15 August 2018 Independence Day Shayari Kavita 15 अगस्त पर स्वतंत्रता सेनानियों के क्रांतिकारी नारे शायरी कविता और महत्व [ 15 August Shayari Kavita Slogan]

15 August 2018 Independence Day Shayari Kavita Slogan : 15 अगस्त को रात 12 बजे जब दुनिया सो रही होगी तब भारत अपनी स्‍वतंत्रता पाने के लिए जागेगा। 15 अगस्त का ये दिन जो इतिहास में दुर्लभ है और जिसको इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया उस दिन को याद करते आ रहे हैं और सदा सदा के लिए याद करते रहेगे | इतिहास मैं आजादी दिवश हर साल मनाते रहेंगे और 15 अगस्त पर वीर शहीदों के बलिदान की कथाओं को इतिहास मैं दोहराते रहेंगे

15 August 2018 Independence Day Shayari Kavita Slogan

जब तक सूरज चाँद रहेगा तब तक देश के लिए बलिदान दिए अमर शहीदों का नाम रहेगा |

स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्‍त 1947) Independence Day of India

15 अगस्‍त 1947, वह दिन था जब भारत को ब्रिटिश राज से आज़ादी मिली, और इस प्रकार एक नए युग की शुरुआत हुई जब भारत एक मुक्‍त राष्‍ट्र के रूप में उठा। स्‍वतंत्रता दिवस के दिन दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र, भारत के जन्‍म का उत्सव मनाया गया , और भारतीय इतिहास में इस दिन को स्वर्ण अक्षरों मैं लिखा गया ।भारतीय स्‍वतंत्रता के लिए हमारे देशभक्तों द्वारा अनेकों बार संघर्ष करना पड़ा, जो 1857 की क्रांति से लेकर जलियाँवाला बाग नरसंहार, असहयोग आंदोलन से लेकर नमक सत्‍याग्रह तक अनेक हैं।

भारत ने एक लंबी यात्रा तय की है जिसमें अनेक राष्‍ट्रीय और क्षेत्रीय अभियान हुए और इसमें उपयोग किए गए दो प्रमुख अस्‍त्र थे सत्‍य और अहिंसा।हमारी स्‍वतंत्रता के संघर्ष में भारत के राजनैतिक संगठनों के व्‍यापक रंग, उनकी दर्शन धारा और आंदोलन शामिल हैं जो एक महान कारण के लिए एक साथ मिलकर चले और ब्रिटिश उप-निवेश साम्राज्‍य का अंत हुआ और 15 अगस्त को एक स्‍वतंत्र राष्‍ट्र का जन्‍म हुआ।यह दिन हमारी आज़ादी का जश्‍न मनाने और उस सभी शहीदों को श्रद्धांजलि देने का अवसर जिन्‍होंने इस महान कारण के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया।

स्‍वतंत्रता दिवस पर प्रत्‍येक भारतीय के मन में राष्‍ट्रीयता, भाई-चारे और निष्ठा की भावना भर जाती है। स्‍वतंत्रता दिवस को पूरी निष्ठा, गहरे समर्पण और अपार देश भक्ति के साथ पूरे देश में मनाया जाता है। स्‍कूलों और कालेजों में यह दिन सांस्‍कृतिक गतिविधियों, कवायद और ध्‍वज आरोहण के साथ मनाया जाता है। दिल्‍ली में प्रधानमंत्री लाल किले पर तिरंगा झंडा फहराते हैं और इसके बाद राष्‍ट्र गान गाया जाता है। वे राष्‍ट्र को संबोधित भी करते हैं | इसके साथ वे आज़ादी के संघर्ष में शहीद हुए नेताओं को श्रद्धांजलि देते हैं और आज़ादी की लड़ाई में उनके योगदान पर अभिवादन करते हैं।

स्वतंत्रता सेनानियों के वो क्रांतिकारी नारे जिन्होंने आजादी का बिगुल बजाया : Slogen on Independence Day

आजादी दिवश पर चन्द्र शेखर आजाद का नारा 

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स्वतन्त्रता दिवस पर भारत माँ के वीर सपूत भगत सिंह का नारा : Bhagat Sing Slogon on 15 August

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बाल गंगा धर तिलक के नारे : Bal Ganga Dhar Tilak Slogon on 15 August 2018

BG Tilk Independance day slogen


लाला लाजपतराय के ब्रिटिश सरकार के खिलाफ स्वतन्त्रता के नारे : Lala Lajpatray Slogon on 15 August

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सुभाष चन्द्र बॉस के स्वतन्त्रता दिवस पर नारे : Subhash Chandra Boss Slogon on Independence Day

subhash candar Slogon on 15 August


स्वतन्त्रता दिवश पर देशभक्ति शायरी : 15 August Shayari

गूंज रहा है दुनिया में भारत का नगाड़ा
चमक रहा आसमा में देश का सितारा
आजादी के दिन आओ मिलके करें दुआ
कि बुलंदी पर लहराता रहे तिरंगा हमारा

भूल न जाना भारत मां के सपूतों का बलिदान
इस दिन के लिए हुए थे जो हंसकर कुरबान
आजादी की ये खुशियां मनाकर लो ये शपथ
कि बनाएंगे देश भारत को और भी महान

हम आजाद हैं, ये आजादी कभी छिनने नहीं देंगे
तिरंगे की शान को हम कभी मिटने नहीं देंगे
कोई आंख भी उठाएगा जो हिंदुस्तान की तरफ
उन आंखों को फिर दुनिया देखने नहीं देंगे


स्वतन्त्रता दिवश पर कविता : 15 August Poem

15 august kavita in hindi

जन-गण-मन की धुन को सुन कर, हुए झंकृत मन वीणा के तार
बधाई आजादी के दिवस की, भारत मां सजी सोलह श्रंगार |

देखूं जब-जब लहराता तिरंगा,गुमान देश पर होता है 
लिया जन्म जहां शूरवीरों ने ,सिर नतमस्तक हो जाता हैं |

क्या इंसान थे,किस मिट्टी के थे वो,क्या उन्हें जीवन से प्यार न था 

उनकी भी कुछ इच्छाएं होंगी, क्या उनका कोई परिवार न था |

समझा सब कुछ देश को अपने, जंग तभी तो जीत गए 

दो सौ वर्ष की गुलामी छूटीअंग्रेजों के दिन बीत गए  |

उनके इस बलिदान को  क्या व्यर्थ यूंही जाने देंगे
क्यूं न हम ये कसम उठाएं,आंच देश पर न आने देंगे|

बच्चा-बच्चा बन जाए सैनिक,गर बुरी नजर दुश्मन डाले 
हस्ती उसकी मिलाएं खाक.में, करे कभी जो हमला वे| 

भाईचारा रखें परस्पर, अमन चैन का नारा हो 
सद्भावना शांति रखें दिलों में, जाति, धर्म का न बंटवारा हो |

बनें पहिए प्रगति के रथ के,सबसे आगे बढ़ते जाएं
कर दें रौशन नाम जहां में, देश का अपने मान बढ़ाएं |

आजादी की वर्षगांठ की ,छटा निराली बढ़ती जाए 

खुशहाली के फूल हों बिखरे,खुश्बू से चमन महकाएं |


विशेष : आजादी की घोषणा के लिए मिला केवल 48 मिनट का समय :

ज्योतिषियों ने बताया कि अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 51 मिनट से शूरू होकर 12 बजकर 39 मिनट रहेगा | इन्ही 48 मिनट में आजादी की घोषणा होनी थी और पंडित जवाहरलाल नेहरु को अपना भाषण भी खत्म करना था | सविधान सभा का विशेष सत्र होने के बाद रात 11 बजे से आजादी के जश्न का कार्यक्रम शूरू किया गया | कार्यक्रम की शुरुवात वन्दे मातरम से शुरू हुयी | आजादी के लिए जान देनें वाले शहीदों के लिए दो मिनट का मौन रखा गया | नेहरु जी ने वायसराय लॉज (मौजूदा राष्ट्रपति भवन ) से भाषण दिया था |


स्वतन्त्रता दिवश का महत्व

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15 अगस्त हमारा राष्ट्रीय पर्व है। इसका बहुत महत्व है। यदि यह दिन नहीं होता तो वे देशभक्ति की बातें किस माध्यम से कहते यह एक विचारणीय प्रश्न है। इस दिन को भारत का हर आदमी और युवा नौजवानों मैं इतनी देशभक्ति दिखाई देती है कि खुद देश की आत्मा तक कांप उठती है। वे इस दिन इतनी-इतनी आवाजों में इतनी-इतनी देशभक्ति पूरे देश में वितरित करते हैं कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक हर कान को काम मिल जाता है। देशभक्ति का एक-एक गाना तक इतनी भयानक आवाजों में पेश किया जाता है कि बेचारा गाना तक अपनी हालत को लेकर द्रवित हो जाता है, आम आदमी भी लगे हाथों इसी बहाने देश के प्रति द्रवित होने का कत्र्तव्य निपटा लेता है। तो 15 अगस्त हमारा राष्ट्रीय त्योहार है। इस दिन का बड़ा महत्व है।

इस दिन का हलवाइयों में भी बेहद महत्व है। वे दुकान के लिए बूंदी के नियमित उत्पादन के अलावा अतिरिक्त उत्पादन भी करते हैं। कुछ होशियार हलवाई कई स्कूलों तक पहुंच बनाकर आर्थिक स्वतंत्रता का महत्व भी समझ जाते हैं। इस दिन का सरकार के लिए भी बेहद महत्व है। सरकार बड़े सरकारी भवनों से लेकर सारे विभागों के रोशन कर देती है। इस माध्यम से दिन की रोशनी में स्वतंत्रता दिवस ठीक से नहीं समझ सके लोगों से उम्मीद की जाती है कि वे अब रात की रोशनी में इस बारे में समझशील बनें। सरकार कई आयोजन करवाती है। फिर छुट्टी देकर देशभक्ति के अतिरिक्त महत्व से भी जनता को अवगत करवाती है।

कर्मचारियों के दिलों में भी इस दिन का बड़ा महत्व है। वे इस दिन को कितना आदर देते हैं यह किसी से छिपा नहीं है। वे पूरे दिन अपनी नींद निकालते हैं। घरेलू काम निपटाते हैं। आलू-प्याज लाकर घर में भरते हैं। किराना लाकर पटकते हैं। दोपहर को टीवी पर आ रही देशभक्ति की पिक्चर के माध्यम देश के प्रति चिंतन का कार्यक्रम भी निपटा देते हैं। फिर सुकून से दोस्त के घर गप्पें लड़ाने के लिए निकल जाते हैं। इस पूरे कार्य के दौरान इस दिन का महत्व उनके दिमाग में लगातार बना रहता है।

यह दिन महत्वपूर्ण है ही। सबके लिए इसका अत्यंत महत्व है। इसी तरह बुजुर्गो के लिए इस दिन का अत्यधिक महत्व है। पूरा दिन वे टीवी देखने, अखबार पढ़ने और खांसने की गतिविधि को समर्पित करते हैं, जैसा कि वे रोज करते हैं। इतने महत्वपूर्ण दिन के बारे में जानते-जानते मामूली सी बात जानने से चूक जाते हैं कि इस दिन हजारों शहीदों के बलिदान से हमें आजादी मिली थी।

अंग्रेजो की गुलामी से बढ़कर देश मैं फैली भ्रष्टाचार की जंजीर 

लेकिन जिस देश को आज़ाद कराने के लिए हज़ारों लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी, उसी देश में आज लोग स्वार्थ, भष्टाचार, बेरोज़गारी, महंगाई, रिश्वतखोरी, दहेज आदि बुराइयों की गुलामी कर रहे हैं. अगर हमें अपने देश को दोबारा गुलामी की जंज़ीरों में जकड़ा हुआ नहीं देखना है, तो इन सब बुराइयों को अपने समाज से उखाड़ फेंकना होगा.

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