Kali Mata Ki Aarti Mantra Puja Vidhi महाकाली मन्त्र आरती व सम्पूर्ण पूजा विधि और माँ काली पूजा के नियम व लाभ यहाँ देखे

Kali Mata Ki Aarti Mantra Puja Vidhi महाकाली मन्त्र आरती व सम्पूर्ण पूजा विधि और माँ काली पूजा के नियम व लाभ Maa Kali Ki Aarti Hindi Mai Kali Mata Ke Mantra & Mahakali Pujan Vidhi Niyam Labh : भगवान शंकर की चार पत्नियां में से एक मां काली को सबसे जाग्रत देवी माना गया है | काली माता की उपासना करने से जीवन में सुख, शांति, शक्ति, विद्या प्राप्त होती है | जोतिष शास्त्रों के अनुसार यदि माँ काली के उपासना में कोई भूल होती है तो इसका परिणाम भी भुगतना होता है | आज हम आपको यहाँ Kali Mata Mantra महाकाली मन्त्र Mahakali Ki Aarti काली माता की आरती व माँ काली पूजन विधि Kali Mata Puja Vibhi Niyam Labh माँ काली पूजा के नियम व लाभ के बारे में जानकारी लेकर आये है | महाकाली को खुश करने के लिए उनकी फोटो या प्रतिमा के साथ महाकाली के मंत्रों का जाप विधि – विधान से पूजा व आरती करे | आप यहाँ बताये गए महाकाली मन्त्र आरती व सम्पूर्ण पूजा विधि Kali Mata Ki Aarti Mantra Puja Vidhi से पूरी श्रद्धा के साथ उपासना कर सकते है |

Mahakali Ke Mantra Puja Vidhi Aarti

काली के 4 रूप हैं दक्षिणा काली, शमशान काली, मातृ काली और महाकाली | जीवनरक्षक मां काली / माता काली की पूजा या भक्ति करने वालों को माता सभी तरह से निर्भीक और सुखी बना देती हैं और अपने भक्तों को सभी तरह की परेशानियों से बचाती हैं | महाकाली को खुश करने के लिए काली माता की विधि – विधान के साथ पूजा – पाठ की जाती है | काली माता की फोटो या प्रतिमा के सामने मंत्रों का जाप किया जाता है | इस पूजा में महाकाली यंत्र का प्रयोग भी किया जाता है | अगर पूरी श्रद्धा से माँ काली की उपासना की जाए तो आपकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है | अगर आप महाकाली मन्त्र आरती पूजा विधि और माँ काली पूजा के नियम व लाभ की तलाश कर रहे है तो आपको बतादे की इस लेख में Kali Mata Ki Aarti Kali Mata Ke Mantra Maa Kali Puja Vidhi Mahakali Pujan Niyam & Kali Mata Ki Puja Karne ke Labh Benifits के बारे में जानकारी दी गई है | लेकिन आपको बतादे की यहां कालका माता की पूजा संबंधी सामान्य जानकारी दी गई है | किसी विशेषज्ञ से पूछकर ही काली माता की पूजा करनी चाहिए |

काली माता की पूजा के नियम Mahakali Pujan Niyam

दो तरीके से मां काली की पूजा की जाती है, एक सामान्य और दूसरी तंत्र पूजा | सामान्य पूजा कोई भी कर सकता है, पर तंत्र पूजा बिना गुरू के संरक्षण और निर्देशों के नहीं की जा सकती | काली की उपासना सही समय मध्य रात्रि का होता है | इनकी पूजा में लाल और काली वस्तुओं का विशेष महत्व है | मां काली के मंत्र जाप से ज्यादा इनका ध्यान करना उपयुक्त होता है | विद्वान ज्योतिषों के अनुसार माँ कलि की पूजा व मंत्रो का उच्चारण करने के कुछ नियम बताये गए है | इन बातो को ध्यान में रखकर माँ काली का पूजन पाठ व मंत्रो का उच्चारण करना चाहिए |

  • सूर्य उदय से पहले नहा ले |
  • स्वच्छ सफेद या नारंगी कपड़े पहनें |
  • पूजा शुरू करने से पहले आसन पे बैठे |
  • एक दीया जलाये |
  • फूल और मिठाई भगवान् को चढ़ाये |
  • अब गहरा और सच्चे दिल से रुद्राक्ष की माला से मंत्र का जाप करे |
  • 15 दिन में एक बार किसी भी मंगलवार या शुक्रवार के दिन काली माता को मीठा पान व मिठाई का भोग लगाए |

महाकाली मंत्र Kali Mata Ke Mantra

कालिका माता का यह अचूक मंत्र है | इससे माता जल्द से सुन लेती हैं, लेकिन आपको इसके लिए सावधान रहने की जरूरत है | यदि आप काली के भक्त हैं तो ही इस मंत्र का उच्चारण करें।

ॐ नमो काली कंकाली महाकाली मुख सुन्दर जिह्वा वाली
चार वीर भैरों चौरासी, चार बत्ती पूजूं पान ए मिठाई
अब बोलो काली की दुहाई

इस मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जाप करने से आर्थिक लाभ मिलता है | इससे धन संबंधित परेशानी दूर हो जाती है |

महाकाली शाबर मन्त्र Kali Mata Shabar Mantra

ॐ निरंजन निराकार अवगत पुरुष तत सार, तत सार मध्ये ज्योत, ज्योत मध्ये परम ज्योत, परम ज्योत मध्ये उत्पन्न भई माता शम्भु शिवानी काली ओ काली काली महाकाली, कृष्ण वर्णी, शव वहानी, रुद्र की पोषणी, हाथ खप्पर खडग धारी, गले मुण्डमाला हंस मुखी। जिह्वा ज्वाला दन्त काली। मद्यमांस कारी श्मशान की राणी। मांस खाये रक्त-पी-पीवे। भस्मन्ति माई जहां पर पाई तहां लगाई। सत की नाती धर्म की बेटी इन्द्र की साली काल की काली जोग की जोगीन, नागों की नागीन मन माने तो संग रमाई नहीं तो श्मशान फिरे अकेली चार वीर अष्ट भैरों, घोर काली अघोर काली अजर बजर अमर काली भख जून निर्भय काली बला भख, दुष्ट को भख, काल भख पापी पाखण्डी को भख जती सती को रख, ॐ काली तुम बाला ना वृद्धा, देव ना दानव, नर ना नारी देवीजी तुम तो हो परब्रह्मा काली।

ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा

Mahakali Mantra काली माता के मंत्र

एकाक्षर मंत्र : क्रीं – इसे चिंतामणि काली का विशेष मंत्र भी कहा जाता है |
द्विअक्षर मंत्र : क्रीं क्रीं – तांत्रिक साधनाएं और मंत्र सिद्धि हेतु |
त्रिअक्षरी मंत्र : क्रीं क्रीं क्रीं – तांत्रिक साधना के पहले और बाद में जपा जाता है |
ज्ञान प्रदाता मन्त्र : ह्रीं – दक्षिण काली का मंत्र ज्ञान हेतु |
चेटक मन्त्र : क्रीं क्रीं क्रीं स्वाहा – दुखों का निवारण करके घन-धान्य की वृद्धि एवं पारिवारिक शांति हेतु |
छह अक्षरों का मंत्र : क्रीं क्रीं फट स्वाहा – सम्मोहन आदि तांत्रिक सिद्धियों के लिए |
आठ अक्षरों का मंत्र : क्रीं क्रीं क्रीं क्रीं क्रीं स्वाहा – पासना के अंत में जप करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं |
नवार्ण मंत्र : ‘ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै:’ – इसका प्रत्येक अक्षर एक ग्रह को नियंत्रित करता है। इस मंत्र का जप नवरात्रों में विशेष फलदायी होता है |
ग्यारह अक्षरों का यह मन्त्र : ऐं नमः क्रीं क्रीं कालिकायै स्वाहा- ह मन्त्र अत्यंत दुर्लभ और सर्वसिंद्धियों को प्रदान करने वाला है |

Kali Mata Mantra महाकाली मन्त्र

क्रीं हूं हूं ह्रीं हूं हूं क्रीं स्वाहा
क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा
नमः ऐं क्रीं क्रीं कालिकायै स्वाहा
नमः आं आं क्रों क्रों फट स्वाहा कालिका हूं
क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं स्वाहा

क्रीं हूं हूं ह्रीं हूं हूं क्रीं स्वाहा
क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा
नमः ऐं क्रीं क्रीं कालिकायै स्वाहा
नमः आं आं क्रों क्रों फट स्वाहा कालिका हूं
क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं स्वाहा

ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी OM Jayanti Mangala Kali Bhadrakali Kapalini Mantra Lyrics PDF

काली काली महाकाली कालिके पापनाशिनी
सर्वत्र मोक्षदा देहि नारायणी नमस्तेऽस्तु।
ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी
दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा स्वधा नमस्तेऽस्तु।

ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु‍ते।।

मां कालरात्रि की पूजा का महत्व काली माता की पूजा करने के लाभ

काली पूजा के लाभ Kaali Puja Benefits in Hindi मां कालरात्रि की पूजा करने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं | साथ ही उसे किए गए अपने कर्मों के शुभ फल की प्राप्ति होती है | मां कालरात्रि की पूजा करने से आकस्मिक संकटों से रक्षा होती है | मां कालरात्रि का स्वरूप अद्भुत है | उनका शरीर कृष्ण वर्ण यानी काले रंग का है, इसलिए भी उनको कालरात्रि के नाम से पुकारते हैं | आप यहाँ माँ कलि की पूजा करने के महत्त्व अर्थात कलि मात की पूजा करने के फायदे / लाभ देख सकते है |

  • पूजा की मदद से सभी तरह की नकारात्मक ऊर्जा आपके घर ओर परिवार से दूर चली जाती हैं |
  • कालिका की उपासना से जीवन में सुख, शांति, शक्ति, विद्या की प्राप्ति होती हैं |
  • लंबे समय से चली आ रही बीमारी दूर हो जाती हैं |
  • ऐसी बीमारियां जिनका इलाज संभव नहीं है, वह भी काली की पूजा से समाप्त हो जाती हैं |
  • काली के पूजक पर काले जादू, टोने-टोटकों का प्रभाव नहीं पड़ता |
  • काली देवी की शरण में आने के बाद भक्त के समस्त राग, द्वेष, विघ्न आदि भस्म हो जाते हैं |
  • हर तरह की बुरी आत्माओं से माता काली रक्षा करती हैं |
  • काली पूजा द्वारा भक्त की नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती हैं |
  • कर्ज से छुटकारा दिलाती हैं |
  • बिजनेस आदि में आ रही परेशानियों को दूर करती हैं |
  • जीवनसाथी या किसी खास मित्र से संबंधों में आ रहे तनाव को दूर करती हैं |
  • बेरोजगारी, करियर या शिक्षा में असफलता को दूर करती हैं |
  • कारोबार में लाभ और नौकरी में प्रमोशन दिलाती हैं |
  • काली पूजा से हर तरह की अशुद्धियाँ खत्म हो जाती हैं |
  • हर रोज कोई न कोई नई मुसीबत खड़ी होती हो तो काली इस तरह की घटनाएं भी रोक देती हैं |
  • शनि-राहु की महादशा या अंतरदशा, शनि की साढ़े साती, शनि का ढइया आदि सभी से काली रक्षा करती हैं |
  • पितृदोष और कालसर्प दोष जैसे दोषों को दूर करती हैं |
  • शनिवार के दिन सरसों के तेल, काले तिल, काली उड़द आदि लेकर माता कालीका का विवि विधान से पूजन करने से शनिदोष दूर होता है
कालीमाता की आरती (Kali Mata Ji Aarti in Hindi)

मंगल की सेवा सुन मेरी देवा ,हाथ जोड तेरे द्वार खडे।
पान सुपारी ध्वजा नारियल ले ज्वाला तेरी भेट धरेसुन।।1।।

जगदम्बे न कर विलम्बे, संतन के भडांर भरे।
सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जै काली कल्याण करे ।।2।।

बुद्धि विधाता तू जग माता ,मेरा कारज सिद्व रे।
चरण कमल का लिया आसरा शरण तुम्हारी आन पडे।।3।।

जब जब भीड पडी भक्तन पर, तब तब आप सहाय करे।
गुरु के वार सकल जग मोहयो, तरूणी रूप अनूप धरेमाता।।4।।

होकर पुत्र खिलावे, कही भार्या भोग करेशुक्र सुखदाई सदा।
सहाई संत खडे जयकार करे ।।5।।

ब्रह्मा विष्णु महेश फल लिये भेट तेरे द्वार खडेअटल सिहांसन।
बैठी मेरी माता, सिर सोने का छत्र फिरेवार शनिचर।।6।।

कुकम बरणो, जब लकड पर हुकुम करे ।
खड्ग खप्पर त्रिशुल हाथ लिये, रक्त बीज को भस्म करे।।7।।

शुम्भ निशुम्भ को क्षण मे मारे ,महिषासुर को पकड दले ।
आदित वारी आदि भवानी ,जन अपने को कष्ट हरे ।।8।।

कुपित होकर दनव मारे, चण्डमुण्ड सब चूर करे।
जब तुम देखी दया रूप हो, पल मे सकंट दूर करे।।9।।

सौम्य स्वभाव धरयो मेरी माता ,जन की अर्ज कबूल करे ।
सात बार की महिमा बरनी, सब गुण कौन बखान करे।।10।।

सिंह पीठ पर चढी भवानी, अटल भवन मे राज्य करे।
दर्शन पावे मंगल गावे ,सिद्ध साधक तेरी भेट धरे ।।11।।

ब्रह्मा वेद पढे तेरे द्वारे, शिव शंकर हरी ध्यान धरे।
इन्द्र कृष्ण तेरी करे आरती, चॅवर कुबेर डुलाय रहे।।12।।

जय जननी जय मातु भवानी , अटल भवन मे राज्य करे।
सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, मैया जै काली कल्याण करे।।13।।

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