69 हजार शिक्षक भर्ती के 19 हजार सीटों के आरक्षण विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से भर्ती का पूरा डेटा मांगा है। अब सरकार को मूल चयन सूची पेश करनी होगी, जिससे यह साफ हो सकेगा कि अभ्यर्थियों का चयन अंक, कैटेगरी और मेरिट के आधार पर किस तरह हुआ। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने सरकार से अभ्यर्थियों की नाम, क्रमांक, कैटेगरी, लिखित परीक्षा के अंक, ATRE अंक और क्वालिटी पॉइंट समेत पूरी जानकारी मांगी है।
सिर्फ 64-65% वालों का नहीं, पूरी रेंज का डेटा
कोर्ट ने साफ कहा कि केवल 64 या 65 प्रतिशत अंक वाले अभ्यर्थियों का डेटा पर्याप्त नहीं है। संबंधित अंक रेंज के सभी अभ्यर्थियों की जानकारी देनी होगी, ताकि चयन और मेरिट की पूरी स्थिति समझी जा सके।
गलत सवाल के एक अंक का भी हिसाब
सुनवाई में परीक्षा के गलत सवाल पर दिए गए एक अंक का मुद्दा भी उठा। कोर्ट ने पूछा कि यह अंक किन अभ्यर्थियों को मिला और इससे चयन सूची पर क्या असर पड़ा।
EWS और पहले से नियुक्त शिक्षकों का मुद्दा
अगर चयन सूची दोबारा तैयार होती है तो EWS अभ्यर्थियों को शामिल करने की मांग भी सामने आई। वहीं पहले से चयनित शिक्षकों की ओर से कहा गया कि नई सूची बनने की स्थिति में उन्हें सीधी भर्ती से बाहर न किया जाए।
सुनवाई में B.Ed और BTC अभ्यर्थियों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग आंकड़े सामने आए। सरकार ने सटीक आंकड़ा उपलब्ध कराने के लिए समय मांगा।
अब 6 अक्टूबर पर नजर
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से मूल चयन सूची और संबंधित डेटा उपलब्ध कराने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी। अभी चयन सूची दोबारा बनेगी या नहीं, इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

