छोटी दिवाली 2018 नरक चतुर्दशी की पूजा विधि और राजा बलि की कथा

छोटी दिवाली 2018 : धनतेरस के अगले दिन और बड़ी दिवाली से पहले आने वाली दिवाली जिसे हम छोटी दीपावली के नाम से जानते है | यह छोटी दिवाली कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की 14वीं (चौदस) के दिन आती है | और हम इसे नरक चतुर्दशी भी कहते है | कहा जाता है की इस दिन भगवान श्री कृष्ण और सत्यभामा ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था। इसी कारण इसे छोटी दिवाली कहते है | और घर को छोटे स्तर पर सजाया जाता है | इस दिन घर के मुख्य दरवाजे पर छोटी दिवाली पर रंगोली बनाई जाती है | चावल के आटे और लाल रंग की सिंदूर से पुरे घर में छोटे छोटे पैर बनाये जाते हैं। इस त्यौहार के दिन भगवान् राम और लक्ष्मीजी की पूजा की जाती है।

Narak Chaturdashi

 


1. Narak Chaturdashi 2018 

2018 में छोटी दिवाली मंगलवार 6 नवंबर 2018 को मनाई जाएगी।

2. छोटी दिवाली की पूजा विधि | 2018 Narak Chaturdashi Puja Vidhi 

छोटी दिवाली की पूजा विधि : छोटी दिवाली के दिन सुभ उठते ही सबसे पहले सूरज निकलने से पहले उठ कर शरीर पर तेल या उबटन लगाएं। इसके बाद स्नान करें। स्नान करने के बाद दक्षिण की ओर मुंह करके हाथ जोड़ें और यमराज जी से प्रार्थना करें। पूरा दिन भगवान का आचरण करें और शुभ कार्य करें। शाम के वक्त सभी देवी देवताओं की पूजा के बाद तेल के दीपक जलाकर मुख्य दरवाजे की चौखट पर रखें। अपने कार्यस्थल के मुख्य द्वार पर भी दीपक जलाएं। ऐसा करने से एक तो पाप नष्ट होते हैं और दूसरा माता लक्ष्मी का निवास होता है।

choti diwali

 


3. नरक चतुर्दशी की कथा | The Story of Choti Diwali

नरक चतुर्दशी की कथा : पौराणिक कथाओ के अनुसार कहा जाता है की राजा नरकासुर बहुत पापी था | उसे भगवान का वरदान था की वह माता भूदेवी के द्वारा ही मारा जायेगा | कहा जाता है की नरकासुर ने स्वर्गलोक पर भी अत्याचार करना शुरु कर दिया | विष्णुपुराण के अनुसार सभी देवता भगवान कृष्ण के पास गए और कहा की नरकासुर से हूँ परेसान है आप हमारी सहायता करे | तब भगवान कृष्ण अपनी पत्नी सत्यभामा जो की भूदेवी का पुनर्जन्म थी |भगवान कृष्ण उन्हें लेकर नरकासुर से युद्ध करने चला जाता है | नरकासुर ने एक तीर मारा जो भगवान कृष्ण के लगा इसी कारण सत्यभामा गुसे में हो गई और सत्यभामा ने नरकासुर को मार गिराया | इस प्रकार एक राक्षश को मरे जाने पर सभी देवता खुश हुए | विष्णु पुराण में कहा गया है की विष्णु ने वराह अवतार धारण कर भूमि देवी को समुद्र से निकाला था |और द्वापर युग में उल्लेख मिलाता है की भूमि देवी ने एक पुत्र को जन्म दिया था अत्यंत क्रूर असुर होने के कारण उसका नाम नरकासुर पड़ा।

Story of Narak Chaturdashi

 

नरकासुर प्रागज्योतिषपुर का राजा था |उसने मनुष्य और देवताओ को बहुत दुखी कर रखा था | उसने गंधर्वों और देवों की सोलह हजार अप्सराओं को अपनी अंत:पुर में कैद कर रखा था | कहा जाता है की नरकासुर एक बार अदिति के कर्णाभूषण उठाकर भाग गया था |इन्द्र की प्रार्थना पर भगवान कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा से आक्रमण किया | इस युद्ध में उन्होंने मुर, हयग्रीव और पंचजन आदि राक्षसों का संहार किया | भगवान कृष्ण इस युद्ध में थक जाने के बाद अपनी आँखे बंद करली तो नरकासुर ने हाथी का रूप धारण कर लिया | सत्यभामा ने उस असुर से लोहा लिया और नरकासुर का वध कर दिया ।इस युद्ध में कृष्ण भगवान ने सोलह हजार एक सौ कन्याओं को राक्षसों के चंगुल से छुड़ाया | इसलिय इस त्यौहार को नरक चतुर्दशी या ( चौदस ) या छोटी दिवाली के नाम से जाना जाता हैं |


4. छोटी दिवाली | वामन अवतार | राजा बलि की कथा 

छोटी दिवाली राजा बलि की कथा : कहा जाता है की राजा बाली महा दानी और पराक्रमी राजा था | सभी देवता बाली से डरते थे यहाँ तक की भगवान इन्द्र भी | उनको यह डर लग रहा था की बाली उनका राज्य न ले ले | इसलिय देवताओ ने भगवन विष्णु से कहा तब भगवान विष्णु ने वामन रूप धर कर राजा बाली से तीन पग भूमि मांग ली | बाली को पाताल लोक का राजा बना दिया | कहा जाता है की ओणम के दिन राजा बाली अपने पुराने राज्य को देखने आते है | वहा विष्णु भगवान की पूजा के साथ-साथ राजा बलि की पूजा भी की जाती है | नरकचतुर्दशी के दिन दीपक जलाने से वामन भगवान खुश होते हैं|

story of Waman Avatar

 


5. छोटी दिवाली की रस्मे और रिवाज़ | Happy Chhoti Diwali 2018

छोटी दिवाली के दिन घर की साफ सफाई के बाद घर को फूलो से सजा कर मुख्य द्वार पर रंगोली बनाई जाती है | शाम के समय भगवान् राम और लक्ष्मीजी की पूजा करते है | भगवान् राम और लक्ष्मीजी की पूजा के बाद घर की चारो दिशाओ में दियें जलाये जाते है | एक दिया तुलसी के पेड़ के पास दूसरा मुख्य दरवजे के पास तीसरा पानी की टंकी के पास चोथा अपने मेवासियो के पास रखा जाता है | ऐसा माना जाता है कि जो इस विशेष अवसर पर ऐसा नही करता है वह नरक में जाता है। यह दिन काली चौदस, छोटी दिवाली, रुप चतुर्दशी और रुप चौदस के नाम से भी जाना जाता है |

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