विश्व पर्यावरण दिवस पर कविताओं का संग्रह World Environment day Poem in Hindi

विश्व पर्यावरण दिवस पर कविता  World Environment day Poem: विश्व पर्यावरण दिवस दुनियाभर में पर्यावरण की सुरक्षा और उसके सरक्षण के लिए मनाया जाने वाला दिवस है | सबसे पहले विश्व पर्यावरण दिवस को सन 1972 में पर्यावरण को बचाने की जागृति लाने के लिए अमेरिका ने पहल की थी | विश्व पर्यावरण दिवस World Environment day को संयुक्त राष्ट्र महासभा में विश्व पर्यावरण सम्मेलन के बारे में चर्चा 5 जून से 16 जून तक की गई थी | इसी के साथ सबसे पहला विश्व पर्यावरण दिवस World Environment day 5 जून 1974 कोमनाया गया था | विश्व के लगभग 143 देशो के सरकारी, सामाजिक और व्यावसायिक व्यक्ति पर्यावरण की सुरक्षा और समस्या के समाधान के बारे में चर्चा करते है |

विश्व पर्यावरण दिवस पर कविता World Environment day Poem

विश्व पर्यावरण दिवस पर कविता : नमस्कार दोस्तों पर्यावरण के बारे में कहा गया है की मनुष्य और पर्यावरण एक दुसरे पर निर्भर है | कहा गया है की हमारी जलवायु में थोडा भी कोई परिवर्तन होता है तो हमारे जन जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ता है | इसलिए हम सभी देश वासी 5 जून से 16 जून तक पर्यावरण दिवस पर बहुत चर्चा करते है और पर्यावरण को संतुलित बनाये रखने के लिए बहुत से कार्य करते है | दोस्तों इस विश्व पर्यावरण दिवस पर हम आपके लिए लेकर आये है कुछ शानदार कविताएँ जो आप अपने दोस्तों,रिश्तेदारों ,परिवार के सदस्यों,और अपने सभी चाहने वालो को भेज कर पर्यावरण के बारे में सन्देश दे सकते है |

पर्यावरण दिवस पर कविता

पेड़ कटाने वाले काट गए
क्या सोचा था एक पल में
वो किसी परिदे का घर उजाड़ गए
क्यों सोचा था एक पल में
वो धरती की मजबूत नीव उखाड़ गए
कितनी ही भूमि को वो सुनसान बना गए
इस पर्यावरण का मंजर वो एक पल में उजाड़ गए
ना करो इस पर्यावरण का उपहास
ये इस धरती का अपमान है
हर एक पेड़ पौधा और जीव जन्तु
इस धरती का सम्मान है
अगर करोगे इस धरती के साथ खिलवाड़
तो आने वाला कल होगा अन्धकार मय
इस बात को सोचो और चलो
करो एक सुनहरे पल की पहल
जो आने वाले जीवन को करे हरा भरा
और खुशहाल |
Happy World Environment Day

विश्व पर्यावरण दिवस पर हिन्दी कविता पेड़ की पुकार kavita

रो-रोकर पुकार रहा हूं हमें जमीं से मत उखाड़ो।
रक्तस्राव से भीग गया हूं मैं कुल्हाड़ी अब मत मारो।

आसमां के बादल से पूछो मुझको कैसे पाला है।
हर मौसम में सींचा हमको मिट्टी-करकट झाड़ा है।

उन मंद हवाओं से पूछो जो झूला हमें झुलाया है।
पल-पल मेरा ख्याल रखा है अंकुर तभी उगाया है।

तुम सूखे इस उपवन में पेड़ों का एक बाग लगा लो।
रो-रोकर पुकार रहा हूं हमें जमीं से मत उखाड़ो।

इस धरा की सुंदर छाया हम पेड़ों से बनी हुई है।
मधुर-मधुर ये मंद हवाएं, अमृत बन के चली हुई हैं।

हमीं से नाता है जीवों का जो धरा पर आएंगे।
हमीं से रिश्ता है जन-जन का जो इस धरा से जाएंगे।

शाखाएं आंधी-तूफानों में टूटीं ठूंठ आंख में अब मत डालो।
रो-रोकर पुकार रहा हूं हमें जमीं से मत उखाड़ो।

हमीं कराते सब प्राणी को अमृत का रसपान।
हमीं से बनती कितनी औषधि नई पनपती जान।

कितने फल-फूल हम देते फिर भी अनजान बने हो।
लिए कुल्हाड़ी ताक रहे हो उत्तर दो क्यों बेजान खड़े हो।

हमीं से सुंदर जीवन मिलता बुरी नजर मुझपे मत डालो।
रो-रोकर पुकार रहा हूं हमें जमीं से मत उखाड़ो।

अगर जमीं पर नहीं रहे हम जीना दूभर हो जाएगा।
त्राहि-त्राहि जन-जन में होगी हाहाकार भी मच जाएगा।

तब पछताओगे तुम बंदे हमने इन्हें बिगाड़ा है।
हमीं से घर-घर सब मिलता है जो खड़ा हुआ किवाड़ा है।

गली-गली में पेड़ लगाओ हर प्राणी में आस जगा दो।
रो-रोकर पुकार रहा हूं हमें जमीं से मत उखाड़ो।

World Environment Day Poem In Hindi

World Environment Day Poem In Hindi : -विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को सम्पूर्ण विश्व में मनाया जाने वाला दिवस है | विश्व पर्यावरण दिवस विद्यालयों में अनेक प्रकार के कार्यकर्म का आयोजन होता है कक्षा 1 से लेकर 12 वी तक के सभी छात्र-छात्राए इस कार्यकर्म में भाग लेते है | उसी को ध्यान में रखते हुए हम आपके लिए लेकर आये है कुछ छोटी बड़ी कविताओं का संग्रह जो आप इस पर्यावरण दिवस में अपने विद्यालय में सुना सकते है और पर्यावरण को इन छोटी छोटी कविताओ के माध्यम से बचने का सफल प्रयास कर सकते है |

तो कहने लगा मानव कर रहा मात्र स्वयं का विकास है,
पर्यावरण को स्वच्छ बनाना, उसका दिखावा मात्र है|
फिर भी तुझे नहीं जो रहा, मेरी पीड़ा का आभास है|
क्यों करते इस धरती को तुम गन्दा,
मेरे शुद्ध होने पर ही, तुम्हारे हृदय मे बची साँस है |
यदि सच मे चाहते हो, इस पावन धरती पर तुम जीना,
तो करना पड़ेगा पहले तुम्हे, शुद्ध पर्यावरण का विकास है|
वर्ना मेरे अभाव मे तुम्हारा वास, बन जायेगा यमराज का वास है|

विश्व पर्यावरण दिवस पर हिन्दी कविता – करके ऐसा काम दिखा दो

करके ऐसा काम दिखा दो जिस पर गर्व दिखाई दे।
इतनी खुशियाँ बाँटो सबको हर दिन पर्यावरण दिवस दिखाई दे।
हरे वृक्ष जो काट रहे हैं उन्हें खूब धिक्कारो,
खुद भी पेड़ लगाओ इतने की धरती स्वर्ग दिखाई दे।।
करके ऐसा काम दिखा दो कोई मानव शिक्षा से भी, वंचित नहीं दिखाई दे।
सरिताओं में कूड़ा-करकट संचित नहीं दिखाई दे।
वृक्ष रोपकर पर्यावरण का संरक्षण ऐसा करना
दुष्ट प्रदूषण का भय भू पर किंचित नहीं दिखाई दे।।
करके ऐसा काम दिखा दो हरे वृक्ष से वायु-प्रदूषण का संहार दिखाई दे।
हरियाली और प्राणवायु का बस अम्बार दिखाई दे।
जंगल के जीवों के रक्षक बनकर तो दिखला दो,
जिससे सुखमय प्यारा-प्यारा, ये संसार दिखाई दे।।
करके ऐसा काम दिखा दो वसुन्धरा पर स्वास्थ्य-शक्ति का बस आधार दिखाई दे।
जड़ी-बूटियों औषधियों की बस भरमार दिखाई दे।
जागो बच्चो जागो मानव यत्न करो कोई ऐसा,
कोई प्राणी इस धरती पर, ना बीमार दिखाई दे।।
करके ऐसा काम दिखा दो

विश्व पर्यावरण दिवस पर बाल कविता poem on environment for class 5

पेड़ फूलो को मत तोड़ो छिन्न जाएगी मेरी ममता
हरियाली को मत हरो हो जायेंगे मेरे चहरे मरे
मेरी बाहों को मत काटो बन जाऊंगा मै अपग
कहने दो बाबा को नीम तले कथा कहानी
झुलाने दो अमराई में बच्चो को झुला
मत छांटो मेरे सपने मेरी खुशिया लुट जायेंगी

विश्व पर्यावरण दिवस पर बाल कविता Short Poem on World Environment Day

जन जन में चेतना लाओ, पर्यावरण का अलख जगाओ
पर्यावरण की रक्षा, दुनियाँ की सुरक्षा
जीव – जन्तुओ को मत भगाओ, पर्यावरण बचाओ, पर्यावरण बचाओ.
जब हरियाली छाती है, जीवन में खुशियाँ आती है
पेड़ पौधे लगाओ, पर्यावरण को बचाओ
जब पेड़ लगाओगे, तब जीवन सुरक्षित पाओगे
जो देता पेड़ो को पानी, वही व्यक्ति है सच्चा ज्ञानी
पेड़ होंगे तो मिलेगी छाँव, वरना जलेंगे हमारे पाँव
मत काटो इन पेड़ो को इन में होती हे जान, बिन पेड़ो के हो जायेगा हम सब का जीवन सुनसान
एक दो एक दो, पेड़ काटना छोड़ दो
पर्यावरण को नहीं पहुँचाओ नुकसान, यह है जीवन का अपमान
ग्लोबल वार्मिंग से है खतरे में जान, पर्यावरण की रक्षा करना सबकी शान

पर्यावरण सरंक्षण पर बाल कविता Child Poem on Environmental Protection

जीवन के श्रृंगार पेड़ हैं जीवन के आधार पेड़ हैं।
ठिगने – लम्बे, मोटे – पतले भांत – भंतीले डार पेड़ हैं।
आसमान में बादल लाते बरखा के हथियार पेड़ हैं।
बीमारों को दवा ये देते प्राण वायु औजार पेड़ हैं।
रबड़, कागज, लकड़ी देते पक्षियों के घरबार पेड़ हैं।
शीतल छाया फल देते हैं कितने ये दातार पेड़ हैं।
खुद को समर्पित करने वाले ईश्वर के अवतार पेड़ हैं।।

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