
  • 2002 बी.बी.सी. के एक सर्वेक्षण के अनुसार ‘वंदे मातरम्’ विश्व का दूसरा सर्वाधिक लोकप्रिय गीत है।

पंडित नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, सुभाष चंद्र बोस और आचार्य नरेन्द्र देव की समिति ने 28 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में पेश अपनी रिपोर्ट में इस राष्ट्रगीत के गायन को अनिवार्य बाध्यता से मुक्त रखते हुए कहा था कि इस गीत के शुरुआती दो पद ही प्रासंगिक है इस समिति का मार्गदर्शन रवीन्द्र नाथ टैगोर ने किया।

Vande Mataram Desh Bhakti Song Download

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